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बेहतर प्रतिफल के बाद भी लंबी अवधि के फंड से करें तौबा

संजय कुमार सिंह /  August 18, 2019

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने चालू वित्त वर्ष में अपनी मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की तीसरी द्विमासिक बैठक में रीपो दर आश्चर्यजनक तरीके से घटा दी। केंद्रीय बैंक ने रीपो दर में 35 आधार अंक की कटौती की, जिसके बाद यह 5.75 फीसदी से कम होकर 5.40 फीसदी रह गई। इस कटौती के बाद ब्याज दरों की जो नई तस्वीर सामने आने लगी है, उसे देखते हुए डेट फंड में निवेश करने वालों को अपनी रणनीति में बदलाव करना पड़ेगा। इस बार जो कटौती की गई है, उसकी वजह देश-विदेश की अर्थव्यवस्था में आती मंदी है। उसे तेज करने के इरादे से ही यह कदम उठाया गया है। ऐक्सिस म्युचुअल फंड में नियत आय प्रमुख आर शिवकुमार कहते हैं, 'आरबीआई को उम्मीद है कि इस वित्त वर्ष के बाकी हिस्से में मुद्रास्फीति की दर 4 फीसदी के उसके लक्ष्य से कम ही रहेगी। महंगाई काबू में आने के बाद अब वह वृद्घि पर जोर देने की कोशिश कर रहा है क्येांकि पिछले कुछ समय में आर्थिक वृद्घि काफी धीमी हो गई है।'

 
विशेषज्ञों को लगता है कि चालू वित्त वर्ष की बाकी बची अवधि में केंद्रीय बैंक दरों में एक या दो बार कटौती कर सकता  है। रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने समिति की बैठक खत्म होने के बाद बताया था कि रीपो दर में 25 या 50 आधार अंक तक की कटौती पर समिति ने चर्चा की थी, लेकिन ऐसा लगा कि 50 आधार अंक की कटौती कुछ ज्यादा ही हो जाएगी। इस बयान के बाद कुछ विशेषज्ञ अनुमान लगा रहे हैं कि दरों में और कटौती की गुंजाइश अब नहीं बची है और अगर अर्थव्यवस्था की हालत बहुत पतली नहीं होती है तो ज्यादा से ज्यादा एक बार और कटौती की जा सकती है। लेकिन कई अन्य विशेषज्ञ इससे इत्तफाक नहीं रखते। एमके वेल्थ मैंनेजमेंट में शोध प्रमुख के जोसेफ थॉमस कहते हैं, 'महंगाई में नरमी बरकरार रहने की संभावना है, इसीलिए मुझे लगता है कि अभी दो बार दर कटौती की गुंजाइश है।'
 
ऐसी सूरत में देखते हैं कि निवेशकों को मौद्रिक नीति के फैसले के बाद अपने डेट फंड पोर्टफोलियो को किस तरह तैयार करना चाहिए। विशेषज्ञों की राय तो यही है कि निवेशकों के पोर्टफोलियो का ज्यादा से ज्यादा हिस्सा कम अवधि वाली फंडों से बना होना चाहिए। शिवकुमार कहते हैं, 'कम अवधि के फंडों में अच्छा खासा प्रतिफल हासिल हो रहा है। ऐसे में निवेशकों को उन फंडों में निवेश बनाए रखना चाहिए, जिनकी अवधि दो-तीन साल से अधिक नहीं है और जिनकी औसत परिपक्वता अवधि चार-पांच साल से अधिक नहीं है।'
 
पिछले एक साल पर नजर डालें तो दीर्घ अवधि के फंडों और गिल्ट फंडों ने दो अंकों में ऊंचे प्रतिफल दिए हैं। इसके बावजूद विशेषज्ञ निवेशकों को इन श्रेणियों के फंडों में रकम लगाने की सलाह नहीं दे रहे हैं। इसकी बड़ी वजह यह है कि इन श्रेणियों के फंडों में उतार-चढ़ाव बहुत अधिक रहता है। निवेशक अगर इनमें पांच साल या उससे अधिक समय के लिए निवेश करते हैं तो उन्न्हें अच्छा खासा प्रतिफल हासिल हो सकता है, लेकिन जिन वर्षों में दरों में इजाफा होता है, उन वर्षों में निवेशकों को नकारात्मक प्रतिफल सहना पड़ सकता है यानी उन्हें घाटा हो सकता है। इतना ही नहीं, प्रतिफल कम होने का सिलसिला बदल भी सकता है। थॉमस कहते हैं, 'पिछले दस साल में हमने यही देखा है कि 10 साल के सरकारी बॉन्ड पर प्राप्ति 6.5 फीसदी से नीचे जाती है तो कुछ ही अरसे में उसकी चाल बदल जाती है और प्राप्ति बढऩे लगती है।' सरकार विदेशी बाजार से रकम जुटाने की अपनी योजना को शायद ठंडे बस्ते में डालने जा रही है और उसके बदले वह घरेलू बाजार से ही अधिक उधार ले सकती है। ऐसा होता है तो प्राप्तियों में उछाल आएगी। थॉमस सुझाव देते हैं कि जिन निवेशकों ने छोटी अवधि के लिए कारोबार करने की योजना बनाई है, उन्हें ही दीर्घ अवधि के बॉन्ड या फंड पर दांव लगाना चाहिए।
 
डायनमिक बॉन्ड फंड ने पिछले एक साल के दौरान दो अंकों में ऊंचा प्रतिफल दिया है। शिवकुमार समझाते हैं, 'निवेशक अपने पोर्टफोलिया का बड़ा हिस्सा छोटी अवधि के फंडों में ही रखें, लेकिन वे अपने पोर्टफोलियो का कुछ हिस्सा डायनमिक बॉन्ड फंड में लगा सकते हैं। लेकिन उन्हीं फंडों में रकम लगाई जाए, जहां निवेशकों की ओर से फंड मैनेजर अवधि से जुड़े फैसले करते हैं।' थॉमस का कहना है कि लंबी अवधि के लिए रकम लगाने की इच्छा रख रहे निवेशक यदि कॉर्पोरेट बॉन्ड फंड और बैंकिंग एवं पीएसयू डेट फंड में निवेश करते हैं तो उनके लिए बेहतर होगा। जोसेफ बताते हैं, 'कॉर्पोरेट बॉन्ड फंड परिपक्व होने पर करीब 8 से 8.5 फीसदी तक प्रतिफल प्रदान कर रहे हैं और उनकी औसत परिपक्वता अवधि 1-2 साल होती है। बैंकिंग और पीएसयू डेट फंडों में परिपक्वता के समय प्रतिफल की दर करीब 7.75 से 8.15 फीसदी होता है और वे औसतन 3-3.5 साल में परिपक्व होते हैं।'  उनका कहना है कि दीर्घ अवधि वाले डेट फंडों या गिल्ट फंडों की तुलना में इन फंडों में जोखिम के बदले बेहतर प्रतिफल हासिल होता है। लेकिन अंत में फंडी की साख का ध्यान जरूर रखें।
Keyword: RBI, SBI, repo rate, loan, interest, fund,,
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