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देश की इस्पात उत्पादन दर दुनिया से आगे

निर्माल्य बेहड़ा / भुवनेश्वर August 18, 2019

भारत के कच्चे इस्पात उत्पादन की वृद्धि दर कैलेंडर वर्ष 2019 के पहले छह महीनों के दौरान दुनिया के उत्पादन से ज्यादा हो गई है। विश्व इस्पात संघ (डब्ल्यूएसए) के अनुसार 2019 की पहली छमाही (जनवरी-जून) के दौरान इस धातु का उत्पादन पांच प्रतिशत तक बढ़कर 5.696 करोड़ टन हो गया, जबकि 2018 की इसी अवधि में 5.423 करोड़ टन उत्पादन दर्ज किया गया था। 2019 के पहले छह महीनों में विश्व का कच्चा इस्पात उत्पादन 92.51 करोड़ टन रहा जो 2018 की इसी अवधि की तुलना में 4.9 प्रतिशत बढ़ा। 2018 की पहली छमाही के दौरान एशिया में 66.02 करोड़ टन उत्पादन हुआ जिसमें 7.4 प्रतिशत की वृद्धि हुई। यूरोपीय संघ ने 2019 की पहली छमाही में 8.47 करोड़ टन इस्पात उत्पादन किया जो 2018 की इसी अवधि की तुलना में 2.5 प्रतिशत कम है।

 
2019 के पहले छह महीने में उत्तरी अमेरिका का कच्चा इस्पात उत्पादन 6.01 करोड़ टन रहा जो 2018 की पहली छमाही की तुलना में 1.4 प्रतिशत ज्यादा है। सीआईएस (स्वतंत्र राष्ट्रमंडल देश) क्षेत्र ने 2019 के पहले छह महीनों में 5.05 करोड़ टन कच्चे इस्पात का उत्पादन किया जो 2018 की इसी अवधि के बराबर रहा। जून 2019 में चीन का कच्चा इस्पात उत्पादन 8.75 करोड़ टन रहा। इसमें पिछले साल की तुलना में 10 प्रतिशत की वृद्धि हुई। इस अवधि में भारत ने 93 लाख टन कच्चा इस्पात उत्पादन किया। पिछले साल की तुलना में इसमें चार प्रतिशत वृद्धि हुई। जून 2019 में जापान ने 88 लाख टन कच्चा इस्पात उत्पादन किया जो पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 0.4 प्रतिशत घटा। इस दौरान दक्षिण कोरिया का कच्चा इस्पात उत्पादन पिछले साल की तुलना में 2.6 प्रतिशत लुढ़कर 60 प्रतिशत रहा।
 
भारत ने 2018 के दौरान दूसरे सबसे बड़े इस्पात उत्पादक देश के रूप में जापान का स्थान ले लिया। हालांकि वल्र्डस्टील के अनुसार चीन इस्पात का सबसे बड़ा उत्पादक है। कुल उत्पादन में इसका 51 प्रतिशत से अधिक योगदान रहता है। कैलेंडर 2018 में भारत का कच्चा इस्पात उत्पादन 4.9 प्रतिशत बढ़कर 10.65 करोड़ टन रहा जो 2017 में 10.15 करोड़ टन था। डब्ल्यूएसए ने अपन रिपोर्ट - लघु अवधि परिदृश्य अप्रैल 2019 में पूर्वानुमान जताया था कि 2019 और 2020 में भारत की इस्पात मांग में सात प्रतिशत का इजाफा होगा। नोटबंदी और वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के लागू होने के झटके को देखते हुए भारतीय अर्थव्यवस्था 2019 की दूसरी छमाही से शुरू होने वाली ऊंची दर की राह पर कदम रख सकती है। एसोसिएशन का कहना है कि हालांकि सार्वजनिक निवेश पर राजकोषीय घाटे का एक हद तक दबाव रह सकता है लेकिन विस्तृत रूप से जारी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं से 2019 और 2020 के दौरान इस्पात मांग में सात प्रतिशत से अधिक वृद्धि दर को समर्थन मिल सकता है।
Keyword: iron ore, export, import, steel,,
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