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सरकारी विनिवेश पर पड़ सकता है असर

देव चटर्जी और कृष्ण कांत / मुंबई August 22, 2019

वित्त वर्ष 2020 के लिए 1.05 लाख करोड़ रुपये के सरकारी विनिवेश के लक्ष्य को झटका लग सकता है क्योंकि सार्वजनिक क्षेत्र की कई कंपनियों के शेयर अब तक के निचले स्तर को छू गए हैं और कुछ शेयर एक दशक के निचले स्तर पर कारोबार कर रहे हैं। बीएसई पीएसयू इंडेक्स पिछले 52 हफ्ते में 22 फीसदी टूटा है जबकि इस साल जनवरी से अब तक 16 फीसदी फिसला है। इसकी तुलना में बेंचमार्क बीएसई सेंसेक्स पिछले 12 महीने में 4.7 फीसदी गिरा है और कैलेंडर वर्ष 2019 में हरे निशान में है। जनवरी से अब तक इसमें 1.1 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज हुई है।
 
जुलाई में घोषित बजट में वित्त मंत्री ने विनिवेश लक्ष्य बढ़ाकर 90,000 करोड़ रुपये से 1.05 लाख करोड़ रुपये कर दिया। वित्त मंत्री ने तब कहा था, सरकार पीएसयू की रणनीतिक बिक्री के साथ-साथ गैर-वित्तीय क्षेत्र में पीएसयू के एकीकरण पर विचार करेगी। लेकिन आंकड़े बताते हैं कि ऑयल इंडिया, जीआईसी ऑफ इंडिया, कोल इंडिया और एनटीएनएल के शेयर गुरुवार को अब तक के सबसे निचले स्तर को छू गए और कुछ अन्य कंपनियां मसलन सेल, शिपिंग कॉरपोरेशन और ओएनजीसी के शेयर एक दशक के निचले स्तर पर आ गए।
 
विश्लेषकोंं ने कहा कि अर्थव्यवस्था सुस्त हो रही है और कंपनियों की आय आगे और घटने की संभावना है, लिहाजा शेयर बाजार दबाव में रहेगा और पीएसयू शेयरों को सबसे ज्यादा झटका लगेगा। नोमूरा के विश्लेषकोंं ने कहा, आय अनुमान में लगातार हो रही गिरावट और वित्त वर्ष 2021 में इसमें और 3 फीसदी की कटौती की संभावना मानते हुए हम मार्च 2020 के लिए निफ्टी का लक्ष्य 12,900 से घटाकर 11,880 कर रहे हैं।  केंद्रीय पीएसयू को सबसे ज्यादा झटका लगा है क्योंकि ये मोटे तौर पर निवेश व पूंजीगत खर्च वाले क्षेत्र जैसे पूंजीगत सामान, बिजली, धातु व खनन और जिंस के क्षेत्र में हैं। इन क्षेत्रों में कंपनियों की आय की रफ्तार पर काफी असर पड़ा है क्योंकि अर्थव्यवस्था में निजी क्षेत्र पूंजीगत खर्च नहीं कर रहे हैं।
 
कमजोर लाभ के बावजूद लाभांश भुगतान के चलते पिछले कुछ वर्षों में केंद्रीय पीएसयू की बैलेंस शीट काफी कमजोर हुई है। 51 केंद्रीय पीएसयू की संयुक्त उधारी वित्त वर्ष 2019 में साल दर साल के हिसाब से करीब 18 फीसदी बढ़ी जबकि उनके परिचालन लाभ और शुद्ध लाभ में पिछले वित्त वर्ष में क्रमश: 10.9 फीसदी व 17 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज हुई। इस अवधि में उनका नकदी रिजर्व करीब 11 फीसदी घटा क्योंंकि उनमें से ज्यादातर ने लाभांश का भुगतान किया कमजोर लाभ के बावजूद शेयरों की पुनर्खरीद पर नकदी खर्च की। कुल मिलाकर इन केंद्रीय पीएसयू का कर्ज इक्विटी अनुपात वित्त वर्ष 2019 में 0.76 गुना रहा, जो एक दशक का सर्वोच्च स्तर है।
 
निवेश बैंकरों ने कहा कि पीएसयू के शेयरों की कीमतों में गिरावट का मतलब यह है कि सरकार न सिर्फ अपने विनिवेश लक्ष्य से चूकेगी बल्कि उसे अच्छा मूल्यांकन भी नहीं मिलेगा। बजट में जारी संशोधित अनुमान के मुताबिक, 2018-19 में सरकार ने विनिवेश के जरिए 80,000 करोड़ रुपये जुटाए थे। विनिवेश लक्ष्य में इजाफा इसलिए किया गया था क्योंंकि सरकार ने राजकोषीय घाटे का लक्ष्य 3.3 फीसदी रखा है, जो पहले वित्त वर्ष 2020 के लिए 3.4 फीसदी था। वित्त मंत्रालय कई सरकारी कंपनियों की रणनीतिक बिक्री और विभिन्न पीएसयू की जमीन व परिसंपत्तियों का मुद्रीकरण मानकर चल रहा है। जून 2019 से अब तक भारतीय इक्विटी में 10 फीसदी से ज्यादा की गिरावट आई है। जुलाई में घोषित बजट में किसी राजकोषीय प्रोत्साहन का अभाव इस बिकवाली की बड़ी वजह मानी जा रही है। 
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