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नहीं हैं माहिर कामगार, रोबोट लगाते छोटी फर्मों का बेड़ा पार

पीरजादा अबरार /  August 18, 2019

बेंगलूरु के पेन्या इलाके में मंदिरों, कपड़ों की दुकानों और परचून की दुकान के बीच सुपर्णा प्लास्टिक्स की फैक्टरी स्थित है जिसे बहुत कम लोग ही जानते हैं। यह छोटी और निजी कंपनी है जो मुख्यत: सिंचाई के पाइप और प्लंबिंग सिस्टम में लगने वाले बॉल वॉल्व बनाती है। हैंगर जैसी दिखने वाली बिल्डिंग में मानव और रोबोट एक साथ काम करते हैं और धातु ग्राइंडिंग जैसी आवाज आती रहती है। सुपर्णा प्लास्टिक्स ने श्रम की बढ़ती लागत और कुशल श्रमिकों की कमी के कारण परिचालन को बनाए रखना कठिन हो रहा था और इसके उपाय के तौर पर कंपनी ने साल 2018 की शुरुआत में रोबोट के साथ काम शुरू किया। सुपर्णा प्लास्टिक्स के 32 वर्षीय निदेशक अरुण भट्ट एस. कहते हैं, 'अधिक बिक्री से सीजन में श्रमिकों की कमी के चलते हम कई बार ऑर्डर पूरे नहीं कर पाते थे। जबसे हमने ऑटोमेशन को अपनाया है थोड़ी राहत मिली है।' रोबोट को लाने के बाद से कंपनी के लाभ में 30 प्रतिशत और राजस्व वृद्धि में 20 प्रतिशत की तेजी आई है। आज के समय कंपनी गुणवत्ता को सुनिश्चित करते हुए अधिक ऑर्डर तैयार कर सकती है। 

 
सुपर्णा प्लास्टिक ऐसी कई सौ छोटी कंपनियों में से एक है जो अपने उत्पादन और गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए ऑटोमेशन प्रणाली का उपयोग कर रही हैं। आईटी पार्क, मॉल और ओला-उबर जैसी बड़ी कंपनियों के चलते छोटी कंपनियों के लिए कुशल श्रमिकों की भारी कमी हो रही है। इस कमी के साथ साथ श्रम की बढ़ती लागत से रोबोट का प्रयोग इस समस्या के उपाय के तौर पर देखा जा रहा है। पेन्या इलाके में स्थित सुपर्णा फैक्टरी में लगाए गए 10 रोबोट में से सात को जापान की इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी एप्सन ने बनाया है। इनमें से अधिकांश एप्सन स्कारा रोबोट (अर्थात सेलेक्टिव कंप्लायंस असेंबली रोबोट आर्म) लगाए गए हैं। कंपनी रोजाना करीब 20,000 बॉस वॉल्व्स बनाती है जो 'कृषिका' ब्रांड नाम से बाजार में बेचे जाते हैं। पहले, एक शिफ्ट के लिए प्रत्येक मशीन पर एक ऑपरेटर और एक सहायक की जरूरत होती थी। 
 
भट्ट कहते हैं, 'अब एक एप्सन रोबोट दो मशीनों पर काम करता है जिसके लिए सिर्फ ऑपरेटर की जरूरत होती है। सहायक को अब दूसरे कामों पर लगाया जाता है। एक बार रोबोट को आवश्यक सामग्री दे दी जाती है तो वह दिए गए समय के लिए लगातार काम करता रहता है।' रोबोट सुपर्णा के कर्मियों को तनाव संबंधी दुर्घटना से भी बचाता है और वॉल्व में लीक की पहचान करके गुणवत्ता सुधार में भी मदद करता है। सुपर्णा के लिए जरूरी ऐप्लिकेशन के आधार पर प्रत्येक एप्सन रोबोट की लागत 7-8 लाख रुपये है। फर्म को संबंधित निवेश पर जल्द ही रिटर्न मिलने की उम्मीद है। कंपनी कर्नाटक के दूसरे औद्योगिक क्षेत्र तुमकुर में अपना विस्तार कर रही है और यहां भी रोबोट लगाने पर विचार किया जा रहा है। 
 
विशेषज्ञों का मानना है कि छोटे और मध्यम उद्यमों में स्वचलन प्रक्रिया का उपयोग भारत के लिए नया ट्रेंड है। प्रबंधन सलाहकार फर्म प्रेक्सिस ग्लोबल अलायंस में प्रमुख (डिजिटल) जसप्रीत बिंद्रा कहते हैं, 'बड़ी कंपनियों में रोबोट और कोबोट (कोलब्रेटिव रोबोट) का उपयोग तेजी से हो रहा है लेकिन छोटी और मझोली कंपनियों में भी यह चलन बढ़ा है।' देश में एमएसएमई क्षेत्र में ऑटोमेशन की बढ़ती मांग के चलते एप्सन, यूनिवर्सल रोबोट और स्विटजरलैंड की एबीबी भारतीय बाजार में दांव लगा रही हैं। एप्सन ने भारत में 495 रोबोट इकाइयां लगाई हैं और कंपनी का अनुमान साल के अंत तक यह आंकड़ा 800 तक पहुंचाने का है। एप्सन इंडिया में निदेशक (लार्ज फॉर्मेट प्रिंटर, विजुअल प्रोडक्ट एंड रोबोट) पी. सत्यनारायण कहते हैं, 'हम लगातार रोबोट के इंस्टॉलेशन को बेहतर बना रहे हैं।'
 
औद्योगिक रोबोट के मामले में फिलहाल चीन सबसे आगे है। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में रोबोट अपनाने का चलन बढ़ा है और अमेरिका-चीन व्यापार युद्ध ने भारत के लिए संभावनाओं को बढ़ाया है। सत्यनारायण कहते हैं, 'इसलिए हमें उम्मीद है कि रोबोटिक्स कारोबार में तेजी आएगी क्योंकि वे यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि चीन से भारत आते समय तकनीक अपने स्थान पर रहे।' इंटरनैशनल फेडरेशन ऑफ रोबोटिक्स (आईएफआर) के अनुसार साल 2017 में भारत के विनिर्माण क्षेत्र में रोबोट सघनता (10,000 कर्मचारियों पर इंस्टॉल किए गए रोबोट की संख्या) तीन थी जबकि इस दौरान विश्व का औसत 85 था। यह दिखाता है कि इस क्षेत्र में फिलहाल काफी संभावनाएं हैं। 
 
एबीबी इंडिया में प्रमुख (रोबोटिक्स बिजनेस) सुब्रत कर्मकार बताते हैं कि भारत की बड़ी विनिर्माण इकाइयां, विशेषकर ऑटोमोटिव, खाद्य एवं पेय पदार्थ तथा कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में रोबोटिक्स और स्वचालन का उपयोग अधिक नहीं हो रहा है। वह कहते हैं, 'हालांकि अब छोटे रोबोट, आसानी से प्रोग्राम करने योग्य और कीमतों के मामले में सस्ते हुए हैं जिससे इस स्थिति में बदलाव आएगा। 'यूनिवर्सल रोबोट्स भारत में छोटे कारोबारियों के लिए कोबोट ला रही है जो मनुष्य के साथ मिलकर काम कर सकते हैं। इन्हें मौजूदा उत्पादन इकाई में आसानी से लगाया जा सकता है और विभिन्न उत्पादन तथा विनिर्माण के कार्यों को ऑटोमेटिक किया जा सकता है। अलग अलग जोड़ और घूमने की क्षमता के साथ कोबोट को मनुष्य के हाथ की तरह बनाया गया है। ये छोटे से क्षेत्र में काम करते हैं और सभी दिशाओं में 360 डिग्री पर घूम सकते हैं। यूनिवर्सल रोबोट्स का कहना है कि उसके कोबोट के लिए जटिल प्रोग्रामिंग की आवश्कता नहीं है और इसे मोबाइल फोन से भी ऑपरेट किया जा सकता है। कंपनी का अनुमान है कि अगले साल तक भारत में करीब 1,000 कोबोट होंगे। 
 
यूनिवर्सल रोबोट्स में महाप्रबंधक (दक्षिण एशिया) प्रदीप डेविड के अनुसार इंदौर, राजकोट, रायपुर और झारखंड जैसे क्षेत्रों में स्थित छोटी कंपनियों से कोबोट की मांग आ रही है। वह कहते हैं, 'ये सभी ऑटोमेशन की ओर बढ़ रहे हैं और इंडस्ट्री 4.0 का हिस्सा होंगे।' गुरुग्राम स्थित श्री साई मार्कर्स ऐंड एन्ग्रेवर्स यूनिवर्सल रोबोट्स की ग्राहक है। भारत के बड़े वाहन निर्माताओं को सामान बेचने वाली सांई मारकर्स ने जब स्वचालन की दिशा में कदम बढ़ाया तो सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि क्या छोटी सी जगह में रोबोट फिट हो पाएगा। यूनिवर्सल रोबोट्स ने इसका उपाय निकाला क्योंकि कंपनी के कोबोट फैक्ट्री फ्लोर पर सहायक वर्कर के स्थान पर आसानी से काम कर सकते हैं। 
 
यूनिवर्सल रोबोट्स की अन्य ग्राहक और पैकेटबंद खाना बेचने वाली श्री लक्ष्मी एग्रो फूड्स उत्पादन में अधिक स्थिरता लाने के लिए अपनी प्रोडक्शन लाइन का ऑटोमेशन करना चाहती है। चेन्नई स्थित यह कंपनी सेकंडरी पैकेजिंग के लिए सही समाधान खोज रही थी। आज कंपनी के फ्लोर पर काम कर रहे कोबोट ने कंपनी की मांग पूरी करने में अहम भूमिका निभाई है। अब कंपनी की महिला कर्मियों को रात देर तक काम करने की आवश्यकता नहीं है जिसके लिए कोबोट द्वारा किए जाने वाले बाधा रहित उत्पादन को अहम माना जा सकता है। 
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