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प्लास्टिक के निर्यातक खोज रहे नया बाजार

दिलीप कुमार झा / मुंबई August 21, 2019

इस साल जून में अमेरिका द्वारा तरजीही व्यवस्था (जीएसपी) वापस लिए जाने के कारण निर्यात में गिरावट के डर से भारतीय प्लास्टिक निर्यातक प्लास्टिक बिक्री को बढ़ावा देने के लिए नए बाजार तलाश रहे हैं। इनमें अफ्रीका, दक्षिण अमेरिका और सीआईएस देश भी शामिल हैं। अमेरिका और चीन जैसे स्थायी बाजार अपनी खुद की समस्याओं से जूझ रहे हैं। इनके बीच चल रहे व्यापार युद्ध के अलावा भारत को लाभ प्रदान करने वाली जीएसपी सुविधा वापस लिए जाने और चीन में चल रही आर्थिक मंदी के कारण इन देशों में भारत का प्लास्टिक निर्यात धीमा होने के आसार हैं। भारत के कुल प्लास्टिक निर्यात में इन देशों का योगदान लगभग 30-35 प्रतिशत रहता है।
 
अफ्रीका, दक्षिण अमेरिका और सीआईएस देश जैसे इन तीन गंतव्यों में बड़ी मात्रा में प्लास्टिक की खपत होती है जिसमें भारत की हिस्सेदारी नगण्य है। दिलचस्प बात यह है कि भारतीय प्लास्टिक निर्यातकों ने वित्त वर्ष 2019-20 के लिए इन देशों में प्लास्टिक की मार्केटिंग और प्रचार पर अपना आवंटन दोगुना करते हुए 18 करोड़ रुपये कर दिया है, जबकि वित्त वर्ष 2018-19 में यह राशि लगभग नौ करोड़ रुपये थी। प्लास्टिक निर्यात संवर्धन परिषद के कार्यकारी निदेशक श्रीवास दासमहापात्र ने कहा कि जीएसपी लाभ वापस लिए जाने से हमारे अमेरिकी निर्यात पर नकारात्मक असर पड़ेगा। हमने वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय से अनुरोध किया है कि वह जीएसपी जारी रखने के लिए अमेरिका के साथ बातचीत जारी रखे या ऐसे कुछ अन्य उपायों के जरिये निर्यातकों को प्रोत्साहित करे जिन्हें वह उपयुक्त समझे। इस बीच हम सीआईएस देश, अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका जैसे नए बाजार तलाश रहे हैं। वहां हमारी उपस्थिति कम है लेकिन प्लास्टिक की खपत बहुत अधिक है। इसके लिए हमने मौजूदा वर्ष में अपना मार्केटिंग व्यय दोगुना कर दिया है।
 
वर्ष 2025 तक भारत का प्लास्टिक निर्यात मौजूदा 11 अरब डॉलर से बढ़ाकर तकरीबन दोगुना 25 अरब डॉलर करने का लक्ष्य प्राप्त करने के लिए भारत सरकार ने उद्योग को साथ मिलकर काम करने और देश में प्लास्टिक उद्योग द्वारा उठाए जाने वाली हरेक परेशानी को हल करने का भरोसा दिलाया है। दिलचस्प बात यह है कि भारत प्रमुख रूप से यूरोपीय देशों से करीब 10 लाख टन प्लास्टिक कबाड़ का आयात करता है जिसमें से 40 प्रतिशत भाग का इस्तेमाल निर्यात श्रेणी के प्लास्टिक निर्माण में किया जाता है।
 
मटीरियल रीसाइक्लिंग एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एमआरएआई) की प्लास्टिक समिति के अध्यक्ष और प्लास्टिक कबाड़ की देश की सबसे बड़ी आयातक लकीस्टार इंटरनैशनल के निदेशक चिंतन जैन ने कहा कि विकसित देशों से आयातित प्लास्टिक का कबाड़ सुरक्षित होता है, खतरनाक नहीं होता इसलिए आयातित कबाड़ के प्रत्येक भाग को उपयोग योग्य वस्तुओं के निर्माण के लिए प्रसंस्कृत किया जाता है। दूसरी बात यह कि कबाड़ के जरिये तैयार वस्तुएं प्राथमिक तरीके से उत्पादित प्लास्टिक की तुलना में 67 प्रतिशत तक सस्ती होती हैं। इसलिए इस कबाड़ आयात को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए ताकि भारतीय उपभोक्तााओं को सस्ते उत्पाद उपलब्ध हों और वस्तुओं का निर्यात प्रतिस्पर्धी दामों पर हो सके। 
 
वाणिज्य मंत्रालय को पेश की गई एक रिपोर्ट में इस बात पर प्रकाश डाला गया है कि ठोस प्लास्टिक कबाड़ आयात पर प्रतिबंध तुरंत हटा दिया जाना चाहिए। सरकार प्लास्टिक निर्यात के लिए प्रचारात्मक गतिविधियों पर व्यय की जानी वाली राशि में लगभग 70 प्रतिशत का योगदान करती है। ऑल इंडिया प्लास्टिक मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (एआईपीएमए) के अध्यक्ष मीला जयदेव ने सरकार से आग्रह किया है कि वह विदेशों में निर्मित मशीनों पर डंपिंगरोधी शुल्क वापस ले। हालांकि प्लास्टिक से बने तैयार उत्पादों को क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक सोझेदारी (आरसीईपी) की अपवाद सूची में रखा जाना चाहिए। इसके अलावा प्लास्टिक निर्माताओं ने सभी औद्योगिक गलियारों में उपलब्ध 25 प्रतिशत जमीन सूक्ष्म, लघु और मध्य उद्यमों (एमएसएमई) को आवंटित करने की भी मांग की है।
Keyword: india, plastic, export, america, GSP,,
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