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16 फीसदी लुढ़का डीएलएफ का शेयर

अर्णव दत्ता / नई दिल्ली August 22, 2019

गुरुग्राम में कथित तौर पर अनुचित तरीके से जमीन अधिग्रहण से जुड़े कानूनी मुकदमों की वजह से रियल एस्टेट क्षेत्र की दिग्गज डीएलएफ की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। उच्चतम न्यायालय की ओर से कंपनी को नोटिस जारी होने की खबर से इसके शेयर में आज खासी गिरावट आई और डीएलएफ का बाजार पूंजीकरण 6,758 करोड़ रुपये घट गया। डीएलएफ ने निवेशकों और बाजार विश्लेषकों की आशंका को दूर करने के लिए आज उनके साथ बातचीत की। भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने भी कंपनी से स्पष्टीकरण मांगा है। उच्चतम न्यायालय ने 22 जुलाई को नोटिस जारी किया था।
 
बीएसई पर डीएलएफ का शेयर सुबह कारोबार के दौरान 19.3 फीसदी लुढ़क गया था। हालांकि कारोबार की समाप्ति पर यह 15.91 फीसदी गिरकर 144.30 रुपये पर बंद हुआ। 2013 में आईपीओ लाने और पैसे जुटाने के मामले में अनियमितता की शिकायत को लेकर भी सेबी के साथ कंपनी का विवाद चल रहा है। इस मामले की शुरुआत याची केके सिन्हा द्वारा सेबी के पस 2013 में की गई शिकायत के साथ हुई थी। सेबी का प्रारंभिक आदेश डीएलएफ के खिलाफ था, लेकिन प्रतिभूति अपील पंचाट ने 2015 में डीएलएफ के पक्ष में फैसला सुनाया था। इसके बाद सेबी ने उच्चतम न्यायालय में अपील की थी। कंपनी पर यह आरोप भी है कि 2013 और 2019 में दो चरणों में पैसे जुटाने के दौरान कंपनी ने विभिन्न अदालतों में चल रहे जमीन से संबंधित लंबित मुकदमों का खुलासा नहीं किया था। इन दोनों चरणों में कंपनी ने यूबीएस, एचएसबीसी, मार्शल ऐंड वेस, गोल्डमैन सैक्स आदि से करीब 5,100 करोड़ रुपये जुटाए थे।
 
हालांकि कंपनी के प्रवक्ता ने किसी तरह की गड़बड़ी से इनकार किया है। उन्होंने कहा, 'सभी जरूरी खुलासे किए गए थे और क्यूआईपी में इसका उल्लेख किया गया था, जिसकी संबंधित वकीलों और बैंकरों ने भी जांच-परख की थी। जिस मामले की शिकायत की गई है वह करीब 5 से 6 एकड़ छोटे से भूखंड से जुड़ा है और यह जिस कंपनी के पास है वह हमारी सहायक इकाई नहीं है। उच्चतम न्यायालय ने नोटिस में इस पर केवल हमारी राय पूछी है।'  इसके अलावा कंपनी पर भूमि सीलिंग अधिनियम के उल्लंघन और हरियाणा में कई सहायक कंपनियों के जरिये कम कीमत पर भूखंड खरीदने का भी आरोप है। अपनी पिछली सालाना रिपोर्ट में डीएलएफ ने कहा था कि कंपनी के भूखंड रणनीतिक जगहों पर हैं और इसका अधिग्रहण ऐतिहासिक कीमतों पर किया गया है।वित्त वर्ष 2019 की सालाना रिपोर्ट में डीएलएफ लिमिटेड ने कहा था कि उसकी कम से कम 106 सहायक इकाइयों और 9 संबद्घ कंपनियां हैं, जिनमें उसकी हिस्सेदारी 25 से 97 फीसदी है। कंपनी के स्वतंत्र ऑडिटरों के मुताबिक 31 मार्च, 2019 तक डीएलएफ का अपनी सहयोगी कंपनियों, फर्मों और संयुक्त उपक्रमों में 9,535.9 करोड़ रुपये का निवेश था। कंपनी ने कहा कि गुरुग्राम में उसकी सहयोगी कंपनी डीएलएफ एसेट्स के दो भूखंड कानूनी पचड़े में फंसे हैं। इनका क्षेत्रफल 19.5 एकड़ और 37 एकड़ है। अलबत्ता, इस सहयोगी कंपनी को डीएलएफ साइबर सिटी डेवलपर्स (डीसीसीडीएल) को हस्तांतरित कर दिया गया था। 
 
डीसीसीडीएल डीएलएफ और सिंगापुर के सॉवरिन फंड जीआईसी का संयुक्त उपक्रम है। इसमें दो तिहाई हिस्सेदारी डीएलएफ के पास और एक तिहाई जीआईसी के पास है। अगस्त 2018 में डीएलएफ ने डीसीसीडीएल को अपना भुगतान 3,100 करोड़ रुपये घटाकर 5,600 करोड़ रुपये कर दिया। जीआईसी की डीएलएफ में भी अहम हिस्सेदारी है। डीएलएफ समूह का किराया कारोबार देखने वाली कंपनी डीसीसीडीएल में भी उसकी एक तिहाई हिस्सेदारी है। अप्रैल 2019 में उसने करीब सात करोड़ डीएलएफ शेयर 1,344 करोड़ रुपये में दूसरे संस्थागत निवेशकों को बेच दिए थे। अप्रैल 2018 में उसके पास डीएलएफ के 8.39 करोड़ शेयर थे जो अब 91 लाख रह गए हैं।
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