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बफर स्टॉक से बढ़ेगा चीनी मिलों का मार्जिन

दिलीप कुमार झा / मुंबई August 12, 2019

चीनी के 40 लाख बफर स्टॉक के प्रावधान से इसके दामों में 8-9 प्रतिशत तक वृद्धि होने की उम्मीद है। इस कारण अगस्त 2019 से शुरू हो रहे एक साल में चीनी मिलों का लाभ मार्जिन 5-6 प्रतिशत तक बढऩे की संभावना है। क्रिसिल की एक रिपोर्ट में पूर्वानुमान लगाया गया है कि अगस्त 2019 से जुलाई 2020 के बीच की अवधि के दौरान चीनी मिलों का एबिटा मार्जिन 500-600 आधार अंकों (5-6 प्रतिशत) तक बढ़ सकता है। चीनी मिलों पर गन्ना किसानों के बकाये भुगतान का बढ़ता दबाव होने की वजह से सरकार ने 24 जुलाई को 40 लाख टन बफर स्टॉक बनाने की अनुमति दी थी जिससे अंतत: चीनी की कीमतें बढऩे और इसके परिणामस्वरूप आमदनी बढऩे में मदद मिलने की उम्मीद है। क्रिसिल के निदेशक हितेल गांधी ने कहा कि बफर स्टॉक तैयार करने से स्टॉक रखने की लागत में 33 प्रतिशत की कमी आने और चीनी की कीमतों में 8-9 प्रतिशत इजाफे में मदद मिलने की उम्मीद है। 
 
उचित एवं लाभकारी मूल्य (एफआरपी) में कोई बदलाव नहीं होने से मार्जिन में और सुधार होगा। इस प्रकार 2020 में बड़ी चीनी मिलों के पूरे एबिटा मार्जिन में 5-6 प्रतिशत तक का सुधार होगा। गांधी ने स्प्ष्टï किया कि चीनी की कीमतों में वृद्धि के कारण एबिटा मार्जिन में तीन प्रतिशत की मदद मिलेगी। अपरिवर्तित एफआरपी पर एक प्रतिशत और सरकार द्वारा वहन की जाने वाली स्टॉक रखने की लागत में कमी के बाद दो प्रतिशत उछाल से यह मदद मिलेगी। मिलों की अधिक तरलता और लाभप्रदता से गन्ना बकाया में 13 प्रतिशत तक या 1,670 करोड़ रुपये की कमी आने की उम्मीद है जो जुलाई 2019 तक फिलहाल 15,200 करोड़ रुपये है। अगर चीनी मिलें अपनी अतिरिक्त आमदनी का उपयोग गन्ना किसानों के भुगतान में करती हैं, तो बकाये में और गिरावट आ सकती है।
 
हाल में ऐसे उदाहरण सामने आए हैं जिनमें कुछ मिलों ने मुनाफे में तेज सुधार के बावजूद अपना गन्ना बकाया भुगतान नहीं किया क्योंकि उन्होंने डिस्टिलरीज के विस्तार में पैसा लगा दिया जिसे सरकार द्वारा सब्सिडी दी गई है। इसलिए अगर गन्ना किसानों का भुगतान नहीं करने वाली मिलों के खिलाफ कड़े कदम नहीं उठाए जाते हैं तो गन्ना बकाया अधिक रहने की संभावना है। भारतीय चीनी मिल संघ (इस्मा) के महानिदेशक अविनाश वर्मा ने कहा कि पूरे 40 टन बफर स्टॉक केलिए प्रत्यक्ष सब्सिडी हस्तांतरण से चीनी मिलों के बोझ का एक बड़ा हिस्सा कम होगा। इससे न केवल चीनी मिलों को अतिरिक्त नकदी प्रवाह मिलेगा, बल्कि बाजार की धारणा में भी बड़े स्तर पर सुधार होगा। साथ ही एफआरपी में कोई बदलाव न होने से किसानों का गन्ना बकाया नियंत्रित रखने में भी मदद मिलेगी।
 
इस बीच इक्रा रेटिंग के वरिष्ठ उपाध्यक्ष और समूह प्रमुख सब्यसाची मजूमदार ने कहा कि इसके अलावा बफर स्टॉक बनाने से घरेलू बाजार में मांग-आपूर्ति की स्थिति में कुछ सुधार होगा जिसके परिणामस्वरूप चीनी की कीमतों को समर्थन मिलेगा। हालांकि कीमतों में कितना इजाफा होगा, फिलहाल इसका पता नहीं लगाया जा सकता है। इन कारकों के परिणामस्वरूप चीनी मिलों की तरलता में सुधार हो सकता है जिससे किसानों के गन्ना भुगतान में मदद मिल सकती है। चीनी वर्ष 2020 के दौरान घरेलू चीनी उत्पादन सालाना आधार पर 14 प्रतिशत तक की गिरावट के साथ लगभग 2.82 करोड़ रहने की संभावना है, जबकि 2019 में यह 3.29 करोड़ रहा। महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे प्रमुख चीनी उत्पादक राज्यों में कम उत्पादन के कारण ऐसा हो सकता है। चीनी वर्ष 2020 में चीनी की खपत 2.65 तक बढऩे की उम्मीद है।
Keyword: sugar, farmer, mills,,
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