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टीसीएस पुनर्र्खरीद से टाटा संस की चांदी

देव चटर्जी / मुंबई August 13, 2019

टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा संस प्राइवेट लिमिटेड का शुद्ध मुनाफा वित्त वर्ष 2018-19 में 30 प्रतिशत तेजी के साथ 1,144 करोड़ रुपये रहा। टाटा संस के शानदार मुनाफे  की वजह यह है कि कंपनी ने नकदी से लैस टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेस (टीसीएस) में अपनी कुछ हिस्सेदारी 10,630 करोड़ रुपये में बेच दी थी। टीसीएस ने शेयरों की पुनर्खरीद की पेशकश की थी और इसी के जरिये टाटा संस ने अपना कुछ हिस्सा बेचा था। टाटा संस की 2018-19 की सालाना रिपोर्ट के अनुसार हिस्सेदारी बेचने से टाटा संस के मुनाफे का आंकड़ा और बढ़ सकता था, लेकिन आलोच्य अवधि में टाटा टेलीसर्विसेस की देनदारी चुकाने के लिए इसने इसमें (टाटा टेलीसर्विसेस में) अपना 14,690 करोड़ रुपये का निवेश बेच दिया। इससे पिछले वित्त वर्ष में भी टाटा संस ने अपनी दूरसंचार कंपनी की देनदारी के भुगतान के लिए वित्तीय प्रावधान किए थे। 
 
टाटा संस की कुल आय में सालाना आधार पर 27.7 प्रतिशत वृद्धि हुई और यह आंकड़ा आलोच्य वित्त वर्ष में 20,229 करोड़ रुपये रहा। दूसरी तरफ राजस्व में 10.5 प्रतिशत की तेजी आई, जबकि आय में 44.9 प्रतिशत की कमी आई। वित्त वर्ष 2017-18 में टाटा संस ने खुले बाजार में टीसीएस के 9,000 करोड़ रुपये मूल्य के शेयर बेचे थे, जिससे इसकी 'अन्य आय' में इजाफा हुआ था। टाटा समूह की कमान संभालने के बाद चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने टाटा टेलीसर्विसेस का कारोबार भारती एयरटेल को मुफ्त में स्थानांतरित कर दिया था और सभी बैंकों और सरकार को 50,000 करोड़ रुपये बकाए का भुगतान किया था। टाटा संस को अपनी साझेदार डोकोमो से टाटा टेलीसर्विसेस के शेयरों की पुनर्खरीद भी करनी पड़ी, जिससे वित्त वर्ष 2017-18 में इसकी देनदारी में अतिरिक्त बढ़ोतरी हो गई। 
 
माना जा रहा है कि इस तरह की कवायद चालू वित्त वर्ष में भी जारी रहेगी। दिलचस्प बात है कि 'अन्य आय' को छोड़ दें कंपनी का परिचालन मुनाफा वित्त वर्ष 2018-19 में 14 प्रतिशत कम होकर 5,138 करोड़ रुपये रह गया। इन आंकड़ों पर जब प्रतिक्रिया के लिए टाटा संस के प्रवक्ता से संपर्क साधा गया तो उन्होंने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। आलोच्य अवधि में टाटा संस ने बीमा कंपनियों जैसे भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) से 7,000 करोड़ रुपये मूल्य के गैर-परिवर्तनीय डिबेंचर की पुनर्खरीद भी की थी। इसकी वजह यह है कि बीमा नियामक ने बीमा कंपनियों को प्राइवेट लिमिटेड कंपनियों में निवेश करने से रोक दिया है। टाटा संस वित्त वर्ष 2018 में प्राइवेट लिमिटेड कंपनी बन गई थी, जिसके बाद इसे बीमा कंपनियों से डिबेंचर वापस खरीदना पड़ा। 
 
टाटा संस पर शुद्ध कर्ज वित्त वर्ष 2018 के 18,142 करोड़ रुपये से 50 प्रतिशत बढ़कर 31 मार्च 2019 को समाप्त हुए वित्त वर्ष में 27,587 करोड़ रुपये हो गया। इस वजह से कंपनी के वित्तीय खर्च में 36.5 प्रतिशत की तेजी देखी गई। चूंकि, कंपनी ने पहली बार विदेशी बाजार में रकम जुटाई थी, इसलिए हेजिंग (लेनदेन सुरक्षित करने के लिए किए गए प्रावधान) के मद में खर्च 476 करोड़ रुपये का भी प्रावधान करना पड़ा। वित्त वर्ष 2019 में इसने विदेशी बाजारों से 9,683 करोड़ रुपये जुटाया था। कर्मचारियों पर होने वाला खर्च भी बढ़कर 399 करोड़ रुपये हो गया। वित्त वर्ष 2018 के 239 करोड़ रुपये के मुकाबले इसमें 67 प्रतिशत वृद्धि देखी गई। कंपनी ने अपने शेयरधारकों को 1,000 प्रतिशत लाभांश देने का प्रस्ताव रखा है। इन शेयरधारकों में टाटा ट्रस्ट और मिस्त्री परिवार शामिल हैं।
Keyword: TCS, IT, network, digital, energy,,
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