बिजनेस स्टैंडर्ड - कर्जमुक्त होती आरआईएल
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कर्जमुक्त होती आरआईएल

संपादकीय /  August 12, 2019

रिलायंस इंडस्ट्रीज (आरआईएल) पिछले कुछ समय के दौरान अपने बढ़ते कर्ज के कारण चर्चा में रही। कंपनी ने मोबाइल टेलीफोन में अरबों डॉलर का जो भारी भरकम निवेश किया है उसका प्रतिफल अभी उसे मिलना शेष है। इस कारोबार से अब तक इतना निवेश नहीं आ सका है जो इस उद्यम में लगने वाले भारी भरकम निवेश को उचित ठहरा सके। इसके कारण कंपनी के ऋण अनुपात में काफी इजाफा हुआ है जबकि बीते कुछ वर्षों के दौरान कंपनी का मुक्त नकदी प्रवाह नकारात्मक रहा है। वित्त वर्ष 2015 में जहां कंपनी की देनदारी 19 अरब डॉलर थी, वहीं 2019 में यह बढ़कर 65 अरब डॉलर हो चुकी है। इस परिदृश्य में विदेशी ब्रोकरेज कंपनी क्रेडिट सुइस ने आरआईएल की रेटिंग कम कर दी थी और एक सप्ताह पहले इसके लक्षित मूल्य में एक तिहाई की कटौती कर दी।चिंताएं वाजिब थीं। आरआईएल ने वित्त वर्ष 2019 में शुद्ध ऋण और इक्विटी अनुपात 0.58 गुना दर्शाया था जो हाल के वर्षों के उच्चतम स्तर में से एक था। इस बीच गत वित्त वर्ष में ब्याज कवरेज अनुपात गिरकर 5.6 गुना रह गया। यह बीते 15 वर्षों में सबसे कम है। अपनी रिपोर्ट में क्रेडिट सुइस ने कहा कि आरआईएल का मुक्त नकदी प्रवाह वित्त वर्ष 2015 से नकारात्मक रहा है और वित्त वर्ष 2021 तक इसके ऐसा ही रहने की आशंका है क्योंकि उसके मूल कारोबार ईंधन रिफाइनिंग और पेट्रोकेमिकल में मार्जिन का दबाव है। कंपनी की कुल देनदारी बढ़कर 65 अरब डॉलर हो चुकी है क्योंकि कच्चे तेल, जियो फोन फाइनैंसिंग और ईस्ट वेस्ट पाइपलाइन में कंपनी का काफी बकाया है। समान अवधि में कंपनी का कुल ब्याज भुगतान 1.2 अरब डॉलर से बढ़कर 4 अरब डॉलर हो गया। यह 2019 में कंपनी की ब्याज और कर पश्चात आय के करीब 44 फीसदी के बराबर है।

 
ऐसे में सोमवार को सऊदी अरामको को रिफाइनिंग और पेट्रोकेमिकल कारोबार में 20 फीसदी का इक्विटी साझेदार बनाने का निर्णय कंपनी के निवेशकों के लिए सुखद है। निवेशक इस बात को लेकर चिंतित थे कि कंपनी अपने जियो उपक्रम में चरणबद्ध उधारी के माध्यम से निवेश कर रही थी। कंपनी के रिफाइनिंग और पेट्रोकेमिकल कारोबार का सौदा मूल्य करीब 75 अरब डॉलर है। यानी आरआईएल को एकबारगी करीब 15 अरब डॉलर की राशि मिलेगी। कंपनी अपने ईंधन रिटेल कारोबार की 49 फीसदी हिस्सेदारी ब्रिटिश पेट्रोलियम को बेचकर करीब एक अरब डॉलर की राशि जुटाने जा रही है। दुनिया की सबसे बड़ी तेल उत्पादक कंपनी से दीर्घावधि की कच्चे तेल की आपूर्ति सुनिश्चित करने के अलावा आरआईएल निवेश का इस्तेमाल कर्ज कम करने या विस्तार में कर सकती है। कंपनी ने हाल ही में अपनी टावर और फाइबर परिसंपत्तियों में से 16.5 अरब डॉलर मूल्य की परिसंपत्ति को दो अलग-अलग निवेश न्यासों में बांट दिया। कंपनी का इरादा वहां बाहरी निवेशक जुटाने का है। अनुषंगियों की बात करें तो कंपनी की योजना जियो और रिलायंस रिटेल का मुद्रीकरण करने तथा अचल संपत्ति और वित्तीय निवेश का मूल्य हासिल कर मार्च 2021 तक कर्ज मुक्त हो जाने की है। रिफाइनिंग और पेट्रोकेमिकल कंपनी की कुल कर और ब्याज पूर्व आय का 79 फीसदी है। गत वित्त वर्ष में जियो की कर और ब्याज पूर्व हिस्सेदारी 13.3 फीसदी थी। 
 
बहरहाल आरआईएल की कुल परिसंपत्तियों में दोनों कारोबारों की समान हिस्सेदारी है। कंपनी को आगे जियो के पूंजी पर प्रतिफल में सुधार करना होगा जो अभी 3 फीसदी है। यह तभी होगा जब कंपनी मोबाइल शुल्क दर बढ़ाएगी या अपने उपभोक्ता आधार से पैसे जुटाएगी। सोमवार को कंपनी की वार्षिक आम बैठक में आरआईएल के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने कहा कि उन्हें इस बात में संदेह नहीं कि कंपनी दुनिया की सबसे मजबूत बैलेंस शीट वाली कंपनियों में शामिल होगी। अंशधारक भी चाहेंगे कि वे अपनी बात पर खरे उतरें। 
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