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आभूषण निर्यातकों को मिल सकता है ऋण बीमा लाभ

दिलीप कुमार झा / मुंबई July 31, 2019

रत्न एवं आभूषण क्षेत्र में नकदी की किल्लत दूर करने के लिए सरकार निर्यात ऋण गारंटी (ईसीजी) बीमा लाभ योजना पुन: पेश करने की तैयारी कर रही है। भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के उप-प्रबंध निदेशक और समन्वय समिति (सीओसी) के चेयरमैन पी एन प्रसाद ने बुधवार को बैंकिंग समिट 2019 जेम्स ऐंड ज्वैलरी सेक्टर के अवसर पर कहा, 'ईसीजी बीमा को एक महीने में पुन: शुरू किया जाएगा।' ईसीजी बीमा योजना यह सुनिश्चित करेगी कि ऋणदाताओं को भारत से निर्यातकों या विदेश से आयातकों द्वारा भुगतान चूक की स्थिति में दावे से संबंधित रकम प्राप्त हो। बैंक मौजूदा समय में  वस्तुओं की खेप से पहले और बाद में वित्त मुहैया कराते हैं और अब इन्हें निर्यात ऋण गारंटी निगम (ईसीजीसी) के अधीन शामिल किया जाएगा। ईसीजीसी ऋणदाताओं को कर्जदारों से रकम की वसूली की गारंटी देगा।
 
नीरव मोदी द्वारा पीएनबी में 2 अरब डॉलर के घोटाले के बाद पूरे रत्न एवं आभूषण क्षेत्र को ऋण संकट का सामना करना पड़ा है, क्योंकि बैंकरों ने इस क्षेत्र को ऋण के संदर्भ में नकारात्मक सूची में डाल दिया है। जहां नए ऋणों के लिए प्रस्ताव ठंडे बस्ते में रखे जा रहे हैं, वहीं मौजूदा ग्राहकों के लिए प्रावधान और वितरण में काफी कमी की गई है। इससे पूरे रत्न एवं आभूषण क्षेत्र को अनिश्चितता का सामना करना पड़ रहा है। वैश्विक आर्थिक मंदी से भी धारणा प्रभावित हुई है जिससे भारत के रत्न एवं आभूषण निर्यात में अप्रैल-जून तिमाही में 15 प्रतिशत की भारी कमी दर्ज की गई।
 
भारत में घरेलू और निर्यात केंद्रित, दोनों तरह की रत्न एवं आभूषण कंपनियों के लिए कुल ऋण लगभग 25,000 करोड़ रुपये का है। एसबीआई ने न सिर्फ नए ऋणों की मंजूरी के लिए दस्तावेजी प्रक्रिया को सख्त बनाया है बल्कि इस क्षेत्र के लिए कुल प्रावधान में भी ठहराव की स्थिति पैदा हो गई है। प्रसाद ने कहा कि ईसीजीसी रत्न एवं आभूषण क्षेत्र के लिए ऋण दबाव घटाने में मदद करेगा। दरअसल, भारत सरकार ने निर्यात खेपों पर भुगतान में इरादतन चूक के मामलों को ध्यान में रखते हुए 6 साल पहले रत्न एवं आभूषण क्षेत्र के लिए ईसीजीसी लाभ मुहैया कराना बंद कर दिया था। इंडियन बैंकिंग एसोसिएशन (आईबीए) के मुख्य कार्यकारी वी जी कन्नन ने कहा, 'ईसीजीसी को सफलता हासिल करने के प्रयास में दावों की संख्या में कमी लानी होगी। पिछले कुछ वर्षों में दावों की संख्या काफी तेजी से बढ़ी है। इसलिए ईसीजीसी की सफलता चिंता का विषय है।' विश्वस्त सूत्रों ने कहा कि सरकार ने पूरे निर्यात आधारित क्षेत्र के लिए 1,000 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। लेकिन एक अकेले आभूषण विक्रेता ने 10,000 करोड़ रुपये की चूक का दावा किया जिससे इस क्षेत्र में पारदर्शिता को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। हालांकि विश्लेषकों ने इस लाभ योजना के तहत एमएसएमई क्षेत्र को भी शामिल किए जाने के लिए ईसीजीसी दावे की ऊपरी सीमा 100 करोड़ रुपये सुझाई है। 
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