बिजनेस स्टैंडर्ड - कराधान की चिंता
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Saturday, August 24, 2019 11:40 PM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम विशेष खबर

कराधान की चिंता

संपादकीय /  August 01, 2019

देश में सरकारी वित्त का प्रबंधन कठिन होता जा रहा है क्योंकि राजस्व संग्रह कम है और व्यय प्रतिबद्धताएं बहुत अधिक हैं। यदि समय रहते सुधार के उपाय नहीं किए गए तो देश की आर्थिक वृद्धि पर इसका असर जारी रहेगा। राजस्व की बात करें तो कर प्रशासन की अपर्याप्तता खासकर वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के मामले में ऐसा होने से संग्रह पर बुरा असर पड़ रहा है। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की एक हालिया रिपोर्ट बताती है कि जीएसटी, जिसे देश के इतिहास के सबसे बड़े सुधारों में से एक माना जा रहा था, वह वांछित तरीके से काम नहीं कर रहा है और उसके क्रियान्वयन में कुछ मसले बरकरार हैं।

 
उदाहरण के लिए सीएजी का कहना है कि शुरुआत के दो वर्ष बाद भी सिस्टम की वैधता वाला इनपुट टैक्स क्रेडिट का इनवॉइस से मिलान अब तक नहीं हो पा रहा है। अनुमान के मुताबिक ही व्यवस्थागत कमियों का असर राजस्व संग्रह पर पड़ रहा है। उदाहरण के लिए अप्रत्यक्ष कर संग्रह में बढ़ोतरी 2017-18 में घटकर 5.8 फीसदी रह गई। इससे ठीक पिछले वर्ष यह बढ़ोतरी 20 फीसदी थी। गत वित्त वर्ष के लिए अनुमानित संग्रह का अनुमान भी कम किया गया। व्यवस्थागत कमियों के कारण इंटीग्रेटेड जीएसटी (आईजीएसटी) का भी उपयुक्त निस्तारण नहीं हो सका। ऐसे में जीएसटी दरों में कटौती के बजाय जीएसटी परिषद यदि व्यवस्था सुधार के लिए काम करे तो अधिक बेहतर होगा।
 
सरकारी अंकेक्षक ने प्रत्यक्ष कर प्रशासन में कुछ ढांचागत मसलों का भी उल्लेख किया। एक ओर जहां संग्रह और अनुपालन में इजाफा हुआ, वहीं प्रशासन में भी सुधार की आवश्यकता है। उदाहरण के लिए वर्ष 2017-18 के अंत में मांग का बकाया 11 लाख करोड़ रुपये तक है। कर विभाग को लगता है कि इसका 98 फीसदी हिस्सा वसूल कर पाना काफी मुश्किल होगा। इतना ही नहीं कर संबंधी कई मामले विभिन्न अदालतों में उलझे हुए हैं। स्पष्ट है कि कर नियमों को सहज बनाने की आवश्यकता है। ऐसा करने से कानूनी मामले कम करने में सहायता मिलेगी और संग्रह में सुधार होगा। आशा की जानी चाहिए कि नई प्रत्यक्ष कर संहिता पर काम कर रहा कार्य बल कानूनी वाद-विवाद कम करने की राह सुझाएगा।
 
ऐसे में सरकार की व्यय प्रतिबद्धताओं से इतर, कमतर राजस्व संग्रह भी राजकोषीय संतुलन बिगाड़ रहा है। सीएजी द्वारा किए गए आकलन के मुताबिक वर्ष 2017-18 में केंद्र का राजकोषीय घाटा सकल घरेलू उत्पाद के 5.85 फीसदी के बराबर था जबकि सरकार ने इसे 3.46 फीसदी दर्शाया था। इसमें सरकारी उपक्रमों द्वारा ली गई उधारी शामिल थी। यह उधारी सरकारी व्यय की भरपाई के लिए ली गई। व्यापक स्तर पर देखा जाए तो इसका अर्थ यह हुआ कि केंद्र सरकार, केंद्रीय सरकारी उपक्रम और राज्य सरकारें आम पारिवारिक वित्तीय बचत का इस्तेमाल कर रही हैं। इससे विदेशों से बढ़ती उधारी के पूरे रुख को भी समझा जा सकता है। यह केंद्र के स्तर पर भी हो रहा है और कंपनियों के स्तर पर भी। इसके अपने जोखिम हैं।
 
सरकार को सीएजी द्वारा कर प्रशासन को लेकर उठाए गए मुद्दों को हल करने की दिशा में काम करना चाहिए। खासकर जीएसटी व्यवस्था में। उसे अपने व्यय का भी नए सिरे से आकलन करना चाहिए। हालांकि यह भी सच है कि मंदी के दौर में व्यय को तार्किक बनाना कठिन होगा, उधर बजट के आंकड़ों को लेकर तमाम आशंकाएं हैं और सरकारी उपक्रमों का ऋण काफी बढ़ा हुआ है। मध्यम अवधि में यह नुकसानदेह हो सकता है। अगर समय रहते जरूरी कदम नहीं उठाए गए तो संकट कहीं अधिक व्यापक हो जाएगा। 
Keyword: gst, input tax, credit, crisil, IGST, SGST,,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या वित्त मंत्री की घोषणा से आर्थिक विकास को मिलेगी गति?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.