बिजनेस स्टैंडर्ड - रत्न-आभूषण निर्यात 11.24 फीसदी गिरा
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रत्न-आभूषण निर्यात 11.24 फीसदी गिरा

राजेश भयानी / मुंबई August 08, 2019

वर्ष 2019 के जुलाई महीने में कुल रत्न और आभूषण निर्यात 11.24 प्रतिशत गिरकर 270.790 करोड़ डॉलर रह गया, जबकि जुलाई 2018 के दौरान यह निर्यात 305.068 करोड़ था। उद्योग के दिग्गजों ने अमेरिका-चीन व्यापार युद्ध, उपभोक्ताओं की कमजोर धारणा के साथ-साथ कई अन्य घरेलू मसलों को इसका जिम्मेदार ठहराया है। रत्न एवं आभूषण निर्यात संवर्धन परिषद के आंकड़ों से पता चलता है कि मौजूदा वित्त वर्ष के दौरान रत्न और आभूषण क्षेत्र का सकल निर्यात अप्रैल-जुलाई 2019 के दौरान 9.32 प्रतिशत तक घटकर 12.15 अरब डॉलर रह गया, जबकि पिछले साल इस अवधि में यह 13.39 अरब डॉलर था।
 
आम बजट पेश किए जाने के बाद जुलाई में आई गिरावट साल के आखिरी चार महीनों में सबसे खराब रही है। अन्य सभी वस्तुओं में सबसे तेज गिरावट तराशे हुए हीरे में आई है। जुलाई 2019 में इनका निर्यात 18.29 प्रतिशत लुढ़ककर 1.50 अरब डॉलर रह गया, जबकि जुलाई 2018 में यह निर्यात 1.84 अरब डॉलर था। ऐसा इसलिए है क्योंकि घरेलू उद्योग के पास तराशे हुए हीरों का बड़ा स्टॉक है और वैश्विक स्तर पर प्रमुख उपभोक्ता केंद्रों का स्टॉक भी ज्यादा है। डी बीयर्स के मुख्य वित्त अधिकारी निमेश पटेल ने बिजनेस स्टैंडर्ड के साथ हुई एक हालिया बातचीत में कहा था कि खुदरा शृंखलाओं के पास तराशे हुए हीरों का स्टॉक है। हीरा खनन करने वाली कंपनियां कच्चे हीरे के दामों में कटौती कर रही हैं क्योंकि बड़े स्टॉक के कारण तराशे हुए हीरे के दाम कम चल रहे हैं। अप्रैल से जुलाई 2019 के बीच तराशे हुए हीरों का निर्यात 17.54 प्रतिशत कम होकर 6.70 अरब डॉलर रह गया जो अप्रैल से जुलाई 2018 के दौरान 8.13 अरब डॉलर दर्ज किया गया था। तराशे हुए हीरों के बड़े स्टॉक और पिछले कुछ महीनों से कम चल रहे दामों की वजह से वैश्विक कारोबार प्रभावित हो रहा है। बाजार को प्रभावित करने वाले इन कारणों के अलावा भारतीय निर्यातकों को हीरे पर अधिक सीमा शुल्क के दबाव का भी सामना करना पड़ रहा है। यहां तक कि जुलाई 2019 में स्वर्णाभूषण निर्यात भी 5.78 प्रतिशत तक गिरकर 96.308 करोड़ डॉलर रह गया था, जबकि जुलाई 2018 में यह 102.218 करोड़ डॉलर था।
 
निर्यातक पहले ही जीएसटी के लिए दावा किए जाने वाले रिफंड में देरी का सामना कर रहे थे। इससे उनकी कार्यशील पूंजी ऐसे समय में अवरुद्ध हो रही थी, जब बैंक इस निर्यात उद्योग को कार्यशील पूंजी प्रदान करने के मामले में बहुत सख्त थे। भारत के कुल निर्यात में कुल रत्नाभूषण निर्यात का हिस्सा लगभग 13 प्रतिशत के साथ 40 अरब डॉलर रहा है। इस क्षेत्र को कार्यशील पूंजी नहीं मिल रही है या पिछले डेढ़ साल के दौरान विनियामक परिवर्तनों के बावजूद कठोर मानदंड रखे गए हैं जिससे इस क्षेत्र से निर्यात को नुकसान पहुंचने लगा है। जीजेईपीसी के वाइस चेयरमैन कोलिन शाह ने कहा कि अगर कोई राहत नहीं मिलती है तो अगली तिमाही बदतर होगी। एक ओर अमेरिका-चीन व्यापार युद्ध ने हालात बदतर कर दिए हैं, वहीं दूसरी ओर बजट में स्वर्ण आयात पर शुल्क 2.5 प्रतिशत बढ़ाकर 12.5 किए जाने से भी निर्यात में कमी आनी शुरू हो गई है। घरेलू शुल्क क्षेत्र से सालाना निर्यात करीब तीन अरब डॉलर रहता है। जीजेईपीसी के आंकड़ों के अनुसार अप्रैल-जुलाई 2019 के दौरान स्वर्णाभूषण निर्यात 4.80 फीसदी गिरकर 4.09 अरब डॉलर रहा जो पिछले साल 4.29 अरब डॉलर था। 
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