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मेसेज के स्रोत बताने पर व्हाट्सऐप से तनातनी जारी

नेहा अलावधी /  August 02, 2019

इंटरनेट मेसेजिंग सेवा व्हाट्सऐप के मुख्य कार्याधिकारी (सीईओ) के साथ हुई भारत सरकार की दूसरी बैठक में भी कुछ ठोस नतीजा नहीं निकल पाया है। इस मुलाकात में सरकार ने जहां संवेदनशील मामलों में मेसेज के स्रोत का पता लगाने में सहयोग की मांग दोहराई वहीं व्हाट्सऐप ठोस जवाब देने से बचती रही। हालांकि व्हाट्सऐप की भुगतान सेवा के इस साल के अंत तक शुरू हो जाने के बारे में सकारात्मक बातें जरूर सुनने को मिली हैं। केंद्रीय सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने इस मुलाकात में कमोबेश वही बातें दोहराईं जो उन्होंने पिछले साल अगस्त में हुई पहली बैठक में रखी थीं। प्रसाद ने व्हाट्सऐप के तत्कालीन सीईओ क्रिस डेनियल्स से कहा था कि कंपनी भारत में एक अलग कंपनी बनाए, एक शिकायत अधिकारी नियुक्त करे और अपने प्लेटफॉर्म पर फर्जी संदेशों के स्रोत का पता लगाने का तकनीकी समाधान लेकर आए। भारत सरकार ने व्हाट्सऐप से भारतीय कानूनों का पालन सुनिश्चित करने को भी कहा था। लेकिन सरकार का मानना है कि व्हाट्सऐप इनमें से अधिकांश मांगों पर खरी नहीं उतरी है। उसकी तरफ से अनमने ढंग से कोशिशें भी की गई हैं। 

 
वहीं भारत में करीब 40 करोड़ उपभोक्ता होने का दावा करने वाली कंपनी व्हाट्सऐप ने इनमें से कुछ मांगों को पूरा करने का दावा किया है। उसने भारतीय कारोबार के लिए एक अलग प्रमुख नियुक्त किया है और अपने प्लेटफॉर्म का दुरुपयोग रोकने के लिए जागरूकता फैलाने एवं प्रशिक्षण देने पर ध्यान दे रही है। उसने कोमल लाहिड़ी को भारत के लिए शिकायत अधिकारी भी नियुक्त किया है जो अमेरिका से काम करती हैं। प्रसाद ने व्हाट्सऐप के मौजूदा सीईओ विल कैथकार्ट के साथ गत शुक्रवार हुई मुलाकात में एक बार फिर पुरानी मांगें दोहराईं। उनका जोर बड़े पैमाने पर फैलाए जा सकने वाले संदेशों के उद्गम की पहचान पर था। उन्होंने व्हाट्सऐप से अपना शिकायत अधिकारी भारत में ही तैनात करने और प्लेटफॉर्म का दुरुपयोग रोकने के लिए कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ सहयोग करने का मुद्दा भी उठाया।
 
देश के कई हिस्सों में मॉब लिंचिंग (भीड़ द्वारा पीटकर मार देने) की घटनाओं में व्हाट्सऐप की भूमिका उजागर हुई थी। दरअसल फर्जी खबरें फैलाने के लिए इस प्लेटफॉर्म का गलत इस्तेमाल किया गया था। व्हाट्सऐप असल में एक बंद प्रकृति वाला मेसेजिंग प्लेटफॉर्म है और नस्ली एवं राजनीतिक रूप से भड़काऊ संदेश प्रसारित करने के लिए इसी का बेजा फायदा उठाया जा रहा है। इन घटनाओं के बाद व्हाट्सऐप पर ऐसे संदेशों का स्रोत पता करने में मदद करने का दबाव बढ़ता जा रहा है।
 
एन्क्रिप्शन: दोधारी तलवार
 
पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) स्तर के एक अधिकारी कहते हैं, 'अपराधी बहुत चालाक हो गए हैं। उन्हें पता है कि व्हाट्सऐप पर भेजे गए संदेशों को पकड़ा नहीं जा सकता है लिहाजा वे इसका इस्तेमाल करते हैं। व्हाट्सऐप की तरफ से किए गए बदलाव भी अपराधियों के आगे नाकाफी साबित हुए हैं। व्हाट्सऐप को यह पता लगाने में मदद करनी चाहिए कि किसी गंभीर अपराध से जुड़ा संदेश कहां से भेजा गया था। वह राष्ट्रीय सुरक्षा को प्रभावित करने वाले संदेशों को डीक्रिप्ट करे।' व्हाट्सऐप प्लेटफॉर्म पर भेजे जाने वाले संदेश का एन्क्रिप्शन (कूटबद्ध) होता है और उनके बारे में खुद सेवा प्रदाता को भी पता नहीं होता है। इस एन्क्रिप्शन की वजह से सरकार उपभोक्ताओं के संदेशों पर नजर नहीं रख सकती है। लेकिन इसी तकनीक के चलते फर्जी खबरों एवं आपराधिक गतिविधियों के प्रसार में भी व्हाट्सऐप का दुरुपयोग किया जा रहा है। तकनीकी जानकारों एवं निजता के पैरोकारों का हमेशा यह मानना रहा है कि इस एन्क्रिप्शन को तोडऩा अपने लोगों पर सरकारी निगरानी शुरू होने का पहला कदम होगा। यह अलग बात है कि ये मांगें नई नहीं हैं। लेकिन सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री प्रसाद ने कैथकार्ट से मुलाकात के दौरान एक बार फिर संदेशों का स्रोत पता करने की सुविधा देने की मांग की। इसका सीधा संबंध एन्क्रिप्शन तोडऩे से है। लेकिन कैथकार्ट ने साफ किया कि व्हाट्सऐप अपने उत्पाद में एन्क्रिप्शन कायम रखेगी।  
 
पिछले साल इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने आईटी अधिनियम के तहत मध्यवर्ती संबंधी मौजूदा नियमों में बदलाव प्रस्तावित किए थे। राष्ट्रीय सुरक्षा का मसला होने पर यह एन्क्रिप्शन तोडऩे की भी बात कही गई थी। हालांकि अभी इन संशोधनों को लागू नहीं किया गया है। डिजिटल अधिकार समूह इंटरनेट फ्रीडम फाउंडेशन ने इस प्रस्तावित बदलावों पर कहा है कि 'निगरानी पर किसी भी तरह का वाजिब संसदीय निरीक्षण या न्यायिक नियंत्रण नहीं होने से ये बदलाव लागू हो जाने पर आम नागरिकों पर सरकारी नियंत्रण काफी बढ़ जाएगा। यह चीन की तरह होगा जो नागरिकों पर निगरानी के लिए एन्क्रिप्शन तोड़ता रहता है।' सरकार पहले भी कंपनियों को एन्क्रिप्शन का स्तर कम रखने या उसे तोडऩे का दबाव बनाने की कोशिश कर चुकी है। आईटी मंत्रालय ने वर्ष 2016 में भी एन्क्रिप्शन नीति का मसौदा पेश किया था लेकिन भारी विरोध के चलते उसे वापस लेना पड़ा था। 
 
वर्ष 2017 में 'द गॉर्डियन' समाचारपत्र ने व्हाट्सऐप संदेशों तक पहुंच मुहैया कराने वाला पिछला दरवाजा मौजूद होने का दावा किया था लेकिन कंपनी ने उसे सिरे से नकार दिया था। व्हाट्सऐप के सह-संस्थापक ब्रायन एक्टन ने कहा था कि वह अपने सिस्टम में घुसने का सरकारों को पिछला दरवाजा नहीं देती है। अप्रैल 2016 से ही व्हाट्सऐप प्लेटफॉर्म पर होने वाली चैट एवं कॉल एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड होती हैं। कंपनी अब भी एन्क्रिप्शन को लेकर अपने पुराने रुख पर ही कायम है।
 
राजनीति एवं व्हाट्सऐप
 
सत्तारूढ़ भाजपा और विपक्षी दल कांग्रेस समेत सभी राजनीतिक दल अपनी गतिविधियों के संचालन के लिए व्हाट्सऐप प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करते हैं। समन्वय, योजना और अपने समर्थकों को संदेश देने के लिए पार्टियां व्हाट्सऐप पर काफी हद तक निर्भर हैं। भाजपा आईटी प्रकोष्ठ ने ही एक ग्रुप में अधिकतम लोगों की संख्या को 50 से बढ़ाकर 256 करने का अनुरोध किया था। असल में, कई मंत्री और अधिकारी एन्क्रिप्शन की वजह से व्हाट्सऐप पर संदेश भेजने या कॉल करने को अधिक सुरक्षित मानते हैं। 
 
हालांकि व्हाट्सऐप पे सेवा शुरू करने में कंपनी को जद्दोजहद का सामना करना पड़ा है। सरकार ने इस सेवा में इस्तेमाल होने वाली सत्यापन व्यवस्था और रिजर्व बैंक के डेटा स्थानीयकरण मानकों के अनुपालन को लेकर एतराज जताए हैं। इस साल के अंत तक यह भुगतान सेवा शुरू होने के पहले व्हाट्सऐप को अभी कई अड़चनों का सामना करना पड़ सकता है। अब यह व्हाट्सऐप पर निर्भर करता है कि वह इन चुनौतियों से किस तरह निपटती है?
Keyword: whatsapp, privacy, data, security,,
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