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घटी रीपो दरें पर धारणा में जल्द सुधार के नहीं आसार

हंसिनी कार्तिक / मुंबई August 07, 2019

रीपो दरों में 35 आधार अंकों की कटौती से भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर ने चौंका दिया क्योंकि उम्मीद की जा रही थी कि इसमें 25 आधार अंकों की कटौती होगी। लेकिन इक्विटी बाजार के लिए यह किसी अन्य कारोबारी सत्र की तरह गुजर गया। वास्तव में सेंसेक्स और निफ्टी बुधवार को 0.8 फीसदी की गिरावट के साथ बंद हुए। दरों में कटौती हालांकि सही दिशा में उठाया गया कदम है, लेकिन कई वजहों से बाजार के लिए मौद्रिक नीति पर खुश होने की कम वजह थी, जिसमें आर्थिक अवरोध के लिहाज से ज्यादा सतर्कता भरे परिदृश्य के साथ जीडीपी में बढ़त की रफ्तार को घटाना शामिल है। दूसरे शब्दों में सवाल यह है कि क्या एक दशक के निचले स्तर पर पहुंची रीपो दर आर्थिक बढ़त की रफ्तार व आय को बहाल कर सकती है।
 
बढ़त की बहाली के दो महत्वपूर्ण कारक हैं - पूंजीगत खर्च (निजी व सार्वजनिक) और देसी उपभोग। ये दोनों इंजन अभी कमजोर हैं और ये चीजें भारतीय कंपनी जगत की तरफ से अब तक पेश जून तिमाही के नतीजों में स्पष्ट हुई हैं। नारनोलिया फाइनैंशियल एडवाइजर्स की शोध प्रमुख विनीता शर्मा ने कहा, आय कमजोर रही और बैंक समेत हर क्षेत्र की कंपनियों के प्रबंधन की टिप्पणी कमजोर रही। इस लिहाज से जब तक उपभोक्ता व औद्योगिक मांग (सरकारी पहल से) बहाल नहीं होती, तब तक आय में सुधार की उम्मीद कम है। क्या दरों में कटौती पूंजीगत खर्च के लिए कंपनी जगत की तरफ से पूंजी की मांग में मजबूती ला सकता है, यह देखना अभी बाकी है।
 
तस्वीर हालांकि धुंधली है क्योंकि पारंपरिक क्षेत्रों मसलन धातु, बड़ी बुनियादी परियोजनाएं और बिजली संयंत्र में पूंजीगत खर्च की बहाली के कोई संकेत नहीं हैं, लेकिन सीमेंट, कंज्यूमर स्टेपल और स्पेशियलिटी केमिकल्स में थोड़े सुधार के संकेत दिखे हैं। आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज के शोध प्रमुख पंकज पांडे ने कहा, सरकारी पूंजीगत खर्च जल्द सुधर सकता है और कुछ क्षेत्रों में निजी क्षेत्र का पूंजीगत खर्च अगले 6 से 9 महीने में बहाल हो सकता है। पांडे ने का, बढ़त को बहाल करने के लिए क्या यह पर्याप्त है? इसके अच्छे खासे संकेत हैं, लेकिन अगर इसमें देर हुई तो आय में बढ़त का मामला भी अगले वित्त वर्ष की ओर जा सकता है। इस बीच, अगर मौजूदा कैलेंडर वर्ष में रीपो दरों में हुई 110 आधार अंकों की हुई कटौती का कंपनी जगत की तरफ से पूंजी की मांग पर असर देखें तो उपभोक्ता मांग के साथ इसका जुड़ाव कमजोर है। आईडीएफसी सिक्योरिटीज के रणनीतिक शोध प्रमुख धनंजय सिन्हा ने कहा कि अभी उपभोक्ता मांग में इजाफे की पर्याप्त वजह नहीं है। उन्होंने कहा, हमें खर्च में बढ़ोतरी करनी होगी और सिर्फ दरों मे कटौती से यह बहाल नहीं होगा।
Keyword: RBI, SBI, repo rate, loan, interest,,
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