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धान के रकबे पर बारिश ने फेरा पानी

सुशील मिश्र / मुंबई August 12, 2019

देश के लगभग सभी हिस्सों में बारिश की भरपाई हो गई है जिससे खरीफ फसलों की बुआई में भी तेजी आई है लेकिन खरीफ सीजन की सबसे प्रमुख फसल - धान की रोपाई की रफ्तार में सुधार नहीं हुआ है। चालू सीजन में धान की रोपाई पिछले पांच सालों मे सबसे कम हुई है। कई हिस्सों में बाढ़ के कारण फसल खराब होने की भी आशंका जताई जा रही है जिसका असर चावल उत्पादन पर पड़ेगा। कृषि मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों में धान की रोपाई सबसे कम बताई जा रही है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक देश में अब तक 265.20 लाख हेक्टेयर में धान की रोपाई हो सकी है जो औसत से 40.40 लाख हेक्टेयर कम है और पिछले साल इस समय तक हुई रोपाई की तुलना में 38.98 लाख हेक्टेयर पीछे चल रही है। पिछले पांच साल की बुआई के औसत रकबे के हिसाब से अब तक देश में धान की रोपाई 305.60 लाख हेक्टेयर में हो जानी चाह्रि थी। पिछले साल इस समय तक देश में 304.18 लाख हेक्टेयर में धान की रोपाई हो चुकी थी। 
 
चालू खरीफ सीजन में धान की रोपाई का कुल औसत रकबा 396.25 लाख हेक्टेयर आंका जाता है लेकिन बरसात में देरी के कारण इस बार औसत रकबे तक रोपाई पहुंचना मुश्किल लग रहा है। कृषि मंत्रालय ने भी चालू खरीफ सीजन में धान की रोपाई का औसत लक्ष्य घटाकर 296.12 लाख हेक्टेयर कर दिया है। मंत्रालय के अधिकारियों को लग रहा है कि इस सीजन में उनके द्वारा तय किए गए लक्ष्य तक रोपाई हो जाएगी। कृषि मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि कुल रकबे में जो कमी थी वह पिछले सप्ताह की तुलना में काफी बेहतर हुई है। अब इस कमी की काफी हद तक भरपाई हो गई है। धान का रकबा अब भी कम है और आने वाले हफ्तों में स्थिति बेहतर होगी क्योंकि बुआई सितंबर के पहले सप्ताह तक चलेगी।
 
धान की रोपाई कम होने के साथ ही महाराष्ट्र, कर्नाटक और बिहार सहित देश के कई हिस्सों में बाढ़ के कारण फसल खराब होने की भी आशंका जताई जा रही है जिसका असर चावल उत्पादन पर पडऩे वाला है। वर्ष 2018-19 के तीसरे अग्रिम फसल उत्पादन अनुमान के मुताबिक इस साल देश में 1,156.3 लाख टन चावल उत्पादन का अनुमान लगाया गया था। पिछले साल 2017-18 में देश में 1,127.6 लाख टन चावल उत्पादन हुआ था। कृषि मामलों के जानकारों के अनुसार धान की कम रोपाई और बाढ़ के कहर से चालू वर्ष में चावल उत्पादन पिछले साल से भी कम रहने वाला है। देश में चावल उत्पादन पिछले पांच वर्षों के निचले स्तर पर पहुंच जाए तो भी आश्चर्य नहीं होना चाहिए। 
 
हालांकि खरीफ सीजन की दूसरी फसलों की बुआई पिछले साल के करीब तक पहुंच चुकी है लेकिन बाढ़ के कारण उनका भी उत्पादन प्रभावित हो सकता है। केंद्रीय कृषि मंत्रालय के ताजा बुआई आंकड़ों के अनुसार खरीफ की सभी फसलों की बुआई का कुल रकबा साल भर पहले के 918.70 लाख हेक्टेयर के मुकाबले 869.55 लाख हेक्टेयर ही है। इस वर्ष खरीफ सीजन में 115.39 लाख हेक्टेयर में दलहन की बुआई की गई है। पिछले साल इसी अवधि में 121.39 लाख हेक्टेयर में दलहन की बुआई हुई थी। तिलहन की बुआई 157.17 लाख हेक्टेयर में की गई है जो पिछले साल इसी अवधि में 162.52 लाख हेक्टेयर थी। समीक्षाधीन अवधि में मोटे अनाज की बुआई 153.92 लाख हेक्टेयर में की गई है। पिछले साल की इस अवधि में यह रकबा 162.52 लाख हेक्टेयर था। गन्ने की बुआई का रकबा 52.30 लाख हेक्टेयर है जो पिछले साल 55.45 लाख हेक्टेयर था।
Keyword: agri, farmer, crop, monsoon, IMD,,
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