बिजनेस स्टैंडर्ड - 15वां वित्त आयोग राज्योंं के हिस्से में कर सकता है कमी
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15वां वित्त आयोग राज्योंं के हिस्से में कर सकता है कमी

अरुप रॉयचौधरी / नई दिल्ली August 11, 2019

सरकार को 15वें वित्त आयोग से कुछ राहत मिल सकती है। बिजनेस स्टैंडर्ड को मिली जानकारी के अनुसार 15वां वित्त आयोग कर संग्रह में राज्यों की हिस्सेदारी मौजूदा 42 प्रतिशत से थोड़ा कम कर सकता है। एक अन्य उपाय के तहत रक्षा और आंतरिक सुरक्षा के मद में होने वाला आवंटन कुल राजस्व संग्रह से अलग रखा जा सकता है। लिहाजा कर राजस्व के बंटवारे का गणित रक्षा एवं आंतरिक सुरक्षा के मद में पूंजीगत व्यय अलग करने के बाद लागू हो सकता है। इन दोनों प्रस्तावित उपायों से कुल कर राजस्व में राज्यों की हिस्सेदारी कम हो जाएगी। माना जा रहा है कि अगर आयोग ये सभी प्रस्ताव स्वीकार कर लेता है तो राज्य इसका विरोध कर सकते हैं। दूसरी तरफ वित्तीय मोर्चे पर तंगी झेल रहे केंद्र को इससे जरूर राहत मिलेगी। इसे पहले 14वें वित्त आयोग ने कर राजस्व में राज्यों का हिस्सा 32 प्रतिशत से बढ़ाकर 42 प्रतिशत कर दिया था। 14वें वित्त आयोग की पांच वर्ष की अवधि 31 मार्च 2020 को पूरी हो रही है और इसके बाद राज्यों को 2025 तक 15वें वित्त आयोग की सिफारिशों के आधार पर रकम मिलेगी। 
 
इस पूरे मामले की जानकारी रखने वाले एक सूत्र ने कहा, 'एक बात तो तय है कि आयोग राज्यों की हिस्सेदारी 42 प्रतिशत से नहीं बढ़ाएगा। हां, इसमें कमी जरूर की जा सकती है।' एक दूसरे सूत्र ने कहा कि अर्थशास्त्रियों और लोक वित्त के जानकारों की भी यही राय है कि राज्यों की हिस्सेदारी 42 प्रतिशत रहनी चाहिए या इसमें कमी की जानी चाहिए। 15वां वित्त आयोग इस साल नवंबर तक सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंप सकता है। आयोग को इस बात की पड़ताल के लिए एक महीने का अतिरिक्त समय दिया गया था कि रक्षा एवं आंतरिक सुरक्षा के लिए अलग से रकम का प्रावधान किया जा सकता है या नहीं। कर राजस्व के बंटवारे से पहले रक्षा एवं आंतरिक सुरक्षा के लिए पूंजीगत व्यय अलग रखने का प्रस्ताव दिया गया है। 
 
हालांकि समिति की रिपोर्ट फिलहाल किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंची है, लेकिन वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के बाद केंद्र की माली हालत खराब हुई है राज्यों का आवंटन 42 प्रतिशत से अधिक बढऩे की सूरत में हालत और बिगड़ जाएगी। मौजूदा सूरत बरकरार रखने या राज्यों की हिस्सेदारी कम करने के पीछे एक तर्क यह है कि राजस्व बंटवारे के अलावा सभी तरह के आवंटनों पर विचार करने पर राज्यों को मिलने वाली रकम 50 प्रतिशत से अधिक हो जाती है। पिछले महीने बिजनेस स्टैंडर्ड को दिए साक्षात्मकार में 15वें वित्त आयोग के चेयरमैन एन के सिंह ने कहा था, 'अगर आप सभी तरह के आवंटनों पर विचार करें तो राज्यों को मिलने वाली हिस्सेदारी 50 प्रतिशत से अधिक हो जाती है। इनमें राजस्व घाटा अनुदान, राष्ट्रीय एवं राज्य आपदा के मद में रकम, सभी तरह के राज्यवार अनुदान और शहरी स्थानीय निकायों एवं पंचायतों को मिलने वाली रकम शामिल हैं।' 
 
उन्होंने कहा था कि केंद्र प्रायोजित योजनाओं के लिए केंद्र 3.5 लाख करेाड़ रुपये भी देता है। सिंह ने कहा कि राज्यों की हिस्सेदारी 42 प्रतिशत से अधिक करने का तर्क इन सभी पक्षों पर गौर नहीं करता है। 15वें वित्त आयोग की बैठकों में वित्त मंत्रालय ने अपना पक्ष रखा है। अधिकारियों का मानना है कि अगर केवल जीएसटी पर विचार करें तो राज्यों को राज्य जीएसटी मिलता है, साथ ही आईजीएसटी का 50 प्रतिशत हिस्सा मिलता है। अधिकारियों के अनुसार जीएसटी 14 प्रतिशत से नीचे रहने पर मुआवजा भी मिलता है और केंद्रीय जीएसटी में 42 प्रतिशत हिस्सा भी मिलता है। 
Keyword: finance committee, narendra modi, economy,,
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