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सख्त परिदृश्य में आईपीओ का आकार घटा रहीं कंपनियां

बीएस संवाददाता / मुंबई August 01, 2019

शापूरजी पलोनजी समूह की कंपनी स्टर्लिंग ऐंड विल्सन सोलर और माइक्रोफाइनैंस कंपनी स्पंदन स्फूर्ति फाइनैंशियल सर्विसेज ने अपने आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) के आकार में करीब एक तिहाई की कटौती की है। इस मामले से अवगत सूत्रों ने कहा कि बाजार परिदृश्य में सख्ती के मद्देनजर कंपनियों ने यह पहल की है। ये दोनों आईपीओ अगले सप्ताह बाजार में दस्तक देने वाले हैं। स्टर्लिंग ऐंड विल्सन ने आईपीओ के जरिये 4,300 करोड़ रुपये जुटाने की योजना बनाई है जबकि स्पंदन करीब 6,000 करोड़ रुपये जुटाना चाहती है। सौर बिजली के इंजीनियरिंग, खरीद एवं निर्माण कंपनी स्टर्लिंग ऐंड विल्सन सोलर का आईपीओ पूरी तरह ऑफर फॉर सेल (ओएफएस) है। कंपनी ने इस निर्गम के आकार को 4,500 करोड़ रुपये से घटाकर 3,150 करोड़ रुपये कर दिया है। 
 
इस बीच, स्पंदन स्फूर्ति फाइनैंशियल सर्विसेज ने 400 करोड़ रुपये के ताजा निर्गम घटक को बरकरार रखा है लेकिन ओएफएस घटक को 1,200 करोड़ रुपये से घटाकर 800 करोड़ रुपये कर दिया है। साथ ही निजी इक्विटी फर्म केदार कैपिटल ने इसके जरिये कम हिस्सेदारी बेचने का निर्णय लिया है। इस मामले से अवगत एक निवेश बैंकर ने कहा, 'चुनौतीपूर्ण बाजार परिदृश्य के मद्देनजर कंपनियों को अपनी मूल्यांकन आकांक्षाओं के अनुरूप कदम पीछे खींचना पड़ रहा है। स्टर्लिंग और स्पंदन दोनों ने ओएफएस घटक में कटौती की है क्योंकि कुछ निवेशक घटे हुए मूल्यांकन पर अधिक शेयरों की बिक्री नहीं करना चाहते थे।'
 
ये दोनों सार्वजनिक पेशकश ऐसे समय में बाजार में दस्तक दे रहे हैं जब शेयर बाजार में गिरावट का दौर जारी है। जुलाई में बेंचमार्क निफ्टी में 5.7 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई जबकि व्यापक बाजार के सूचकांक निफ्टी मिडकैप 100 और स्मॉलकैप 100 में क्रमश: 8.2 फीसदी और 11 फीसदी की गिरावट आई। निवेश बैंकरों ने कहा कि द्वितीयक बाजार में कमजोर धारणा के बावजूद घटे हुए मूल्यांकन पर निवेशकों को काफी राहत दिख रही है। उन्होंने कहा कि इन आईपीओ के लिए विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों के साथ-साथ संस्थागत निवेशकों से काफी मांग दिख रही है। 
 
बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) द्वारा हाल में किए गए नियमों में बदलाव के कारण आईपीओ दस्तावेज को नए सिरे से जमा कराए बिना ये कंपनियां अपने आईपीओ के आकार में बदलाव कर सकती हैं। इससे पहले कंपनियों को अपने निर्गम के आकार में 20 फीसदी से अधिक के बदलाव के लिए सेबी के नए सिरे से आईपीओ दस्तावेज जमा कराने पड़ते थे। जनवरी में बाजार नियामक ने कंपनियों को अपने आईपीओ के ओएफएस घटक में अधिकतम 50 फीसदी तक बदलाव करने की अनुमति दी थी। निवेश बैंकरों का कहना है कि नियमों में इस बदलाव के कारण आईपीओ के साथ पूंजी बाजार में दस्तक देने वाली कंपनियों को बाजार परिदृश्य में चुनौतियों से निपटने में मदद मिलेगी। हालांकि बाजार नियामक द्वारा एक अन्य नियम में बदलाव किया गया है जो आईपीओ की तैयारी करने वाली कंपनियों के लिए अड़चन साबित हो रहा है। बुधवार को बंद होने वाले ऐफल इंडिया के आईपीओ के साथ ही बाजार नियामक ने खुदरा निवेशकों के लिए इलेक्ट्रॉनिक भुगतान को अनिवार्य कर दिया है।
 
निवेश बैंकरों का कहना है कि छोटे निवेशकों को आईपीओ के लिए तथाकथित यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) के जरिये भुगतान करने के लिए अभी पूरी तरह तैयार नहीं किया गया है। अधिकतर बैंकरों का मानना है कि यूपीआई आधारित ऐप्लिकेशन के साथ निर्गम जारी करने के कारण खुदरा निवेशकों की प्रतिक्रिया कम हो सकती है। सूत्रों ने कहा कि निवेश बैंकरों के एक समूह ने आईपीओ के लिए यूपीआई के जरिये भुगतान को बेहतर तरीके से संचालित करने के लिए बाजार नियामक के साथ एक बैठक करने की मांग की है।
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