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नई तकनीक और आविष्कार बदल रहे कपड़ा कारोबार

रोमिता मजूमदार /  August 11, 2019

मई में न्यूयॉर्क में सालाना मेट गाला समारोह के दौरान जब अभिनेत्री दीपिका पडुकोण रेड कारपेट पर चलीं तो अधिकांश लोगों ने उनके द्वारा पहने गए परिधान की प्रशंसा की। यह डिज्नी राजकुमारी और बार्बी डॉल के फ्यूजन से बना गुलाबी रंग का गाउन था। उनके इस परिधान को बनाने में 3डी प्रिटिंग और स्टीरियोलीथोग्राफी जैसी नई तकनीकों के साथ साथ कुल 160 घंटे लगे। स्टीरियोलीथोग्राफी 3डी छपाई की एक प्रक्रिया है, जिसमें प्लास्टिक जैसे तरल पदार्थ को लेजर की सहायता से ठोस में बदला जाता है और कोई भी संरचना सतह दर सतह बनाई जाती है। अमेरिका स्थित जीई एडिटिव्स ऐंड प्रोटोलैब्स ने इस नई तकनीक को ईजाद किया है।  

 
भारतीय कपड़ा उद्योग भी तकनीक के इस नए युग (इंडस्ट्री 4.0) को अपनाकर क्षमता और गुणवत्ता बेहतर करने पर काम कर रहा है। इससे काफी मात्रा में प्रदूषण करने वाले और संसाधनों का उपयोग करने वाले कपड़ा उत्पादन को अधिक सतत बनाने पर जोर दिया जाता है। उदाहरण के लिए, गुजरात स्थित जीएचसीएल धागे और तकनीक की मदद से ऐसे कपड़े तैयार कर रही है जो दूसरे काम के साथ साथ शरीर के तापमान को नियंत्रित करने में मदद करते हैं, विकिरण के नकारात्मक असर से बचाते हैं और लोगों को अच्छी नींद लेने में सहायक हैं। 
 
जीएचसीएल के कपड़ा विभाग के मुख्य कार्याधिकारी मनु कपूर कहते हैं, 'हम प्रत्येक धागे की बनावट और उसकी हलचल को समझने के लिए सैप तकनीक का उपयोग करते हैं। हम इजिप्ट में तैयार कपास के धागे में विशिष्ट फिंगरप्रिंट तकनीक का उपयोग करते हैं। साथ ही, पहचाने जाने योग्य फाइबर को धागे में बदल दिया जाता है जो डेटा संचरण में सहायक होता है और पुनर्चक्रण से पहले तक उत्पाद की जीवनयात्रा पर नजर बनाए रखता है।' जर्मनी की टेलरक्स गेम्ब कंपनी की साझेदारी में विकसित की गई यह तकनीक खेत से कपास को जुटाने से लेकर कपड़े बनाने तक के पूरे सफर की जानकारी रखती है। यह कपास के बीज में 'ऑप्टिकल फिंगरप्रिंट' के नाम से लोकप्रिय तकनीक का समावेश कर देती है जिसे विशिष्ट सेंसर की मदद से ही पहचाना जा सकता है। 
 
हालांकि जीएचसीएल इस नई तकनीक को परिधानों तक सीमित नहीं रख रही है। कंपनी ट्रैक करने योग्य बिस्तर की चादरों भी बना रही है जिसके लिए पीईटी बोतलों के पुनर्नवीनीकरण तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। कपूर बताते हैं कि जीएचसीएल ने न्यूयॉर्क स्थित अप्लाइड डीएनएस साइंस से साझेदारी की है जिससे रीकूप ब्रांड वाली चादरें बनाने के लिए डीएनएस साइंस के सर्टेन-टी प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया जा सके। 250 धागों वाली रीकूप शीट को बनाने के लिए 36 पीईटी बॉतलों का इस्तेमाल होता है। इस चादर में कुल 60 प्रतिशत कपास और 40 प्रतिशत पुनर्नवीनीकृत पीईटी होता है। इससे कूड़ा इकट्टïठा करने वाली जगह में कमी आती है, कच्चे तेल की खपत कम होती है और साथ ही पर्यावरण में कार्बन उत्सर्जन भी कम होता है। 
 
आईआईटी दिल्ली का टेक्सटाइल तकनीक विभाग नैनो तकनीक की मदद से उन्नत कपड़ों की शृंखला विकसित कर रहा है। इन कार्यों के लिए आईआईटी दिल्ली को विज्ञान एवं तकनीक विभाग, रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) और ब्रिटेन स्थित बॉल्टन यूनिवर्सिटी समेत कई जगहों से वित्तीय राशि मिल रही है और संस्थान रेशों तथा कपड़ों के क्षेत्र में नई क्षमताएं विकसित कर रहा है।  आग न लगने वाले परिधान बनाने के लिए ऐसा पॉलिमर बनाने पर काम किया जा रहा है जिसे कपड़े के रेशे के ऊपर लगाया जा सके। इसके अलावा पूरे कपड़ा उद्योग का मुख्य ध्यान ऐसी तकनीकों को अपनाने पर है जो यहां पैदा होने वाले भारी मात्रा के अपशिष्ट में कमी ला सके। उदाहरण के लिए फैशन कारोबार को काफी बड़ा अपशिष्ट बाजार कहा जा सकता है जहां प्रत्येक सप्ताह लाखों तरह के कपड़े आते हैं जिनमें से अधिकांश बाजार में नहीं चलते और बाहर हो जाते हैं। 
 
भारत के कपड़ा एवं परिधान बाजार का आकार साल 2015 में 108.5 अरब डॉलर था और 2023 तक इसके 226 अरब डॉलर पर पहुंचने का अनुमान है। इस बाजार में वर्ष 2009 से 2023 के बीच 8.7 प्रतिशत सालाना वृद्धि का अनुमान है। हालांकि यह बाजार इसी तेजी के साथ अपशिष्ट भी पैदा कर रहा है। वैश्विक स्तर पर देखें तो यह उद्योग पानी का सर्वाधिक उपयोग करने वाले कारोबार में से एक है।  हाल ही में वैश्विक परिधान निर्माता 'गैप' और भारत में इसकी फ्रैंचाइजी 'अरविंद लिमिटेड' ने एक नया नवोन्मेष केंद्र खोलने की घोषणा की है जो कपड़ा उद्योग में होने वाले पानी के खर्च में कमी लाएगी। अरविंद और गैप नए वाटर ट्रीटमेंट फैसिलिटी में भी निवेश कर रहे हैं जिससे कंपनी की अहमदाबाद स्थित डेनिम मिल में ताजे पानी के उपयोग को रोका जा सकेगा। इसका उद्देश्य वर्ष 2020 तक 3 अरब लीटर ताजे पानी की बचत करना है। 
 
फिलहाल भारत में डेनिम निर्माण का पहला मॉल, अहमदाबाद स्थित अरविंद डेनिम मॉल रोजाना 80 लाख लीटर ताजे पानी का उपभोग करता है। वाटर ट्रीटमेंट फैसिलिटी के जरिये ताजे पानी के स्थान पर साफ किए गए पानी का उपयोग होने लगेगा। यह प्रक्रिया इस साल सितंबर में शुरू हो जाएगी।  कपड़ा उद्योग के लिए दूसरा नवोन्मेष वेयरहाउस क्षेत्र में कमी लाना है। उदाहरण के लिए, नितिन कपूर ने अपने वेंचर 'इंडिया ब्यूटिफुल आर्ट' में 'जस्ट इन टाइम' तकनीक के उपयोग से इसे सफल बना रहे हैं। इसके अलावा, भरे पड़े वेयरहाउसों की समस्या के समाधान के लिए गूगल द्वारा वित्त पोषित फाइंड की तरह कई स्टार्टअप नवीन तकनीक समर्थित उपायों पर काम कर रहे हैं। 
 
कपूर कहते हैं, 'हमारा विचार है कि जब ग्राहक कपड़े का ऑर्डर दे उसके बाद उत्पादन शुरू किया जाए। ऑर्डर मिलते ही कंपनी कपड़े की कटाई, सिलाई और रंगाई शुरू कर दे।' इसका अर्थ होगा कपड़ों को वेयरहाउस में स्टोर करने के बजाय कंपनी कच्चे माल की उपलब्धता के हिसाब से उत्पाद उपलब्ध कराएं और मांग चक्र को नियंत्रित करे।  आदित्य बिड़ला फैशन ऐंड रिटेल ने हाल ही में घोषणा की है कि तकनीक क्षेत्र की प्रमुख कंपनी आईबीएम उनके आईटी कार्यों को बेहतर बनाने के लिए निजी क्लाउड सेवा उपलब्ध कराएगी। पीटर इंगलैंड, लुई फिलिप, वान हेसेन, एलन सोली जैसे बहुत से ब्रांड वाली इस कंपनी के देशभर में 2,000 से अधिक एक्सक्लूसिव आउटलेट हैं। कपड़ा उद्योग मेंं सबसे बड़ा बदलाव स्मार्ट कपड़ों के क्षेत्र में हुआ। हालांकि अधिकांश कंपनियों के लिए यह अभी भी अवधारणा के स्तर पर ही है। भविष्यवक्ताओं का कहना है कि वह दिन दूर नहीं जब हैरी पॉटर फिल्म जैसे अदृश्य कर देने वाले परिधान उपलब्ध होंगे। 
Keyword: textiles, cotton, cloths, branded,,
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