बिजनेस स?टैंडर?ड - डेरी उत्पादों के सहारे बाजार को साधने की तैयारी
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डेरी उत्पादों के सहारे बाजार को साधने की तैयारी

विवेट सुजन पिंटो /  August 12, 2019

न्यूजीलैंड स्थित फोंटेरा और भारतीय खुदरा क्षेत्र की प्रमुख कंपनी फ्यूचर समूह के संयुक्त उपक्रम ने पहला उत्पाद बाजार में पेश किया है। फोंटेरा के लिए यह भारत में कारोबार की दूसरी पारी है और ब्रिटानिया के साथ कंपनी की पहली पारी कड़वे अनुभवों के साथ खत्म हुई थी। पिछली बार की गलतियों से सीख लेते हुए कंपनी ने 'ड्रीमरी' नाम के ब्रांड को चुना है। हालांकि सवाल यह भी है कि क्या अव्यवस्थित लेकिन बेहतर कमाई वाले भारतीय डेरी बाजार में आने के लिए फोंटेरा ने देरी कर दी है? 

 
कंपनी का कहना है कि पिछले अनुभव के सहारे कारोबार को बेहतर तरीके से खड़ा करने में मदद मिलेगी। कंपनी ने पिछले वर्ष फ्यूचर समूह के साथ संयुक्त उपक्रम की घोषणा की थी। फोंटेरा फ्यूचर डेरी के अध्यक्ष सुनील सेठी और फ्यूचर कंज्यूमर की प्रबंध निदेशक अशनी बियाणी, दोनों इस बात पर जोर देते हैं कि पहला साल बाजार के लिए एक समझ विकसित करने में लगाया गया और ऐसे क्षेत्रों की पहचान की गई जहां यह संयुक्त उपक्रम बड़ा बदलाव ला सके। सेठी कहते हैं, 'हम कई डेरी संबंधी तकनीकें और गुणवत्ता के सख्त मापदंड लेकर आ रहे हैं।' वह कहते हैं, 'दूसरी ओर, फ्यूचर कंज्यूमर हमारे लिए बाजार की जटिल प्रणाली को आसान बना रही है और उत्पाद विकास में सहयोग कर रही है।' फोंटेरा और फ्यूचर ने चरणबद्ध तरीके से इस रणनीति पर काम करने की योजना बनाई है। ड्रीमरी दही और फ्लेवर्ड दूध के साथ देश के पश्चिमी हिस्से में काफी लोकप्रिय हो रही है और दूसरे क्षेत्रों में भी विस्तार पर जोर दे रही है। विशेषज्ञ बताते हैं कि यह कदम उनके अनुभव को प्रदर्शित करता है। 
 
फोंटेरा का पहला उत्पाद साल 2007 में लॉन्च हुआ था। इसने वर्ष 1999 में ब्रिटानिया के साथ साझेदारी की और पैकेज्ड दूध बाजार में पैठ बनाने के लिए आठ वर्ष लगाए। हालांकि कंपनी को इस साझेदारी की शुरुआत में ही यह समझ आ गया था कि इस बाजार में पहले से पैठ बना चुकी अमूल और मदर डेरी के बीच अपनी जगह बनाना आसान नहीं होगा। विशेषज्ञ कहते हैं कि जिस समय एक लाख करोड़ रुपये की कीमत वाले संगठित डेरी बाजार में भारी प्रतिस्पर्धा हो रही है, फोंटेरा ने अपना रास्ता बना लिया है। ब्रांड एडवाइजरी और शोध फर्म टीआरए के मुख्य कार्याधिकारी एन चंद्रमौलि ने कहा, 'जब अमूल और मदर डेरी जैसी सहकारी संस्थाएं यहां मौजूद हों, निजी क्षेत्र की कंपनियां अपनी रणनीति में ढील दे रही हैं। ऐसे में नई कंपनियों के लिए अपनी उपस्थिति दर्ज कराना काफी कठिन हो जाता है।' इस वर्ष की शुरुआत में फ्रेंच कंपनी लैक्टालिस ने प्रभात डेरी के दुग्ध उत्पाद कारोबार का 1,700 करोड़ रुपये में अधिग्रहण किया था। लैक्टालिस इससे पहले भारत में दो और अधिग्रहण कर चुकी है। इस समय ब्रिटानिया और नेस्ले अपनी डेरी संबंधी रणनीतियों में महत्त्वपूर्ण बदलाव कर रहे हैं और आईटीसी भी विस्तार योजनाएं बना रही है। 
 
बियाणी कहती हैं कि नई कंपनियों को शामिल करने के लिए भारत की घरेलू मांग ही काफी है। वह कहती हैं, 'फ्यूचर समूह के तहत हमने इस वित्त वर्ष में विभिन्न ब्रांड के तहत 900 करोड़ रुपये के डेरी उत्पाद बेचने का लक्ष्य तय किया है। यह आंकड़ा आसानी से बढ़ाया जा सकता है। संयुक्त उपक्रम की मदद से अगले पांच वर्ष में 6,000 करोड़ रुपये के कारोबार का लक्ष्य निर्धारित किया है।' पैकेट युक्त दूध भारत में संगठित डेरी बाजार का सबसे बड़ा हिस्सा है और एक अनुमान के मुताबिक इसका आकार लगभग 50,000 करोड़ रुपये है। शेष बाजार घी, दही, बटर, फ्लेवर्ड दूध, आइसक्रीम, चीज, पनीर और मिल्क शेक आदि उत्पादों में वितरित है। यह बाजार पैकेट युक्त दूध के मुकाबले दोगुनी वृद्धि से बढ़ रहा है। 
 
सेठी कहते हैं, 'भारत में मूल्य वद्र्धित डेरी उत्पाद का बाजार सालाना 20 प्रतिशत की तेजी से बढ़ रहा है, जबकि ताजा दूध इससे आधी दर से बढ़ रहा है। हम मूल्य वद्र्धित क्षेत्र पर अधिक ध्यान देना जारी रखेंगे।' विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले अनुभवों से सीख लेते हुए अपनी दूसरी पारी में कंपनी काफी सावधानी से कदम बढ़ा रही है। चंद्रमौलि कहते हैं, 'डेरी बाजार की प्रकृति स्थानीय होती है। अपनी पहली पारी से सीखते हुए वह सोची समझी रणनीति के साथ आगे बढ़ रही है और एक क्षेत्र में स्थानीय स्तर पर स्रोत, प्रसंस्करण तथा वितरण को मजबूत बनाने के बाद दूसरे क्षेत्र में विस्तार करने से कंपनी (फोंटेरा) को ग्राहकों की संख्या बढ़ाने में मदद मिलेगी।'
Keyword: amul, dairy, chocolate, cookies,
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