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निजी क्षेत्र की देसी व विदेशी फर्में बनीं फसल बीमा की सबसे बड़ी लाभार्थी

नम्रता आचार्य / कोलकाता July 30, 2019

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत एकत्र किए गए प्रीमियम की सबसे बड़ी लाभार्थी बीमा एवं पुनर्बीमा कंपनियां खासकर विदेशी पुनर्बीमा और निजी बीमा फर्में बनी हैं। सरकार दावों के निपटान के लिए पूल मैकेनिज्म लाने पर विचार कर रही है। पिछले 6 सीजन में विदेशी पुनर्बीमाकर्ताओं के खाते में करीब 5,000 करोड़ रुपये गए हैं, क्योंकि कुल मिलाकर दावा अनुपात महज करीब 77 प्रतिशत रहा है। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा कि इसकी वजह से सरकार को इस कारोबार में पुनर्बीमा कंपनियों को शामिल करने फिर से विचार करना पड़ रहा है।  
 
पत्र सूचना कार्यालय (पीआईबी) के आंकड़ों से भी इस बात की पुष्टि होती है।  वित्त वर्ष 2016-17 और 2017-18 में पीएमजेडीवाई के के तहत करीब 48,267 करोड़ रुपये प्रीमियम एकत्र किया गया। वहीं 39,789 करोड़ रुपये दावे के रूप में भुगतान किया गया। इससे साफ संकेत मिलता है कि 9,000 करोड़ रुपये बीमा और पुनर्बीमा करने वाली फर्मों के पास गए। कुल प्रीमियम में करीब 8,700 करोड़ रुपये का भुगतान किसानों द्वारा किया गया, जबकि 39,547 करोड़ रुपये केंद्र व राज्यों ने सब्सिडी के रूप में भुगतान किया। 
 
अधिकारी ने कहा, 'पूल मैकेनिज्म में धन को देश के भीतर रखने में मदद मिलेगी और यह विदेशी पुनर्बीमाकर्ताओं के पास नहीं जाएगा।' प्रस्तावित पूल मैकेनिज्म के तहत जहां निजी फर्मों को प्रीमियम का छोटा हिस्सा मिलेगा, वहीं बड़ा हिस्सा पूल में चला जाएगा, जिसका इस्तेमाल दावों के भुगतान में होगा। शुरुआती ïवर्षों में यह पूल छोटा होगा, जैसा कि सरकार बजट समर्थन करती है। साथ ही दावे का अनुपात 100 प्रतिशत से ज्यादा चले जाने को लेकर भी चर्चा की जानी थी।  इस समय योजना से आने वाले करीब 25 प्रतिशत जोखिम को बीमा कंपनियों ने बरकरार रखा है, जबकि शेष को पुनर्बीमा कंपनियों पर छोड़ दिया गया है। करीब 50 प्रतिशत जोखिम का पुनर्बीमा सरकारी कंपनी जीआईसी और शेष का इंटरनैशनल रीइंश्योरर फर्में करती हैं। 
 
इस तरह से अगर दावे का अनुपात 100 प्रतिशत से बहुत नीचे रहता है तो मुनाफे का बड़ा हिस्सा विदेशी पुनर्बीमाकर्ताओं के खाते मेंं चला जाता है। एक निजी बीमा कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, 'नया मॉडल लंबी अवधि के लिए टिकाऊ साबित हो सकता है।' 2016 में पेश पीएमएफबीवाई के तहत किसानों को खरीफ की फसल की बीमा राशि का 2 प्रतिशत और रबी फसल व तिलहन की फसल की बीमा राशि का 1.5 प्रतिशत भुगतान करना होता है। वहीं वाणिज्यिक व बागवानी फसलों के लिए 5 प्रतिशत भुगतान करना पड़ता है। वास्तविक प्रीमियम के शेष हिस्से का भुगतान केंद्र व राज्य सरकारों को बराबर बराबर करना होता है।  पीएमएफबीवाई बीमांकित गणनाओं पर आधारित है और दरें जोखिम के अनुमान के आधार पर होती हैं। इसलिए फसलों व इलाकों के मुताबिक प्रीमियम अलग अलग होता है। उदाहरण के लिए सूखा संभावित इलाकों में प्रीमियम सामन्यतया ज्यादा होता है और वहां भुगतान भी ज्यादा होता है। बीमा कंपनियों को मात्रा का लाभ मिलता है, क्योंकि वे अन्य क्षेत्रों से प्रीमियम पाती हैं, जहां सामान्यतया फसल का पैटर्न स्थिर होता है।  इस योजना को लागू करने के लिए 18 सामान्य बीमा कंपनियों को पैनल में शामिल किया गया है, जिनमें 5 सार्वजनिक क्षेत्र की बीमा कंपनियां हैं। 
Keyword: agri, farmer, crop, insurance,,
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