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मौजूदा परिवेश में गिरावट से सुरक्षा है बेहद जरूरी

पुनीत वाधवा /  August 11, 2019

जुलाई में बजट पेश किए जाने के बाद से ही बाजार गिरावट के दायरे में हैं। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (एफपीआई) बिकवाली कर रहे हैं। आदित्य बिड़ला सन लाइफ एएमसी में मुख्य निवेश अधिकारी (इक्विटी) महेश पाटिल ने पुनीत वाधवा को साक्षात्कार में बताया कि निवेशक इसे लेकर स्पष्टïता चाहते हैं कि क्या बाजार गिरावट से उबर चुका है या अभी और गिरावट का जोखिम बना हुआ है। पेश हैं उनसे हुई बातचीत के मुख्य अंश:

 
क्या आप मानते हैं कि बजट के बाद से बाजार में बिकवाली बढ़ी है?
 
बाजार धारणा बजट के बाद से प्रभावित हुई है। खपत में धीमी वृद्घि को लेकर चिंताएं बरकरार हैं। यह मंदी अल्पावधि में बरकरार रहने की आशंका है, क्योंकि सरकार ने खपत बढ़ाने के लिए अब तक प्रत्यक्ष रूप से किसी अल्पावधि उपाय की घोषणा नहीं की है। इससे बाजार धारणा प्रभावित हुई है। बाजार कुछ समय से कमजोर बना हुआ है, क्योंकि हमें अर्थव्यवस्था में सुधार के संकेत नहीं दिख रहे हैं। इसके अलावा गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) से संबंधित कुछ समस्याएं मौजूद हैं।
 
चालू वर्ष 2019 में आपने अब तक अपने पोर्टफोलियो में क्या बदलाव किया है?
 
मौजूदा परिवेश में, गिरावट से सुरक्षा एक प्राथमिकता बन गई है और हम उसी के अनुसार अपने पोर्टफोलियो को ढाल रहे हैं। पिछले साल के दौरान, हम लार्ज-कैप क्षेत्र में कई बड़ी कंपनियों पर नकारात्मक बने रहे और इनमें गिरावट दर्ज की गई। हम मिड-कैप के लिए निवेश बरकरार रख रहे हैं और इनके अच्छा प्रदर्शन करने की उम्मीद कर रहे हैं। मौजूदा समय में, हम फार्मास्युटिकल और हेल्थकेयर, छोटे आकार के कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, उद्योग और सीमेंट पर सकारात्मक हैं। वहीं आईटी, तेल एवं गैस और ऑटो तथा ऑटो एंसिलियरी कंपनियों पर नकारात्मक हैं।
 
क्या वित्तीय क्षेत्र में नकदी की स्थिति में सुधार आया है?
 
व्यवस्था में नकदी कुछ महीने पहले के स्तर से बढ़कर अब 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक के अधिशेष की स्थिति में आ गई है, क्योंकि आरबीआई ने लोकसभा चुनाव के बाद व्यवस्था में नकदी बनाए रखने की अनुमति दी है। सरकार ने एनबीएफसी के लिए नकदी सहायता और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसबी) के पुनर्पूंजीकरण के लिए 70,000 करोड़ रुपये की नकदी जैसे उपायों की घोषणा की है। कॉरपोरेट बैंक ऋण देने और विकास पर ध्यान केंद्रित करने के लिए बेहतर स्थिति में होंगे। हालांकि एनबीएफसी को लेकर जोखिम सहन करने की क्षमता ऊंची बनी हुई है जिससे फंसे कर्ज को बढ़ावा मिल रहा है। 
 
जून 2019 की तिमाही के परिणाम बाजार को आकर्षित करने में विफल रहे। इस बारे में आपकी क्या प्रतिक्रिया है?
 
अर्थव्यवस्था में मंदी को देखते हुए जून तिमाही में आय वृद्घि धीमी रहने की आशंका थी। वित्त वर्ष 2020 की पहली तिमाही के परिणाम घोषित कर चुकी कंपनियों के आधार पर मुनाफा वृद्घि अब तक ऊंचे एक अंक में रही है, जो कमजोर अनुमानों के अनुरूप है। उम्मीद के मुताबिक वाहन क्षेत्र का परिणाम धीमा रहा है। लेकिन कंज्यूमर स्टैपल और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, बैंकिंग और फाइनैंस, फार्मा और मीडिया जैसे क्षेत्रों ने अच्छे नतीजे दिए हैं।
 
वित्त वर्ष 2020 से आपको क्या उम्मीदें हैं?
 
वित्त वर्ष 2020 की दूसरी तिमाही की वृद्घि भी धीमी रह सकती है। हम सिर्फ तीसरी और चौथी तिमाही में आय में सुधार देख सकते हैं। कुल मिलाकर, वित्त वर्ष 2020 के लिए निफ्टी की आय वृद्घि (बैंकों को छोड़कर) निचले स्तर पर दो अंक में रहने की संभावना है। वहीं बैंकों समेत निफ्टी के लिए वित्त वर्ष 2020 की कुल आय वृद्घि 20 प्रतिशत से अधिक रह सकती है।
 
क्या आप अपनी किसी योजना में बिकवाली का दबाव महसूस कर रहे हैं?
 
पिछले महीने के दौरान बाजार में गिरावट को देखते हुए निवेशक इसे लेकर स्थिति स्पष्टï किए जाने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या बाजार गिरावट से उबर गए हैं या अभी बड़ी गिरावट का जोखिम बना हुआ है। हमने अब तक कोई बड़ा बिकवाली दबाव महसूस नहीं किया है। 
 
पिछले कुछ महीनों में एसआईपी प्रवाह कैसा रहा है?
 
इक्विटी में घरेलू एसआईपी प्रवाह पिछले 6 महीनों से लगभग 8,000 करोड़ रुपये मासिक पर स्थिर रहा है, जो सकारात्मक संकेत है। हम मध्यावधि से लेकर दीर्घावधि नजरिये से भारतीय इक्विटी बाजार पर सकारात्मक बने हुए हैं। अगले 6-12 महीने निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो मजबूत बनाने के लिहाज से अच्छे साबित होंगे। हमें उम्मीद है कि चालू वर्ष 2019 के शेष समय में एसआईपी प्रवाह मजबूत बना रहेगा। 
 
वित्त वर्ष 2020 में आप आरबीआई से कितनी बार दर कटौती की उम्मीद कर रहे हैं?
 
हम मौजूदा समय में आसान मौद्रिक नीति के परिवेश में हैं जो पूंजी की लागत घटाने के सरकार के उद्देश्य के अनुरूप है। आरबीआई इस साल 75 आधार अंक तक की कटौती पहले ही कर चुका है और चालू वित्त वर्ष में दो-तीन अन्य दर कटौती की उम्मीद की जा रही है। इसलिए, हमें कुछ अल्पावधि समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है और दरों में कमी से मध्यावधि में आर्थिक सुधार में मदद मिल सकती है। 
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