बिजनेस स्टैंडर्ड - महज 2 प्रतिशत बढ़ा औद्योगिक उत्पादन
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महज 2 प्रतिशत बढ़ा औद्योगिक उत्पादन

शुभायन चक्रवर्ती / नई दिल्ली August 09, 2019

औद्योगिक उत्पादन की वृद्धि दर घटकर इस साल जून महीने में 2 प्रतिशत रह गई है। पूंजीगत वस्तुओं के उत्पादन में सुस्ती आने और समग्र विनिर्माण वृद्घि दर फिसलने से ऐसा हुआ है।  मई में यह 4.5 फीसदी के साथ सात महीने के उच्च स्तर पर थी। शुक्रवार को जारी किए गए आंकड़ों से पता चलता है कि जून की वृद्घि दर 3 महीने के निचले स्तर पर थी। यह अर्थशास्त्रियों की उम्मीद के मुताबिक ही है। औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) पर इससे पहले मार्च में गिरावट दर्ज की गई थी। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि कमजोर निर्यात, ग्रामीण संकट, कर्ज की कमी और चुनाव परिणाम की अनिश्चितता से यह स्थिति फिलहाल जारी रहने की उम्मीद है।
 
विनिर्माण उत्पादन में पिछले दो महीने से तेजी दर्ज की जा रही थी जो मई में सुस्त पड़ गई और उस महीने महज 1.2 फीसदी की वृद्घि ही दर्ज हुई। आईआईपी में विनिर्माण खंड का भारांश 77.6 फीसदी है, इसने मई में 4.5 फीसदी की वृद्घि दर्ज की थी। नीति निर्माताओं को अभी भी इस क्षेत्र में गहरी नकारात्मक वृद्घि उभरने का डर है। 
 
विनिर्माण क्षेत्र पर हैं संकट के बादल 
 
विनिर्माण में 23 उपक्षेत्रों में से 15 में सालाना आधार पर गिरावट दर्ज की गई। आईआईपी के आंकड़े ऑटोमोबाइल क्षेत्र में मंदी बढऩे के संकेत दे रहे हैं। जून में इस क्षेत्र में 13 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई जबकि मई में इसमें 6 फीसदी की कमी आई थी। वस्त, लकड़ी उत्पाद और आधारभूत धातु में जून में सकारात्मक वृद्घि दर्ज की गई जबकि पेपर, फर्नीचर और गढ़े हुए धातु उत्पादों में सबसे अधिक गिरावट दर्ज की गई। इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं के उत्पादन में अच्छी वृद्घि बनी हुई है। इसमें जून में 10 फीसदी की अच्छी उछाल दर्ज की गई। इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं के उत्पादन में यह नतीजा सरकार द्वारा पिछले एक वर्ष में इस क्षेत्र में लगातार विनिर्माण को बढ़ावा देने से हासिल हुआ है। इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों के आयात में कमी लाने के लिए सरकार ने इस क्षेत्र में कई लाभ देने की घोषणा की और चरणबद्घ विनिर्माण कार्यक्रम तैयार किए गए।  
 
महत्त्वपूर्ण पूंजीगत वस्तु खंड जो निवेश का संकेतक है, में गिरावट बढ़कर 6.5 फीसदी हो गई जबकि उससे पहले महीने इसमें 1.6 फीसदी की कमी आई थी। इस खंड में केवल 1.2 फीसदी की वृद्घि मौजूदा वित्त वर्ष के पहले महीने में दर्ज की गई थी जो दो महीने की गिरावट के बाद आई थी। मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में निजी निवेश को बढ़ावा देने सरकार के एजेंडे में ऊपर बना हुआ है जिसको लेकर लिए आंकड़े बताते हैं कि निजी क्षेत्र में निवेश में कमी आ रही है। मशीनरी और भारी परिवहन उत्पादों के दम पर पूंजीगत वस्तुओं के उत्पादन में अक्टूबर तक मजबूत वृद्घि दर्ज की जा रही थी। लेकिन उसके बाद से दो महीने की वृद्घि को अपवाद समझे तो हर महीने गिरावट दर्ज की जा रही है। 
 
उपभोक्ता वस्तु उत्पादन मुश्किल में उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुओं के उत्पादन में भी गिरावट दर्ज की गई है। यह मई में 0.22 फीसदी की वृद्घि दर्ज करने के बाद 5.5 फीसदी लुढ़क गया। उससे पहले भी उपभोक्ता वस्तुओं के उत्पादन में गिरावट दर्ज की जा रही थी जिसकी वजह 2018-19 की तीसरी तिमाही में बनी इन्वेंटरी थी। तब क्षमता उपयोग में भी सुधार हुआ था। लेकिन मांग में गिरावट आने से उत्पादन भी घट गई।  इंडिया रेटिंग्स ऐंड रिसर्च के मुख्य अर्थशास्त्री देवेंद्र कुमार पंत ने कहा,  'ऑटो क्षेत्र में मंदी बने रहने और कृषि क्षेत्र में दबाव होने के कारण औद्योगिक सुस्ती बहुत जल्दी दूर होने की संभावना नहीं है। औद्योगिक और आर्थिक बहाली की सारी उम्मीदें कृषि क्षेत्र के प्रदर्शन पर टिकी हैं और जुलाई 2019 के बाद हुई बारिश से कुछ उम्मीद जगी है।' 
 
अप्रैल में प्राथमिक वस्तुओं और उपभोक्ता गैर टिकाऊ वस्तुओं को छोड़कर सभी क्षेत्रों में वृद्धि कम और एकल अंकों में रही। वहीं दूसरी ओर अन्य सभी उपभोग आधारित क्षेत्र सुस्त रहे, उनमें नकारात्मक वृद्धि रही या कम एकल अंक की वृद्धि दर्ज की गई।  आईआईपी में दो अन्य क्षेत्रों- बिजली व खनन में जून में सुधार हुआ। बिजली उत्पादन में सुधार अर्थव्यवस्था का सकारात्मक पक्ष रहा, जिसमें जून में 8.2 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि मई में 7.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई थी। 
Keyword: IIP, WPI, economy, industry,,
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