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एफआईआई और फंडों की घट रही वाहन शेयरों में दिलचस्पी

जश कृपलानी / मुंबई August 16, 2019

वाहन क्षेत्र में मंदी का असर विदेशी और घरेलू फंड प्रबंधकों, दोनों पर पड़ा है। शेयरधारिता आंकड़ों के अनुसार, म्युचुअल फंडों (एमएफ) और विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने जून में 34 ऑटो और ऑटो एंसिलियरी कंपनियों में हिस्सेदारी घटाई। एसबीआई म्युचुअल फंड (एमएफ) के मुख्य निवेश अधिकारी नवनीत मुनोट ने कहा, 'इस क्षेत्र में मंदी ने सभी को आश्चर्यचकित किया है। दरअसल, ऑटो एंसिलियरी क्षेत्र के पूंजीगत खर्च में कुछ सुधार की उममीद थी, लेकिन मांग में अचानक कमी की वजह से ऐसा संभव नहीं होगा। त्योहारी अवधि नजदीक होने से अगले कुछ महीने मौजूदा मंदी की भयावहता को मापने के लिए महत्वपूर्ण साबित होंगे।'
 
विश्लेषकों के अनुसार, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) के समक्ष पैदा हुए नकदी संकट से वाहन मांग भी प्रभावित हुई है, क्योंकि वाहन बिक्री का बड़ा हिस्सा एनबीएफसी द्वारा वित्त पोषित था। इसके अलावा, इन्वेंट्री की बढ़ती लागत से भी कई वाहन डीलरों को अपनी दुकानें बंद करने के लिए बाध्य होना पड़ा है। इसके अलावा, मौसम भी वाहन सेगमेंट के लिए दबाव बढ़ा सकता है। रिलायंस सिक्योरिटीज ने अपनी एक ताजा रिपोर्ट में कहा, 'भविष्य में हमें मंदी बरकरार रहने की आशंका है, क्योंकि एनबीएफसी क्षेत्र में नकदी संकट की वजह से ग्रामीण मांग तेज नहीं हो रही है, जबकि कई ग्रामीण बाजार मॉनसून में विलंब/अत्यधिक बारिश की वजह से भ प्रभावित हुए हैं।'
 
म्युचुअल फंडों द्वारा जिन शेयरों में निवेश में भारी कटौती की गई है, उनमें टाटा मोटर्स डीवीआर शेयर भी शामिल हैं। इन शेयरों में म्युचुअल फंडों की भागीदारी में 243 आधार अक की कटौती दर्ज की गई है। म्युचुअल फंडों ने जिन अन्य शेयरों में अपनी निवेश हिस्सेदारी घटाई है, उनमें महिंद्रा ऐंड महिंद्रा भी शामिल है। जून तिमाही के अंत में इस कंपनी में म्युचुअल फंडों की 9.6 प्रतिशत भागीदारी थी जो पूर्ववर्ती महीने की तुलना में 31 आधार अंक कम है। इसके अलावा, फंडों ने कई ऑटो एंसिलियरी कंपनियों में भी अपनी शेयरधारिता घटाई है। इनमें वाहन निर्माता इगारशी मोटर्स (100 आधार अंक तक की कमी), वाहन कलपुर्जा कंपनियों संधार टेक्नोलॉजीज (79 आधार अंक की कमी) और प्राइकोल (77 आधार अंक) शामिल हैं। 
 
कुल मिलाकर, म्युचुअल फंडों ने 34 कंपनियों में अपनी शेयरधारिता घटाई, 22 में इजाफा किया और 16 में उनकी शेयरधारिता अपरिवर्तित बनी रही। जिन शेयरों में एफआईआई ने बड़ी बिकवाली की, उनमें निर्माण उपकरण तथा ट्रैक्टर निर्माता ऐस्कॉट्र्स मुख्य रूप से शामिल हैं। इस कंपनी में एफआईआई की हिस्सेदारी में 422 आधार अंक की कमी दर्ज की गई। जून तिमाही के अंत में, ऐस्कॉट्र्स में एफआईआई हिस्सेदारी 20.38 प्रतिशत पर थी। इसके अलावा एफआईआई ने हीरो मोटोकॉर्प में भी अपनी शेयरधारिता 300 आधार अंक तक घटाई। ऑटो एंसिलियरी कंपनियों में वैरॉक इंजीनियरिंग में एफआईआई ने 210 आधार अंक और अमार राजा बैटरीज में 207 आधार अंक तक की कमी की।
 
कुल मिलाकर, एफआईआई ने 34 कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी घटाई, 20 में इजाफा किया और 17 कंपनियों में कोई बदलाव नहीं किया। फंड प्रबंधकों का मानना है कि मध्यावधि में कुछ सुधार देखा जा सकता है। आईडीएफसी एमएफ में इक्विटी प्रमुख अनूप भास्कर ने कहा, 'सकारात्मक बात यह है कि हम शेयरधारिता के संदर्भ में मौजूदा स्तरों से ज्यादा गिरावट दर्ज नहीं कर सकते। कई कंपनियां बीएस-6 मोडल पेश करेंगी। हालांकि वाणिज्यिक वाहनों की वृद्घि आर्थिक विकास और बुनियादी ढांचा खर्च पर निर्भर करेगी।'
 
मुनोट ने कहा, 'मौजूदा मंदी ढांचागत होने के बजाय काफी हद तक स्वाभाविक है।'  वाहन शेयरों में भी पिछले कुछ महीनों में भारी बिकवाली देखी गई है। इस साल अब तक बीएसई ऑटो इंडेक्स 25 प्रतिशत गिर चुका है। टायर निर्माता एमआरएफ और बालकृष्ण इंडस्ट्रीज के शेयरों में 14 और 20 प्रतिशत की गिरावट आई है। इसके अलावा मारुति सुजूकी, टाटा मोटर्स और बॉश जैसे शेयरों में भी इस साल अब तक बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। 
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