बिजनेस स्टैंडर्ड - सोने में मजबूती बने रहने की संभावना
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सोने में मजबूती बने रहने की संभावना

पुनीत वाधवा / नई दिल्ली August 13, 2019

सोने की कीमतें इस साल अब तक अंतरराष्ट्रीय बाजार में 17 फीसदी बढ़कर 1,503 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई हैं। वैश्विक वृद्धि में गिरावट के दौर में अमेरिका और चीन के बीच चल रहे व्यापार युद्ध, अमेरिकी फेडरल रिजर्व के दर घटाने की संभावना, ईरान का परमाणु मुद्दा लंबे समय से बरकरार रहने और ब्रेक्जिट के संबंध में अनिश्चितता से सोने की कीमतों में तेजी आ रही है। विश्लेषकों का अनुमान है कि सोने में इतनी तेजी आने के बावजूद और तेजी की गुंजाइश है। इसकी वजह यह है कि अमेरिका और चीन के बीच कारोबारी बातचीत से संबंधित हाल के घटनाक्रम के बाद वित्तीय बाजारों में जोखिमों से बचने का रुझान बढ़ा है। इससे सुरक्षित निवेश के इच्छुक निवेशक सोने का रुख कर रहे हैं। 
 
जुलियस बेयर में अनुसंधान प्रमुख कार्सटेन मेंके ने कहा, 'हमारा मानना है कि कारोबारी तनाव और बढऩे के आसार हैं, जिसका वैश्विक वृद्धि के आउटलुक पर असर पड़ेगा और वर्तमान अनिश्चितताएं और बढ़ेंगी। हमारा अनुमान है कि सोने में और तेजी आएगी, जिसका पता हमारे तीन महीने के लक्ष्य 1,575 डॉलर प्रति औंस से भी चलता है। हालांकि हम यह भी स्वीकार करते हैं कि हाल की तेजी के बाद सुरक्षित निवेश के फायदे की कीमत चुकानी पड़ेगी। विश्लेषकों के बीच सोने में तेजी के रुझान पर सहमति बन रही है। कीमत लक्ष्यों को बढ़ाया जा रहा है, लेकिन बहुत अधिक नहीं। इसे हम एक चेतावनी का संकेत मानते हैं।' 
 
घरेलू बाजार में अर्थव्यवस्था में सुस्ती, कंपनियों की कमजोर आय और जोखिम से बचने के माहौल के कारण इक्विटी बाजार में भारी गिरावट आई है। ऐसे में निवेशक एक अनिश्चित माहौल में सुरक्षित निवेश के विकल्प के रूप में सोने पर दांव लगा रहे हैं। इस वजह से घरेलू बाजार में सोने के दाम इस साल अब तक 18 फीसदी चढ़ चुके हैं। ऐसे में सवाल पैदा होता है कि विश्लेषक सोने में तेजी का अनुमान क्यों जता रहे हैं? रिपोर्टों के मुताबिक सोने की कीमतों का औसत स्तर वर्ष 2016 में 1,203 डॉलर प्रति औंस, 2017 में 1,257 डॉलर प्रति औंस और 2018 में 1,269 डॉलर प्रति औंस रहा है। आम तौर पर सोने की कीमतें कम ब्याज दरों के दौर में चढ़ती हैं और दरों में बढ़ोतरी के समय गिरती हैं। इसमें मुद्रा बाजारों की भी अहम भूमिका होती है क्योंकि मजबूत डॉलर से अन्य मुद्राओं में सोना खरीदना महंगा हो जाता है और मांग घट जाती है। इसके अलावा भौगोलिक स्थायित्व भी एक अन्य कारक है, जिससे मांग और कीमतें बढ़ती हैं। 
 
केयर रेटिंग्स में मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस ने कहा, 'बाजार के कुछ भागीदारी वर्तमान तेजी को सतर्कता की नजर से देख रहे हैं। उनकी नजर इस बात पर है कि अमेरिका-ईरान और अमेरिका-चीन के बीच संबंध कैसे रहते हैं क्योंकि इसका सोने की कीमतों पर असर पड़ेगा। यह भी देखना होगा कि क्या अमेरिका में वृद्धि धीमी होती है, डॉलर पड़ता है और ब्याज दर घटती है।' दरों को लेकर विशेषज्ञों का अनुमान है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व चालू कैलेंडर वर्ष के अंत से पहले दो या तीन बार दरों में कटौती करेगा। उनका कहना है कि फेड के चेयरमैन पोवेल समेत बोर्ड सदस्यों के बयान स्थितियों के हिसाब से निर्णय का संकेत दे रहे हैं, लेकिन बाजार ने अपने पूर्वानुमान में कोई बदलाव नहीं किया है। इससे अगले कुछ महीनों में सोने की मांग और कीमतों को सहारा मिलेगा। विश्व स्वर्ण परिषद में  निदेशक (मार्केट इंटेलिजेंस) एलिस्टर हेविट ने एक हाल की रिपोर्ट में लिखा है, 'यह कदम केवल अमेरिकी फेडरल रिजर्व ही नहीं उठा रहा है। यूरोपीय केंद्रीय बैंक के अध्यक्ष द्राघी ने हाल में घोषणा की थी कि वे आर्थिक वृद्धि को बनाए रखने के लिए बॉन्ड खरीद को आगे बढ़ाने या दरों में कटौती के लिए तैयार हैं। बैंक ऑफ जापान (बीओजे) के भी नीति को ज्यादा अनुकूल बनाने के आसार हैं। उभरते बाजारों के केंद्रीय बैंकों के भी यही नीति अपनाने के आसार हैं। कम ब्याज दरों की संभावना से सोने में निवेश मांग को सहारा मिलेगा।'
 
चांदी में भी आई तेजी
 
सोने और चांदी की कीमतों में आज जबरदस्त उछाल देखी गई। मुंबई के हाजिर बाजार में चांदी तीन साल के उच्च स्तर 44,000 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर को पार कर गई। हालांकि पिछले कुछ समय से चांदी में नरमी का रुख था लेकिन अब इसमें शॉर्ट पोजिशन के कारण तेजी देखी जा रही है। चांदी आज 1,205 रुपये चढ़कर 44,280 रुपये किलोग्राम पर बंद हुई। चांदी का यह स्तर नंवबर 2016 में देखा गया था। स्टैंडर्ड सोना भी 600 रुपये चढ़कर 37,796 रुपये प्रति दस ग्राम पर बंद हुआ। सोने में पिछले कुछ समय से तेजी बनी हुई है। सोने की कीमतें इस साल अब तक अंतरराष्ट्रीय बाजार में 17 फीसदी बढ़कर 1,503 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई हैं।
 
एमसीएक्स पर सोने का अक्टूबर अनुबंध 35,600 रुपये प्रति दस ग्राम पर पहुंच गया, वहीं सितंबर के लिए चांदी का अनुबंध 44,500 प्रति किलोग्राम के स्तर को पार कर गया। केडिया कमोडिटीज के निदेशक अजय केडिया ने कहा, 'हॉन्ग कॉन्ग में राजनीतिक तनाव और डॉलर के मुकाबले रुपये में नरमी से बहुमूल्य धातु में सुरक्षित निवेश की पसंद बन रहा है। हॉन्ग कॉन्ग में लोकतंंत्र समर्थकों के प्रदर्शन और चीन द्वारा पश्चिमी राजनयिकों को इसमें हस्तक्षेप नहीं करने को कहने से वैश्विक निवेशकों में घबराहट है।' अर्जेंटीना के मौजूदा राष्ट्रपति के प्रारंभिक चुनावों में बड़ी हार की ओर से बढऩे से बाजार में घबराहट देखी गई, जिससे अर्जेंटीना की मुद्रा आज 25 फीसदी तक टूट गई। चीन के कारोबारी सोने और चांदी के अनुपात पर इस उम्मीद में दांव लगा रहे हैं कि चांदी की कीमत में भी सोने की तरह तेजी आ सकती है या अनुपात घट सकताा है।  
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