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डीएचएफएल : डीएसपी एमएफ की कानूनी कार्रवाई

हंसिनी कार्तिक और सुरजीत दास गुप्ता / मुंबई/नई दिल्ली August 04, 2019

डीएसपी म्युचुअल फंड (डीएसपी एमएफ) ने अपने बकाये की वसूली के लिएदीवान हाउसिंग फाइनैंस कॉरपोरेशन (डीएचएफएल) के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया शुरू की है। इस मुकदमेबाजी से आवास वित्त कंपनी की समाधान योजना में देरी हो सकती है। इस मामले से अवगत एक व्यक्ति ने कहा, 'म्युचुअल फंड औपचारिक तौर पर बैंकों द्वारा हस्ताक्षरित इंटर-क्रेडिटर एग्रीमेंट (आईसीए) से बंधे नहीं होते। इसलिए वे अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए कानूनी कार्रवाई का सहारा ले सकते हैं।' वैल्यू रिसर्च के आंकड़ों के अनुसार, डीएसपी एमएफ का निवेश 30 अप्रैल तक करीब 169 करोड़ रुपये था जिसमें अधिकांश निवेश गैर-परिवर्तनीय डिबेंचर (एनसीडी) के जरिये किया गया था। 

 
इस मुद्दे पर टिप्पणी के लिए डीएसपी एमएफ के प्रवक्ता से संपर्क नहीं हो सका। डीएचएफएल के प्रवक्ता ने इस मुद्दे पर कोई टिप्पणी नहीं की। भारतीय रिजर्व बैंक ने 7 जून को जारी अपने परिपत्र के तहत एक समाधान ढांचा तैयार किया था जिसके तहत लेनदारों और चूककर्ता के बीच किसी समाधान प्रक्रिया पर काम के लिए अपनी सहमति देने के लिए आईसीए पर हस्ताक्षर करना अनिवार्य है। समझा जाता है कि यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के नेतृत्व में अपने प्रमुख लेनदारों के साथ डीएचएफएल अपनी समाधान योजना को आगे बढ़ाने के अंतिम चरण में है और उसे लेनदारों के कंसोर्टियम के सामने रखा जाने वाला है। इसके लिए डीएचएफएल ने एक समाधान समिति भी गठित की है। सूत्रों ने कहा कि समाधान योजना के तहत डीएचएफएल व्यक्तिगत असुरक्षित लेनदारों को पूरा भुगतान करेगी जिसके बाद सुरक्षित लेनदारों को भुगतान किया जाएगा। हालांकि इस संबंध में फिलहाल कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।
 
समाधान योजना की प्रस्तावित शर्तों के अनुसार, कंपनी के लिए 1,000 से 1,500 करोड़ रुपये प्रति महीने की ताजा मासिक उधारी सीमा निर्धारित की जाएगी और जरूरत पडऩे पर मौजूदा ऋण की समय-सीमा में भी विस्तार दिया जा सकता है। इसके अलावा बैंक अपने कुछ ऋण को इक्विटी में भी तब्दील कर सकते हैं। हालांकि सूत्रों ने कहा कि इक्विटी में तब्दील होने वाली कुल ऋण की सीमा 10 फीसदी तक सीमित की जा सकती है। डीएचएफएल पर बैंकों का कुल ऋण करीब 40,600 करोड़ रुपये है जबकि डेट प्रतिभूतियों का आकार 45,380 करोड़ रुपये है जिनका भुगतान 31 मार्च 2019 तक किया जाना था। उसके पास करीब 98,000 करोड़ रुपये की परिसंपत्ति मौजूद है जिसमें से करीब 35,000 करोड़ रुपये के थोक ऋण हैं। अगले दो महीनों के दौरान डीएचएफएल की ब्याज देनदारी करीब 440 करोड़ रुपये है जिसका भुगतान 4,770 करोड़ रुपये के मूल बकाये के लिए सुरक्षित लेनदारों (एनसीडीधारकों) को किया जाना है।
 
सूत्रों ने कहा कि समाधान प्रक्रिया के तहत बैंक मूल रकम के पुनर्भुगतान के लिए 6 से 12 महीने की अतिरिक्त मोहलत भी दे सकते हैं। सार्वजनिक क्षेत्र के एक बैंक के वरिष्ठï अधिकारी ने कहा, 'यदि इस अवधि में डीएचएफएल के लिए एनसीडी जैसी अन्य देनदारी दिखती है तो कंपनी उन देनदारियों को पूरा करेगी।'
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