बिजनेस स्टैंडर्ड - डेवलपर कर्ज पचाएगा तो आपका मकान जाएगा
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Tuesday, September 17, 2019 12:29 PM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम विश्लेषण खबर

डेवलपर कर्ज पचाएगा तो आपका मकान जाएगा

तिनेश भसीन /  August 18, 2019

पिछले हफ्ते दिल्ली के नजदीक नोएडा में एक हाउसिंग सोसायटी गार्डेनिया गेटवे में रहने वाले 200 से अधिक परिवारों को तगड़ा झटका लगा, जब उनके घर यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के नोटिस पहुंच गए। इन नोटिसों में उन्हें फौरन फ्लैट खाली करने के लिए कहा गया था। खबरों के मुताबिक नोटिस में लिखा था कि सोसायटी बनाने वाली डेवलपर कंपनी गार्डेनिया इंडिया ने बैंक से 78.45 करोड़ रुपये का कर्ज लिया था और बाद में उसने वह कर्ज नहीं चुकाया। हैरत भरी बात यह थी कि गार्डेनिया ने यह कर्ज उस परियोजना को गिरवी रखकर लिया था। नोटिस में बैंक ने यह भी कहा कि उसे कर्ज की वसूली के लिए संपत्ति को जब्त करने का पूरा अधिकार है।

 
वकील भी बैंक की दलील को सही ठहराते हैं। उनका कहना है कि अगर कोई डेवलपर कंपनी अपनी किसी परियोजना को गिरवी रखकर बैंक से कर्ज लेती है और बाद में कर्ज चुकाने में चूक कर जाती है या मुकर जाती है तो बैंक उस संपत्ति पर कब्जा कर सकता है। जे सागर एसोसिएट्स में पार्टनर कविता पटवद्र्घन कहती हैं, 'आम तौर पर जब कोई व्यक्ति किसी डेवलपर से संपत्ति खरीदने जाता है तो उसकी जांच-पड़ताल करना और यह देखना उसकी जिम्मेदारी है कि कागजात पूरी तरह दुरुस्त हैं या नहीं और संपत्ति पर कोई कर्ज तो नहीं चल रहा है।' वह समझाती हैं कि यदि कोई संपत्ति गिरवी रखी गई है तो खरीदार को डेवलपर से पूछना चाहिए कि कर्ज देने वाली संस्था ने उसे मकान बेचने के लिए अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) दिया है या नहीं और अगर दिया है तो उसे एनओसी दिखाया जाए। खरीदार अगर ऐसा नहीं करता है तो अदालत मान सकती है कि यह खरीदार की ही चूक है। अगर गार्डेनिया गेटवे मामले की बात करें तो उसमें समाधान इस बात पर निर्भर करता है कि खरीदारों के पास एनओसी है या नहीं अथवा उन्होंने स्टांप शुल्क तथा पंजीकरण शुल्क अदा किया है या नहीं अथवा वे केवल आवंटी हैं।
 
खरीदार की जिम्मेदारी
 
आम तौर पर यह जिम्मेदारी रियल्टी कंपनी की ही होती है कि परियोजना में कोई भी फ्लैट बेचते समय वह कर्ज देने वाली संस्था को उसकी सूचना दे और उस फ्लैट का चार्ज खरीदार को सौंपने के लिए ऋणदाता से कहे। वास्तव में रियल्टर कानूनी रूप से ऐसा करने के लिए बाध्य है। महाराष्ट्र जैसे कुछ राज्यों में कानून में यह स्पष्ट किया गया है कि निर्माणाधीन संपत्ति में साफ और बेचने लायक टाइटल रखने का जिम्मा डेवलपर कंपनी का ही है। यदि डेवलपर कर्ज देने वाली संस्था से एनओसी लिए बगैर ही खरीदार को स्टांप शुल्क का भुगतान करने और फ्लैट अपने नाम पर रजिस्टर कराने की अनुमति देता है तो इसे करार को तोडऩा माना जाएगा और यह राज्य के कानूनों का उल्लंघन भी होगा।
 
कुछ अरसा पहले तक कानून में संपत्ति खरीदने वालों के मुकाबले सुरक्षित ऋणदाताओं को अधिक वजन दिया जाता था। लेकिन उच्चतम न्यायालय ने इसी महीने आदेश दिया कि खरीदार (रियल एस्टेट विनियमन एवं विकास अधिनियम के अनुसार आवंटी) का दर्जा भी सुरक्षित ऋणदाता के बराबर ही होता है। जिन खरीदारों ने संपत्ति खरीदने के लिए कर्ज लिया है, उन्हें डेवलपर के बैंक से एनओसी मिला होगा। आम तौर पर कर्ज देने वाली संस्थाएं और बैंक तब तक आवास ऋण मंजूर नहीं करते, जब तक खरीदार उनके सामने एनओसी नहीं रख देता। उन खरीदारों को तरजीह मिल जाती है, जिन्होंने स्टांप शुल्क जमा कर दिया है और मकान अपने नाम रजिस्टर करा दिया है, लेकिन ऐसा करते समय डेवलपर को कर्ज देने वाली संस्था ने उनके मकान के गिरवी कागज वापस नहीं किए हैं। कविता कहती हैं, 'हालांकि मालिकाना हक ऐसे खरीदारों के नाम नहीं किया गया होगा, लेकिन अदालत में उनका पक्ष काफी मजबूत होगा।'
 
करार ही असली कुंजी
 
पिछले कुछ अरसे में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जहां डेवलपर के पास परियोजना गिरवी रखने का न तो अधिकार था और न ही शक्ति थी। लेकिन उसने परियोजना गिरवी रख दी। वरिष्ठ वकील हितेश जैन बताते हैं, 'हमने ऐसे कई मामले देखे हैं, जहां बैंकों ने लापरवाही बरतते हुए बिना देखे ही डेवलपर कंपनियों को कर्ज दे दिया, जबकि उन कंपनियों के पास जमीन गिरवी रखने का अधिकार ही नहीं था। ऐसा आम तौर पर संयुक्त विकास वाली परियोजनाओं में होता है, जहां रियल्टी कंपनी और जमीन के मालिक अलग-अलग होते हैं।' जैन का कहना है कि अगर डेवलपर के पास जमीन का मालिकाना हक नहीं है तो बैंकों को चूना लग जाता है क्योंकि उस सूरत में गिरवी कागजों को मान्यता ही नहीं दी जाती। इसीलिए मकान खरीदने वालों को बिल्डर के साथ हुए विकास के करार और बैंक के साथ हुए गिरवी करार को ठीक से जांच लेना चाहिए और देख लेना चाहिए कि कि डेवलपर के पास गिरवी रखने का अधिकार है भी या नहीं।
 
स्थगनादेश पाने की करें कोशिश
 
यदि डेवलपर के भीतर कर्ज चुकाने की क्षमता है तो कर्ज देने वाली संस्था ऋण वसूली अधिकरण (डीआरटी) का दरवाजा खटखटाएगी। यदि डेवलपर कर्ज चुकाने की हालत में नहीं है तो कर्ज देने वाले राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) का रुख करेंगे। यदि आपने ऐसी किसी संपत्ति में मकान खरीदा है और आप चाहते हैं कि कर्ज देने वाली संस्था आपके घर पर कब्जा नहीं करे तो आपको उस संस्था के कदम पर नजर रखनी पड़ेगी। संपत्ति खाली कराने का नोटिस हासिल करने के लिए वह संस्था डीआरटी के पास जाती है तो फ्लैट मालिकों को भी डीआरटी के पास जाना होगा और अगर वह एनसीएलटी का रुख करती है तो मकान मालिक भी वहीं जाएंगे। वकीलों का मशविरा यही है कि पूरी कोशिश कीजिए और कर्ज देने वाली संस्था अपनी रकम वसूलने के लिए अदालत में जो भी मुकदमा शुरू कराती है, उसमें पीडि़त पक्ष के तौर पर शामिल हो जाइए। इसके बाद मकान मालिक को अदालत से स्थगनादेश हासिल करने की कोशिश करनी चाहिए ताकि कर्ज देने वाली संस्थाओं को उनके फ्लैटों और संपत्तियों पर कब्जा करने से रोका जा सके। इसके लिए जरूरी है कि मकान मालिक अदालत को यह समझा दें कि यदि कर्ज देने वाली संस्था संपत्ति पर कब्जा कर लेती है तो उनके अधिकार खत्म हो जाएंगे।
 
वकीलों का कहना है कि अदालत में मुकदमे के लिए मकान खरीदार अपना संगठन भी बना सकते हैं। कभी-कभी ऐसा भी होता है कि डेवलपर कर्ज लेते समय ऋणदाता को निजी गारंटी उपलब्ध कराते हैं। यह निजी गारंटी कई तरह की हो सकती है। इसमें डेवलपर अथवा कंपनी के निदेशकों से संबंधित जमीन के टुकड़े भी हो सकते हैं और संपत्तियां भी हो सकती हैं। यदि कर्ज देने वाली संस्था के पास निजी गारंटी रखी गई है तो खरीदार अदालत में अर्जी दे सकते हैं कि ऋणदाता को अपना बकाया वसूलने के लिए डेवलपर की निजी गारंटी भुनाने का निर्देश दिया जाए।
Keyword: real estate, property, court, loan,,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 सऊदी अरब में उत्पादन बाधित होने से घरेलू बाजार में बढ़ेंगे तेल के दाम?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.