बिजनेस स?टैंडर?ड - कुकीज बाजार में आक्रामकता की रणनीति पर सवार अमूल
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कुकीज बाजार में आक्रामकता की रणनीति पर सवार अमूल

टी ई नरसिम्हन /  August 12, 2019

गुजरात सहकारी दुग्ध विपणन संघ (जीसीएमएमएफ) के स्वामित्व वाला डेरी ब्रांड अमूल आक्रामकता को भी अपनी मार्केटिंग रणनीति का हथियार बना रहा है। यह बाजार में अपने तुलनात्मक रूप से नए कुकी ब्रांड को स्थापित करने की कोशिश कर रहा है। यह ब्रिटानिया, पारले और आईटीसी जैसे अपने प्रतिस्पर्धी ब्रांडों के कुकीज में बटर को लेकर उन्हें चुनौती दे रहा है। इसका कहना है कि वह एकमात्र ऐसा ब्रांड है, जो इस मामले में खरा उतरता है। जीसीएमएमएफ की यह रणनीति ठीक वैसी ही है, जो कुछ साल पहले इस्तेमाल की गई थी। तब इसने आइसक्रीम को लेकर सीधे हिंदुस्तान यूनिलीवर को चुनौती दी थी। उस समय इसने दावा किया था कि अमूल एकमात्र ऐसी आइसक्रीम है, जिसे आइसक्रीम कहा जा सकता है क्योंकि वह वनस्पति तेल नहीं बल्कि दूध और क्रीम का इस्तेमाल करता है। जबकि प्रतिस्पर्धी कंपनियां वनस्पति तेल का इस्तेमाल कर रही हैं। इस बार भी जीसीएमएमएफ के हैशटैग अमूल बटर कुकी चैलेंज के तहत प्रतिस्पर्धी ब्रांडों पर ऐसे ही आरोप लगाए गए हैं।  कंपनी ने कहा है कि इन दिनों इस्तेमाल होने वाला 'बटर कुकीज' नाम भ्रामक है क्योंकि इन कुकीज में बटर कम और वनस्पति तेल अधिक होता है। इस चैलेंज में ग्राहकों से कहा गया है कि वे अन्य बटर कुकीज ब्रांडों के दांवों की पड़ताल करें और उनका भंडाफोड़ करें। जीसीएमएमएफ के एमडी आर एस सोढी ने कहा कि इसका मकसद लोगों में बटर और वनस्पति तेल से बने उत्पादों में भेद करने की जागरूकता पैदा करना है। 

 
सोढी ने कहा, 'इससे (वनस्पति तेल के इस्तेमाल से) सभी बटर कुकीज की छवि खराब हो रही है, जिसका अमूल ब्रांड के कुकीज पर भी असर पड़ रहा है। इसलिए हमने यह अभियान शुरू किया है।' अब तक प्रतिस्पर्धी कंपनियां शांत हैं। आईटीसी और ब्रिटानिया ने ईमेल का जवाब नहीं दिया, जबकि पारले ने कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। दो साल पहले, जब जीसीएमएमएफ ने आइसक्रीम को लेकर हिंदुस्तान यूनिलीवर को चुनौती दी थी तो इस बहुराष्ट्रीय कंपनी ने भी पलटवार किया था और दोनों ने दावे और जवाबी दावे को लेकर एक-दूसरे को अदालत में घसीटा था। बाद में यह मामला खुद ही सुलझ गया, लेकिन इससे अमूल की आइसक्रीम की अलग पहचान कायम करने में मदद मिली। 
 
इस बार भी रणनीति वही है। अमूल ब्रांड 41,000 करोड़ रुपये का है और इसे देश में डेरी बाजार का अगुआ माना जाता है। लेकिन अभी तक यह ब्रांड देश के 15,000 करोड़ रुपये के कुकीज बाजार में पिछड़ रहा था। अमूल ने कुछ साल पहले इस बाजार में अमूल बटर कुकीज के साथ प्रवेश किया था। अभी केवल गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान में इसकी मौजूदगी है। इसने अगले 2-3 वर्षों में देश भर में विस्तार की योजना बनाई है। अमूल न केवल कुकीज बाजार में अपने ब्रांड की पहचान बनाना चाहता है, बल्कि यह खुद को शुद्ध और प्रामाणिक मंच के रूप में स्थापित किया जा रहा है ताकि अपने कुकीज की ऊंची कीमतों को तर्कसंगत साबित कर सके। 
 
सोढी का दावा है कि अमूल बटर कुकीज को बनाने में 25 फीसदी बटर इस्तेमाल किया जाता है, जबकि वनस्पति तेल का बिल्कुल उपयोग नहीं किया जाता है। वहीं अन्य कुकीज में वनस्पति तेल की मात्रा 20 से 22 फीसदी तक होती है। जब अमूल ने अपने सोशल मीडिया टाइमलाइंस पर चैलेंज पोस्ट किया तो ग्राहकों ने प्रतिस्पर्धी कुकीज पैकेज की तस्वीरें और उनमें बटर की मात्रा को उजागर करना साझा करना शुरू कर दिया। जीसीएमएमएफ ने पहले 100 पोस्ट के लिए इनाम की घोषणा की, जिससे पोस्टों का रुझान बढ़ा और इसका नतीजा यह है कि ब्रांडों को अलग-अलग देखा जाने लगा है। अमूल पहले से स्थापित ब्रांडों को चुनौती दे रहा है और खुद को पुराने ब्रांडों से अलग स्थापित कर रहा है। हरीश बिजूर कंसल्ट्स के संस्थापक हरीश बिजूर ने कहा, 'मार्केटिंग की दुनिया दावे और पलटवार के दावे की दुनिया है। उत्पादों को बेचने के विशिष्ट तरीकों (यूएसपी) के समक्ष प्रतिस्पर्धी यूएसपी पेश किए जाते हैं। अमूल ब्रांड के लिए यह बटर क्षेत्र में अपनी इक्विटी को सुरक्षित बनाने का मसला है।'  
 
सोढी के लिए बटर 'चैलेंज' केवल एकबारगी का मामला नहीं है। वह ब्रांड के संदेश में निरंतरता चाहते हैं। वह कहते हैं कि अमूल ब्रांड की इस पहल का मकसद अपने मुख्य डेरी कारोबार को समर्थन देना और किसानों की आय को सुरक्षित बनाना है। वह कहते हैं कि अमूल को 10,000 टन कुकीज के लिए 2,500 टन बटर की जरूरत होती है, जिसमें बाजार में अतिरिक्त दूध की आपूर्ति खप जाती है और इससे किसानों को अच्छे दाम मिलते हैं। विशेषज्ञों ने कहा कि बटर का इस्तेमाल करना महंगा है और इसलिए अमूल के कुकीज के दाम प्रतिस्पर्धी कंपनियों के कुकीज की तुलना में दोगुने हैं। इस वजह से इस ब्रांड के लिए खुद को दूसरों से अलग करना जरूरी है।  हालांकि अमूल के प्रतिस्पर्धी ब्रांडों को चुनौती के दावे पर पलटवार नहीं किया गया है, लेकिन इस पर आगे पलटवार होने के आसार हैं। विशेषज्ञों ने कहा कि देश में बिस्कुट का बाजार 35,000 करोड़ रुपये का है, जिसमें कुकीज बाजार का योगदान करीब 40 फीसदी है। इस वजह से भी ब्रांडों का बड़ा कारोबार दांव पर लगा हुआ है और हर कोई अपनी जमीन को खोना नहीं चाहता है। लेकिन ब्रांडों के बीच जंग का मैदान तैयार हो चुका है। 
Keyword: amul, dairy, chocolate, cookies,
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