बिजनेस स्टैंडर्ड - मकान खरीदार का वित्तीय लेनदार का दर्जा बरकरार
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Saturday, August 24, 2019 11:47 PM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम बाजार खबर

मकान खरीदार का वित्तीय लेनदार का दर्जा बरकरार

आशीष आर्यन / नई दिल्ली August 09, 2019

उच्चतम न्यायालय ने रियल एस्टेट डेवलपरों और बिल्डरों को झटका देते हुए ऋणशोधन अक्षमता और दिवालिया संहिता (आईबीसी) में किए गए संशोधनों को आज सही करार दिया। इनके तहत मकान खरीदारों को वित्तीय लेनदार की श्रेणी में रखा गया था। न्यायमूर्ति रोहिंटन फली नरीमन की अगुआई वाले तीन न्यायाधीशों के पीठ ने कहा कि रियल एस्टेट नियमन एवं विकास अधिनियम (रेरा) और आईबीसी के बीच सामंजस्य और सह-अस्तित्व होना चाहिए। लेकिन टकराव की स्थिति में रेरा को तरजीह मिलनी चाहिए।
 
न्यायालय ने कहा, 'फ्लैट या अपार्टमेंट के आवंटियों के लिए जो उपाय किए गए हैं वे समवर्ती हैं। इस तरह वे उपभोक्ता संरक्षण कानून, रेरा और आईबीसी के तहत किए गए उपायों का सहारा ले सकते हैं।' सरकार ने पिछले साल मई में आईबीसी में संशोधन करके मकान खरीदारों को वित्तीय लेनदार का दर्जा दिया था। वे ऋणदाताओं की समिति की बैठकों में हिस्सा ले सकते हैं और समाधान योजना के चयन में उनके पास मतदान का अधिकार है। राष्ट्रीय कंपनी कानून अपील पंचाट (एनसीएलएटी) ने 2017 में अपने एक फैसले में इसकी पुष्टि की थी। पंचाट ने व्यवस्था दी थी कि डेवलपरों द्वारा सुनिश्चित रिटर्न योजनाओं के तहत जुटाई गई रकम में उधारी का वाणिज्यिक प्रभाव था और इसलिए मकान खरीदार वित्तीय लेनदार होंगे। 
 
रियल एस्टेट डेवलपरों और बिल्डरों ने सरकार के फैसले और एनसीएलएटी की व्यवस्था को चुनौती दी थी। उनका तर्क था कि इससे ऐसी स्थिति पैदा हो सकती है जहां परियोजना पूरी कर चुकी और कानून का पालन करने वाली कंपनियों को परेशानी हो सकती है क्योंकि कोई भी मकान खरीदार दिवालिया के लिए आवेदन दायर कर सकता है। इसका मतलब है कि एक आवंटी के कारण किसी कंपनी के प्रबंधन को हटाया जा सकता है या बदला जा सकता है। ऐसी स्थिति में डेवलपर द्वारा किया गया भारी निवेश बेकार चला जाएगा। 
 
रियल एस्टेट कंपनियों की दलील थी कि अगर समाधान योजना नहीं आई या ऋणदाताओं की समिति या आईबीसी के तहत अधिकारियों ने सभी समाधान योजनाओं को खारिज कर दिया तो एक अच्छी भली कंपनी बंद हो जाएगी जो किसी के भी हित में नहीं होगा। न्यायालय ने उनकी दलील को खारिज कर दिया। न्यायालय ने कहा कि अगर मामला राष्ट्रीय कंपनी कानून पंचाट (एनसीएलटी) में चला गया तो यह साबित करना रियल एस्टेट डेवलपरों और बिल्डरों की जिम्मेदारी है कि फ्लैट और अपार्टमेंट के कुछ आवंटी आईबीसी का इस्तेमाल उन्हें ब्लैकमेल करने के लिए कर रहे हैं। सर्वोच्च न्यायालय ने कहा, 'रियल एस्टेट डेवलपर यह दलील दे सकते हैं कि आईबीसी के तहत दिवालिया समाधान प्रक्रिया को धोखाधड़ी, गलत मंशा या दिवालिया समाधान के इतर किसी और मकसद से लागू किया गया है। उदाहरण के लिए अगर किसी आवंटी ने एनसीएलटी का दरवाजा खटखटाया है और वह सट्टा लगाने वाला निवेशक है और उसकी फ्लैट या अपार्टमेंट खरीदने में कोई दिचलस्पी नहीं है, तो रियल एस्टेट डेवलपर यह दलील दे सकते हैं।' न्यायालय ने सरकार को एनसीएलटी और एनसीएलएटी में सभी रिक्त पदों को भरने का आदेश दिया। सरकार को तीन महीने के भीतर इस बारे में जानकारी देनी होगी।                               
Keyword: real estate, property, court, builder,,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:

स्मार्ट इंवेस्टर

मंदी से कमजोर हुआ अप्रैल-जून तिमाही का प्रदर्शन

Investmentsभारतीय उद्योग जगत पर आर्थिक मंदी का प्रभाव गहराता जा रहा है। भारत की प्रमुख

मौजूदा परिवेश में गिरावट से सुरक्षा है बेहद जरूरी

पिडिलाइट पर बढ़ रहा निवेशकों का भरोसा

धीमे परिदृश्य से एमऐंडएम के शेयर पर पड़ रहा दबाव

वित्त वर्ष 2020 में निजी बैंकों की बढ़ेगी चुनौती!

आगे पढ़े
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.