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दलहन-मोटे अनाज की बुआई में तेजी

संजीव मुखर्जी / नई दिल्ली August 02, 2019

पिछले कुछ सप्ताहों में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून में आए सुधार से दलहन और मोटे अनाजों की बुआई में तेजी आई है और पिछले साल की समान अवधि के दौरान तथा पिछले पांच वर्षों के औसत रकबे के मुकाबले अंतर घटा है। हालांकि खरीफ के दौरान सबसे ज्यादा लगाए जाने वाले धान का रकबा पिछले साल के मुकाबले कम बना हुआ है। बारिश में विलंब और किसानों द्वारा मक्के की फसल पर ज्यादा ध्यान देने की वजह से भी धान के रकबे में इस बार कमी आई है। आंकड़ों से पता चलता है कि 2 अगस्त 2019 तक लगभग 2.235 करोड़ हेक्टेयर क्षेत्र पर धान की रोपाई हुई है जो पिछले साल की समान अवधि के दौरान दर्ज किए गए रकबे की तुलना में लगभग 12.50 प्रतिशत कम और पिछले पांच वर्षों की समान अवधि में औसत बुआई के मुकाबले 16.20 प्रतिशत कम है।
 
पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, असम और ओडिशा में धान की रोपाई में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। फिर भी, मॉनसून की विलंब से हुई बारिश की वजह से दलहनों और मोटे अनाजों की बुआई में इजाफा हुआ और जहां पिछले सप्ताह इनकी बुआई में 18 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई थी, वहीं 2 अगस्त को समाप्त सप्ताह के दौरान यह अंतर घटकर 7.55 प्रतिशत रह गया। मोटे अनाज के मामले में, बुआई में कमी पिछले सप्ताह और इस सप्ताह के बीच 8.86 प्रतिशत से घटकर 6.19 प्रतिशत रह गई।
 
भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) ने कहा है कि 25-31 जुलाई के बीच दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की बारिश 2019 के सामान्य की तुलना में 42 प्रतिशत अधिक थी और दक्षिण-पश्चिम मॉनसून में बारिश के लिहाज से यह (25-31 जुलाई का सप्ताह) अच्छे सप्ताहों में से एक रहा। उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत में, बारिश सामान्य की तुलना में 50 प्रतिशत और 85 प्रतिशत ज्यादा हुई। आईएमडी के अनुसार, भविष्य में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून में अगले दो सप्ताहों तक तेजी बरकरार रहने और देश के कई हिस्सों में बारिश सामान्य रहने की संभावना है। कुल मिलाकर, अब तक इस सीजन में 2 अगस्त तक खरीफ फसलों की बुआई लगभग 7.885 करोड़ हेक्टेयर पर की जा चुकी है, जो पिछले साल समान अवधि के रकबे की तुलना में 6.59 प्रतिशत कम और पिछले पांच वर्षों की समान अवधि की औसत बारिश के मुकबाले 5.35 प्रतिशत कम है। 
 
अच्छी बारिश से जलाशयों में जलस्तर में भी सुधार आया है जो अब 54.25 अरब घन मीटर (बीसीएम) पर है और इन जलाशयों की क्षमता का 33 प्रतिशत है। यदि आईएमडी का अनुमान सही साबित होता है तो अगस्त और सितंबर महीनों में एलपीए (लॉन्ग पीरियड एवरेज) की 100 प्रतिशत बारिश हो सकती है। अगस्त और सितंबर के लिए एलपीए 42.83 सेंटीमीटर है। दोनों महीनों में चार माह के दक्षिण-पश्चिम मॉनसून (जो जून से शुरू होता है) के दौरान कुल बारिश में लगभग 49 प्रतिशत योगदान रहता है। 
 
हालांकि मौसम का अनुमान व्यक्त करने वाली निजी एजेंसी स्काईमेट का यह मानना नहीं है कि अगस्त और सितंबर में पर्याप्त बारिश होगी। स्काईमेट के प्रबंध निदेशक जतिन सिंह ने आज एक ब्लॉग में कहा कि अगस्त के दूसरे पखवाड़े में बारिश में कमी आ सकती है और इससे 100 प्रतिशत एलपीए का आंकड़ा हासिल करने में कठिनाई हो सकती है। उन्होंने कहा कि अगस्त का महीना इस सीजन में मॉनसून की संपूर्ण तस्वीर पेश करने के लिहाज से महत्त्वपूर्ण है। 
Keyword: agri, farmer, crop, monsoon, IMD,,
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