बिजनेस स?टैंडर?ड - बदलती जीवनशैली का फायदा उठाते डेरी ब्रांड
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बदलती जीवनशैली का फायदा उठाते डेरी ब्रांड

विनय उमरजी /  August 12, 2019

भारत में दूध कई वर्षों से समृद्घि और पोषण का प्रतीक रहा है। लेकिन पर्यावरण और स्वास्थ्य चिंताओं के कारण उपभोक्ताओं के एक वर्ग अब दूध और दुग्ध उत्पादों के बारे में अपनी पसंद-नापसंद को लेकर ज्यादा सतर्क और मुखर हो गया है। जिस तरह देश के छोटे-बड़े ब्रांड डेरी बाजार में उतर रहे हैं, उससे एक बड़ा बदलाव आ रहा है। पिछले कुछ समय से यह बदलाव साफ दिख रहा है। उपभोक्ताओं का एक वर्ग गाय और भैंस के दूध के इस्तेमाल से दूर होना चाहता है। बड़े शहरों में घरेलू ब्रांड इन चुनिंदा ग्राहकों को खास उत्पादों की आपूर्ति के लिए व्यापक पैमाने पर ई-कॉमर्स नेटवर्क का इस्तेमाल कर रहे हैं। उदाहरण के लिए बेंगलूरु की स्टार्टअप कंपनी गुडमिल्क लैक्टोज (दुग्धशर्करा) मुक्त, शाकाहारी दूध, दही और अन्य गैर डेरी दुग्ध उत्पाद बेचती है जबकि रॉ प्रेसरी नारियल बादाम दूध और बादाम दूध बेचती है। दोनों कंपनियों ने पहले उपभोक्ताओं के एक छोटे वर्ग को अपने ब्रांड की आपूर्ति की और फिर इसे व्यापक बाजार में ले गए। किसी भी ई-ग्रोसर कंपनी में लॉग ऑन कीजिए या किसी बड़ी खुदरा शृंखला में जाइए, आपको वहां गैर-डेरी दुग्ध उत्पादों की भरमार मिलेगी। 

 
रॉ प्रेसरी के एक प्रवक्ता ने कहा कि स्वास्थ्य सर्वेक्षणों के मुताबिक भारत में हर चार व्यक्तियों में से तीन को लैक्टोज से एलर्जी है। इसका मतलब है कि देश की 75 फीसदी आबादी गाय या भैंस का दूध पीने के लायक नहीं है। साथ ही स्वास्थ्य और फिटनेस के बारे में जागरूकता बढऩे से शहरों और कस्बों में लोगों का रुझान शाकाहारी जीवनशैली की तरफ बढ़ रहा है। यही वजह है कि परंपरागत दुग्ध उत्पादों के विकल्प की मांग तेजी से बढ़ रही है। लैक्टोज से एलर्जी रखने वाले ग्राहकों के बीच ऊंट के दूध की मांग बढ़ रही है जबकि शाकाहारी लोग सोयाबीन और बादाम के दूध का रुख कर रहे हैं। उपभोक्ता गैर-डेरी दुग्ध उत्पादों को पसंद करने वाले उपभोक्ताओं की संख्या दिन ब दिन बढ़ रही है और विभिन्न ब्रांडों के बीच इस मौके का फायदा उठाने की होड़ मची है। 
 
यूरोमॉनीटर इंटरनैशनल के मुताबिक सोयाबीन दूध का संगठित बाजार 2016 में 90.5 करोड़ रुपये का था जो 2018 में बढ़कर 125.2 करोड़ रुपये हो गया। 2018 से 2023 के बीच इसके 14.3 फीसदी के सालाना चक्रवृद्घि दर से बढऩे का अनुमान है। इस दौरान परंपरागत दुग्ध बाजार के 14.7 फीसदी की दर से बढऩे की उम्मीद है। यूरोमॉनीटर इंटरनैशनल के एक विश्लेषक ने कहा, 'स्वास्थ्य के बारे में बढ़ती जागरूकता से कंपनियों ने नए-नए उत्पादों के विकास पर जोर दिया है। कंपनियां अपने उत्पादों में पोषण क्षमता बढ़ाने के लिए उसमें बादाम और सूखे मेवे भी मिला रही हैं। साथ ही प्रौद्योगिकी में सुधार से उत्पादों की इस्तेमाल की अवधि भी बढ़ी है जिससे खुदरा व्यापारी उन्हें लंबे समय तक रख सकते हैं और उन्हें दूरदराज के क्षेत्रों में पहुंचाया जा सकता है।' अमूल ब्रांड का मालिकाना हक रखने वाली देश की सबसे बड़ी दुग्ध सहकारी कंपनी गुजरात सहकारी दुग्ध विपणन संघ ने भी ऊंट का दूध बाजार में उतारा है और लैक्टोज से एलर्जी रखने वाले लोगों के लिए विकल्प उतारे हैं। 
 
लेकिन इसमें पहल करने का श्रेय राजस्थान की कंपनी आद्विक फूड्स को जाता है जो राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र, मुंबई, हैदराबाद, बेंगलूरु और चेन्नई में ऊंट का ताजा दूध बेच रही है। यह दूध फ्रोजन और पाउडर के रूप में बेचा जा रहा है। इसकी मांग बढ़ती जा रही है। खासकर मधुमेह के रोगियों के बीच इसकी अच्छी खासी मांग है। यही वजह है कि आद्विक फूड्स अब अपना उत्पादन 25 से 30 फीसदी बढ़ा रही है। आद्विक फूड्स के संस्थापक हितेश राठी ने कहा, 'आजकल ज्यादा से ज्यादा लोगों को गाय और भैंस के दूध से एलर्जी के मामले सामने आ रहे हैं जिससे कई लोग इस तरह का दूध नहीं पी सकते हैं। साथ ही शहरी इलाकों में शाकाहार की तरफ लोगों का रुझान बढ़ रहा है।  इससे वैकल्पिक दुग्ध उत्पादों की मांग बढ़ी है। जब हमने 2016 में शुरुआत की थी तो हमने एक महीने में एक लीटर दूध बेचा। अब हम हर महीने 8000 से 10,000 लीटर दूध बेच रहे हैं। अगले कुछ वर्षों में ऊंट के दूध के साथ-साथ वैकल्पिक दुग्ध उत्पादों का बाजार 4 से 5 फीसदी की दर से बढ़ेगा।'
 
रॉ प्रेसरी मुख्यत: ताजा जूस बेचती है लेकिन उसने पिछले साल डेरी मुक्त बादाम दूध बेचना शुरू किया था और वह खुदरा और ऑनलाइन माध्यमों में अपनी उपस्थिति बढ़ा रही है। रॉ प्रेसली का बादाम दूध कंपनी का सबसे ज्यादा बिकने वाला उत्पाद है। रॉ प्रेसरी के प्रवक्ता ने कहा, 'ज्यादा से ज्यादा लोग वनस्पति उत्पादों का रुख कर रहे हैं। रॉ प्रेसरी कई ग्राहकों को सीधे उनके घर पर बादाम दूध की आपूर्ति कर रही है।' उपभोक्ताओं की बदलती जीवनशैली ने ब्रांडों को हटकर उत्पाद बनाने के लिए प्रेरित किया है जबकि खुदरा दुकानें भी वैकल्पिक दुग्ध उत्पादों को मुख्यधारा में जगह पाने में मदद कर रही हैं।
Keyword: amul, milk, dairy, chocolate, cookies,
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