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शिक्षा ऋण लेने में हर्ज नहीं अगर ऋणदाता और पाठ्यक्रम हैं सही

सरबजीत सेन /  August 11, 2019

देश में शिक्षा जिस तरह महंगी होती जा रही है, उसे देखते हुए ताज्जुब नहीं होगा अगर कई छात्र अपनी पहली पगार से ही मासिक किस्त यानी ईएमआई भी चुकानी शुरू कर दें। किसी अच्छे भारतीय प्रबंधन संस्थान में दो साल का पाठ्यक्रम करने में 25 लाख रुपये से ज्यादा खर्च हो जाते हैं। यही पाठ्यक्रम विदेश में किसी अच्छे विश्वविद्यालय से किया जाए तो 1 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च करने पड़ सकते हैं। यह रकम इतनी बड़ी होती है कि छात्र या उसके परिवार के पास शिक्षा ऋण लेने के अलावा कोई और चारा नहीं रह जाता। 

 
मगर कर्ज देने वाले संस्थान भी कुछ खास पाठ्यक्रमों के लिए ही कर्ज देते हैं और उसके लिए वे गारंटर या जोखिम से बचने के लिए गिरवी की मांग भी कर सकते हैं। यदि आप कर्ज देने वाले संस्थान को शिक्षा ऋण देने के लिए मनाने में कामयाब हो गए हैं तो आपका वित्तीय सफर भी शुरू हो चुका है। आपको एक-एक पाई चुकाने के बाद ही राहत की सांस लेने का मौका मिलेगा। लेकिन इसके फायदे भी हैं। 
 
बनेगा क्रेडिट का रिकॉर्ड 
 
कर्ज लेते वक्त क्रेडिट स्कोर की बहुत अहमियत होती है। यह स्कोर 300 से 900 के दायरे में होता है। अच्छा क्रेडिट स्कोर तैयार होने में 18 से 36 महीने लगते हैं। 750 के स्कोर को अच्छा माना जाता है। अगर आप शिक्षा ऋण वक्त पर चुकाते रहते हैं तो आपका स्कोर भी बढ़ता है और क्रेडिट प्रोफाइल भी सुधरता है। अगर कर्ज नहीं चुका पाए तो क्रेडिट स्कोर बिगड़ सकता है और तमाम दिक्कतें पैदा हो सकती हैं।  फिनवे के संस्थापक एवं सीईओ रचित चावला कहते हैं, 'यदि कोई छात्र शिक्षा ऋण चुकाने में नाकाम रहता है तो उसका क्रेडिट स्कोर प्रभावित होगा और दूसरे प्रकार के कर्ज तथा क्रेडिट कार्ड लेने में दिक्कत आएगी।'
 
उधार लेने वाले पर असर
 
अगर कर्ज में बड़ी रकम मांगी जा रही है तो आम तौर पर बैंक या कर्ज देने वाली संस्था बतौर कर्जदार दो लोगों की फरमाइश करती है यानी उसे को-बॉरोअर की जरूरत होती है। अगर कर्ज चुकाने में चूक कर दी गई तो को-बॉरोअर का क्रेडिट रिकॉर्ड और क्रेडिट स्कोर भी खराब हो जाता है। चावला समझाते हैं, 'को-बॉरोअर भी बराबर का जिम्मेदार होता है और चूक हुई तो वह भी परेशानी में फंस जाएगा। यदि कर्ज के लिए किसी ने गारंटी ली होती है तो ऋणदाता संस्था भुगतान के लिए उसके पीछे पड़ जाती है।' अगर कर्ज लेने के लिए कोई संपत्ति गिरवी रखी गई है तो कर्ज देने वाली संस्था अपना बकाया वसूलने के लिए उसे जब्त कर सकती है।
 
आयकर लाभ भी
 
आयकर अधिनियम की धारा 80ई में कहा गया है कि शिक्षा ऋण पर चुकाए गए ब्याज की रकम के बराबर आयकर कटौती दी जाएगी। कर्ज की किस्त चुकाना शुरू करने के बाद आठ साल तक या कर्ज की कुल अवधि में से जो भी समय कम हो, उसके लिए आयकर में यह कटौती या छूट दी जाती है। आयकर दाता को कर्ज देने वाले से प्रमाणपत्र लेना पड़ता है, जिसमें स्पष्टï तौर पर बताया जाता है कि कुल कितना ब्याज चुकाया गया है क्योंकि ईएमआई में मूल राशि का भुगतान भी शामिल होता है। को-बॉरोअर बनने वाले माता-पिता को भी कर का फायदा मिल सकता है। लेकिन मूल राशि के भुगतान पर किसी तरह का कर लाभ नहीं मिलता।
 
बेहतर प्रबंधन की सीख 
 
यदि आप समय पर शिक्षा ऋण की ईएमआई चुकाते हैं तो आपको एक अहम वित्तीय सबक भी मिलता है। यह सबक उस वक्त आपके बहुत काम आएगा, जब आप बाद में बड़ा कर्ज लेंगे।  यदि किसी युवा के ऊपर पगार शुरू होते ही ईएमआई का बोझ भी पड़ जाता है तो वह अपने पास आने वाली नकदी का बेहतर प्रबंधन करना सीख जाता है।
 
प्री-पेमेंट कितना सही?
 
यह सवाल हरेक कर्जदार के मन में आता है, लेकिन इसका जवाब कई पहलुओं पर निर्भर करता है। सामान्य समझ से चलें तो यही कहा जाएगा कि जब आपके पास अतिक्ति रकम हो तो कर्ज की कुछ रकम वक्त से पहले चुका देनी चाहिए यानी प्री-पेमेंट कर देना चाहिए। क्यूबेरा डॉटकॉम के संस्थापक एवं मुख्य कार्य अधिकारी आदित्य कुमार कहते हैं, 'शिक्षा ऋण को वक्त से पहले चुका देना निश्चित रूप से समझदारी होगी क्योंकि इससे लंबे समय तक कर्ज का बोझ नहीं सहना पड़ेगा। अगर आप प्री-पेमेंट कर देते हैं तो कर्ज पर बतौर ब्याज चुकाई गई रकम भी अच्छी खासी कम होगी।' लेकिन अकसर बैंक शिक्षा ऋण को वक्त से पहले चुकाने पर तगड़ा शुल्क वसूलते हैं। ईएमआई शुरू होने के बाद 6 से 12 महीने के भीतर ही अगर पूरी रकम चुकाने जाएं तो खास तौर पर आपसे शुल्क वसूला जाएगा। अगर आप प्री-पेमेंट के बारे में सोच रहे हैं तो इस बात का भी ध्यान रखिए। कभी-कभी छात्र काफी लंबे अरसे के लिए शिक्षा ऋण लेते हैं। आम तौर पर 15 साल तक के लिए शिक्षा ऋण लेने का विकल्प मिलता है यानी कर्ज चुकाने के लिए आपको अधिकतम 15 साल मिल सकते हैं। 
 
लेकिन इसमें चुकाए गए ब्याज पर कर छूट का फायदा अधिकतम 8 साल तक ही मिलता है। कभी-कभार करियर तेज रफ्तार से आगे बढ़े तो कर्ज लेने वाले के पास अच्छी खासी रकम जमा हो जाती है। यदि ऐसा हो तो आठ साल पूरे होते-होते शिक्षा ऋण चुका दें क्योंकि उसके बाद आयकर में किसी तरह का फायदा नहीं मिलेगा। आखिरी मगर अहम बात, समूचा शिक्षा ऋण चुकाने के बाद कर्ज देने वाली संस्था या बैंक से अनापत्ति प्रमाण पत्र लेना नहीं भूलें ताकि आपके पास इस बात का सबूत हो कि आप पर किसी तरह की देनदारी नहीं रह गई है।
Keyword: education loan, bank,,
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