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सुपर रिच कर और स्क्रैप नीति से सरकार ने मोल ली मुसीबत

पुनीत वाधवा / नई दिल्ली August 02, 2019

जेफरीज के वैश्विक प्रमुख (इक्विटी रणनीति) क्रिस्टोफर वुड ने अपने साप्ताहिक नोट में कहा है, हालिया बजट में सुपर-रिच कर और पुराने वाहनों को कबाड़ बनाने तथा वाहनों के पंजीकरण व नवीनीकरण शुल्क में इजाफे के प्रस्ताव कर नरेंद्र मोदी सरकार ने खुद मुसीबत मोल ले ली है। हालांकि उन्हें दोबारा चुनी गई सरकार के ढांचागत सुधार के एजेंडे पर भरोसा है। लेकिन उनका कहना है कि धनाढ्य वेतनभोगी मध्य वर्ग को लक्षित करने का मतलब उस सरकार के लिए नहीं बनता, जिनका घोषित लक्ष्य दिवालिया कानून आदि के जरिए तथाकथित प्रवर्तकों के दोस्ताना पूंजीवाद पर लगाम कसना है क्योंकि लंबे समय से ये सार्वजनिक बैंकों का इस्तेमाल अपने निजी गुल्लक की तरह करते रहे हैं।
 
उन्होंने कहा, कामकाज के मौजूदा तरीके को समाप्त करने की सोची समझी कोशिश से स्वाभाविक तौरत पर अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचेगा, जो पहले से ही नोटबंदी, रेरा और जीएसटी का सामना कर रही है।  रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में करदाताओं की संख्या मार्च 2018 में 8.44 करोड़ थी। इसमें से सिर्फ 34 लाख ही 30 फीसदी के उच्च कर के दायरे में हैं।  इसके अलावा सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों पर जीएसटी 12 फीसदी से घटाकर 5 फीसदी और ईवी चार्जर पर 18 फीसदी से 5 फीसदी करने का फैसला लिया है। साथ ही पुराने वाहनों के स्क्रैप नीति के प्रस्ताव के अलावा पंजीकरण शुल्क में इजाफे का प्रस्ताव है। वुड ने कहा, ये प्रस्ताव वाहन क्षेत्र को और प्रभावित करेंगे, जो पिछले कुछ महीने से घटती बिक्री का सामना कर रहा है।
 
वुड के अलावा नोमूरा के विश्लेषकों ने भी इस पर चिंता जताई है और संभावना जता रहे हैं कि इसके परिणामस्वरूप दोपहिया सबसे ज्यादा प्रभावित होगा। नोमूरा के कपिल सिंह और सिद्धार्थ बेरा ने दोपहिगया खरीदारों की लागत 2.5 फीसदी और कार खरीदारों की लागत एक फीसदी बढऩे का अनुमान जताया है। उन्होंने कहा कि नए वाहनों के पंजीकरण शुल्क में इजाफा से नए वाहनों की बिक्री को और झटका लगेगा। यह वाहन क्षेत्र मेंं सुधार में देर करेगा क्योंकि मांग का माहौल कमजोर है। कैलेंडर वर्ष 2019 में अब तक निफ्टी ऑटो इंडेक्स बाजार के मुकाबले कमजोर रहा है और करीब 26 फीसदी टूट चुका है जबकि निफ्टी स्थिर रहा है। निफ्टी ऑटो में शामिल सभी शेयरों ने इस दौरान अपनी जमीन गंवाई है और बजाज ऑटो व हीरो मोटोकॉर्प क्रमश: 7 फीसदी व 24 फीसदी टूटे हैं। टीवीएस मोटर,, मारुति सुजूकी, अशोक लीलैंड, महिंद्रा ऐंड महिंद्रा और टाटा मोटर्स भी इस अवधि में 25 से 38 फीसदी तक टूटे हैं।
Keyword: vehicle, car, electric, petrol, diesel, scrap,,
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