बिजनेस स्टैंडर्ड - संपत्तियां जब्त करने की मांगी अनुमति
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संपत्तियां जब्त करने की मांगी अनुमति

सुब्रत पांडा / मुंबई August 06, 2019

कंपनी मामलों के मंत्रालय ने आज राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) से डेलॉयट हैस्किंस ऐंड सेल्स और केपीएमजी नेटवर्क के ऑडिटर बीएसआर एसोसिएट्स के  बैंक लॉकर सहित उनकी संपत्तियां जब्त करने की अनुमति मांगी है। ये दोनों कंपनियां आईएलऐंडएफएस फाइनैंशियल सर्विसेज (आईएफआईएन) की पूर्व ऑडिटर और पार्टनर थीं, जिनके नाम गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय (एसएफआईओ) की शिकायत में आए हैं। कंपनी मामलों के मंत्रालय का तर्क सुनने के बाद इस मामले को 28 अगस्त तक के लिए टाल दिया है क्योंकि एमसीए को ऑडिटरों को दंडित करने की अनुमति देने के एनसीएलटी मुंबई क अधिकार पर राष्ट्रीय कंपनी कानून अपीली न्यायाधिकरण (एनसीएएटी) ने स्थगनादेश दे दिया है और अपीली न्यायाधिकरण में अगली सुनवाई 19 अगस्त को है। 
 
एनसीएलटी की मुंबई शाखा ने भी ऑडिटरों को दंडित करने की अनुमति देने के अपने आदेश पर रोक लगा दी है क्योंकि पीडि़त पक्ष ने आदेश के खिलाफ एनसीएलएटी में अपील करने के लिए वक्त मांगा था। न्यायाधिकरण ने मंगलवार को स्पष्ट रूप से कहा कि वह इस मामले में एनसीएलएटी के फैसला लेने तक कोई आदेश नहीं पारित करेगा। एमसीए को ऑडिटरों को दंडित किए जाने के बारे में एनसीएलएटी को फैसला करना है। ऑडिटरों के वकील ने कंपनी मामलों के मंत्रालय के आवेदन पर आपत्ति जताते हुए कहा कि एनसीएलएटी ने एनसीएलटी के आदेश पर स्थगनादेश दे दिया है, जिसमें एमसीए को दंडित करने की अनुमति दी गई थी, इसलिए यहां कोई मामला नहीं बनता। 
 
बहरहाल न्यायाधिकरण ने पाया कि एनसीएलएटी ने जहां अंतरिम स्थगनादेश दे दिया है, वहीं यह भी कहा है कि वह एनसीएलटी और भारत सरकार के कानून के मुताबिक आगे कदम बढ़ाने की राह में आड़े नहीं आ रहा है। एनसीएलटी मुंबई ने 3 दिसंबर के अपने फैसले में आईएलऐंडएफएस के पूर्व निदेशकों को थर्ड पार्टी अधिकार बनाने, गिरवीं रखने, पूरी तरह या आंशिक रूप से मालिकाना वाली चल व अचल संपत्तियों को हस्तांतरित करने पर रोक लगा दी थी। एमसीए ने एनसीएलटी से अनुरोध किया था कि वह इस आदेश का दायरा ऑडिट फर्मों और उनके साझेदारों तक बढ़ाए, जिनके नाम एसएफआईओ व अन्य व्यक्तियों की शिकायत में आए हैं। एमसीए ने कहा कि धन को दूसरी जगह लगाने से रोकने के लिए ऐसा करना जरूरी है। 
 
बहरहाल एमसीए ने कहा कि ऑडिट फर्मों को राहत दी जा सकती है, जिससे कि वे अपना परिचालन लागत जैसे वेतन, बिजली के खर्च, परिवहन लागत व किराये पर आने वाले खर्च निकाल सकें। ऑडिट फर्मों के साझेदारों के मामले में, जिनके नाम एसएफआईओ की शिकायत में आए थे, 1 लाख रुपये प्रति माह निकालने की अनुमति दी जानी चाहिए। उधर एमसीए ने एनसीएलटी में एक शपथपत्र दाखिल कर इन्फ्रास्ट्रक्चर लीजिंग ऐंड फाइनैंशियल सर्विसेज (आईएलऐंडएफएस), आईफिन और आईएलऐंडएफएस ट्रांसपोर्टेशन नेटवर्क (आईटीएनएल) के लिए ऑडिटर की नियुक्ति के लिए न्यायाधिकरण की अनुमति मांगी। एमसीए ने कहा कि उदय कोटक की अगुआई में बने नए बोर्ड ने इसके लिए दो लेखा फर्मों का सुझाव दिया है, जिसमें एक रीकास्टिंग और अन्य मौजूदा बही खाते की ऑडिटिंग करेगी। 
 
इसके अलावा आईएफआईएन के ऑडिटरों से जुड़ा एक मामला भी एनसीएलटी में लंबित है, जिसमें एमसीए ने उन पर 5 साल का प्रतिबंध लगाए जाने की मांग की है। यह मांग एसएफआईओ की जांच के बाद लगाई गई है, जिसमें कहा गया है कि आईएफआईएल का प्रबंधन धराशायी होने व कंपनी के खस्ताहाल होने के बावजूद ऑडिटरों ने आगाह नहीं किया। एमसीए और ऑडिटरों का पक्ष सुुनने के बाद न्यायाधिकरण ने इस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रखा है।
Keyword: NCLT, company,,
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