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ऑनलाइन खेलों में मोबाइल का बढ़ रहा दबदबा

पतंजलि पाहवा /  August 02, 2019

विश्व क्रिकेट कप के सेमीफाइनल में जब भारतीय टीम हार गई तो साईं श्रीनिवास किरण के लिए यह थोड़ा दुख-थोड़ी खुशी वाला पल था। खेल प्रेमी के तौर पर वह काफी दुखी थे लेकिन एक उद्यमी के नाते वह खुद को चिंतामुक्त पा रहे थे। साईं मोबाइल आधारित खेल प्लेटफॉर्म 'मोबाइल प्रीमियर लीग' (एमपीएल) के सह-संस्थापक और मुख्य कार्याधिकारी हैं और इस मंच पर कौशल आधारित बहु-खिलाड़ी खेल उपलब्ध करा रहे हैं। रोचक बात यह है कि जब भी भारत के मैच होते हैं तो एमपीएल पर खिलाडिय़ों की संख्या घट जाती है? इसका लॉजिक सामान्य है। जितना रोचक मैच होगा, उतने ही कम लोग अपने मोबाइल की ओर नजर दौड़ाएंगे और इसके चलते संबंधित ऐप पर लोगों की संख्या कम हो जाएगी। वह कहते हैं, 'लेकिन ये लोग खेल के बीच में ब्रेक होने पर लौट आते हैं।' साईं के इस कथन में एक रोचक बात छुपी है क्योंकि उपयोगकर्ता जब भी काम से मुक्त होते हैं तो वे वापस ऐप पर आ जाते हैं। 

 
अगर स्कूल या ऑफिस के आपके आठ घंटे निकाल दिए जाएं तो एक दिन में 12-14 घंटे का समय खाली रहता है। बहुत सी कंपनियां इस खाली समय में ग्राहक को आकर्षित करने पर जोर दे रही हैं। फेसबुक और ट्विटर आपका ध्यान आकृष्टï करने के लिए नई विशेषताएं ला रही हैं। टिकटॉक की लुभावनी सामग्री, नेटफ्लिक्स की फिल्म एवं टीवी शो और एमपीएल तथा ड्रीम 11 भी इसी काम में लगी हैं। ये सभी मानव के दैनिक कार्यों जैसे भोजन करना और सोना आदि से प्रतिस्पर्धा कर रही हैं।  नेटफ्लिक्स के मुख्य कार्याधिकारी रीड हेस्टिंग्स ने साल 2017 में कहा था कि कंपनी दर्शकों की नींद के साथ प्रतिस्पर्धा कर रही है। इसके बाद उन्होंने कहा, 'और हम जीत रहे हैं।' साल 2019 में शेयरधारकों को भेजे एक पत्र में कंपनी ने लिखा कि उन्हें डिज्नी प्लस या एचबीओ से चिंता करने की जरूरत नहीं है बल्कि एपिक गेम्स के मल्टीप्लेयर खेल 'फोर्टनाइट' पर ध्यान देने की आवश्यकता है। यही कारण है कि एमपीएल के बारे में भी कंपनी को विचार करना चाहिए। 
 
बात सिर्फ यह नहीं है कि एमपीएल नेटफ्लिक्स के लिए प्रतिस्पर्धी है, बल्कि यह लोगों की आदत बनने का सवाल है। एमपीएल यही करने का प्रयास कर रहा है। इन्हें निवेशक भी मिल रहे हैं। साईं और शुभम मल्होत्रा द्वारा सितंबर 2018 में कंपनी की स्थापना करने के बाद से उन्होंने सिकोया कैपिटल (इंडिया), गो वेंचर्स, बी नेक्स्ट और बेस पार्टनर्स जैसे निवेशकों से 4 करोड़ डॉलर की राशि जुटाई है। सिकोया कैपिटल (इंडिया) के प्रंबध निदेशक शैलेंद्र सिंह कहते हैं, 'एमपीएल ने भारत के लिए बेहतरीन ई-स्पोट्र्स प्लेटफॉर्म विकसित किया है और इसने वृद्धि तथा लोगों द्वारा अपनाए जाने के मामले में हमें चकित कर दिया है। हमारा मानना है कि एमपीएल में बड़ा गेमिंग प्लेटफॉर्म बनने की क्षमता है और विभिन्न डेवलपर यहां अपने खेल लॉन्च करेंगे और कमाई करेंगे।'
 
शुरुआती सफर 
 
जब साईं और मल्होत्रा ने हाइक कंपनी को छोड़ा तो उन्होंने बाजार में इस अंतर को महसूस किया। साईं कहते हैं, 'प्लेस्टेशन और एक्सबॉक्स इस क्षेत्र के अकेले खिलाड़ी हैं। स्टीम लैपटॉप के लिए तो बेहतर है लेकिन मोबाइल के लिए कुछ नहीं था।' इसके चलते दोनों ने मिलकर एमपीएल की स्थापना की। 
 
कारोबारी मॉडल
 
तो एमपीएल किस तरह काम करता है? साईं कहते हैं, 'अगर आप पूल खेलना चाहते हैं तो एमपीएल पर जाएं, पूल को चुनें और खेलना शुरू करें।' खिलाड़ी विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं में खेलने के लिए भुगतान भी कर सकते हैं। इनमें हिस्सा लेने का शुल्क 10 रुपये से लेकर 50 रुपये तक होता है। वह कहते हैं, 'इनाम राशि 35 रुपये से लेकर 3 लाख रुपये तक हो सकती है। यह खेल में शामिल खिलाडिय़ों की संख्या पर निर्भर करता है।' यही कंपनी की कमाई का एक स्रोत होता है। एमपीएल प्रतियोगिता में खिलाडिय़ों के शामिल होने से जुटाई गई राशि का 20 प्रतिशत हिस्सा होस्टिंग शुल्क के तौर पर लेती है। साईं बताते हैं, 'ई-स्पोट्र्स कराने वाली दूसरी कंपनियां 30 प्रतिशत राशि लेती हैं।' इसका अर्थ है कि एमपीएल में इनाम राशि अधिक होगी। 
 
लेकिन खिलाडिय़ों को मुफ्त में खेले जाने वाले खेल से शुल्क वाले खेल की ओर कैसे ले जाया जाता है? वह कहते हैं, 'हम ऐसा नहींं करते। फिलहाल, हमरा ध्यान खिलाडिय़ों को अधिक से अधिक खेल उपलब्ध कराने पर है।' साईं बताते हैं कि कंपनी अभी शुरुआती चरण में हैं और फिलहाल वह केवल एक हिस्से पर काम कर रहे हैं, अधिक से अधिक खेल उपलब्ध कराना और इसे उपयोगकर्ताओं की आदत बना देना। इस क्षेत्र में निवेश करने वालों का कहना है कि खेलों की अधिक आपूर्ति से लोगों में उत्सुकता बढ़ाई जा रही है और मूल्य संवर्धन के जरिये मुफ्त में खेलने वालों को शुल्क का भुगतान करने की तरफ ले जाया जा रहा है। 
 
इस मामले में मूल्य संवर्धन नगदी जीतने की संभावना है। एमपीएल में प्रवेश शुल्क काफी कम है जिससे लोगों के लिए शुल्क वाले खेल खेलना आसान हो जाता है। लेकिन एमपीएल केवल इससे ही रुपये नहीं जुटाती। साईं कहते हैं, 'अगले 18 महीनों में हम विज्ञापन और खरीदारी वाला मॉडल लाएंगे।' मुफ्त में खेलने वालों को विज्ञापन दिखाए जाएंगे और शुल्क का भुगतान करके खेलने वालों को बिना विज्ञापन के खेलने के साथ ही इनाम जीतने की संभावनाएं भी होंगी। खेल में अपना स्तर बढ़ाने के लिए भी शुल्क लिया जाएगा। हालांकि यह काफी जटिल प्रक्रिया हो सकती है। एमपीएल को 2.5 करोड़ लोगों ने इन्स्टॉल किया है। कंपनी का दावा है कि उसके एक करोड़ मासिक सक्रिय ग्राहक हैं जिसमें 80 प्रतिशत पुरुष हैं। इनमें से अधिकांश ग्राहक मझोले शहरों से हैं। हालांकि अभी भी ऐप पर भुगतान के साथ खेलना भारत में अपने शुरुआती स्तर पर ही है। 
Keyword: online game, cricket,,
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