बिजनेस स्टैंडर्ड - एनसीएलटी पर निपटारे का बढ़ेगा दबाव
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एनसीएलटी पर निपटारे का बढ़ेगा दबाव

रुचिका चित्रवंशी / नई दिल्ली 07 28, 2019

असुविधाओं से मिलेगी निजात

बिजनेस स्टैंडर्ड एनसीएलटी पर निपटारे का बढ़ेगा दबावसंकटग्रस्त कंपनियों की समाधान योजना लंबे समय तक खिंचने से पेश आने वाली असुविधाओं से निजात मिलती दिख रही है। संसद में ऋण शोधन अक्षमता एवं दिवालिया संहिता (संशोधन) विधेयक पारित होते ही 500 से अधिक दिवालिया मामलों का निपटारा तीन महीने से भी कम समय में करना होगा। ऐसा नहीं होने पर इन मामलों में संबंधित कंपनियों की संपत्तियों की बिक्री एकमात्र विकल्प बचेगा। एमटेक ऑटो, भूषण पावर ऐंड स्टील, ईरा इन्फ्रा इंजीनियरिंग और जेपी इन्फ्राटेक जैसे कुछ बड़े मामलों का समाधान आईबीसी के तहत तय 270 दिनों की अवधि बीतने के बाद भी नहीं हो पाया है। 

लंबी कानूनी पक्रियाओं और अवांछित देरी और इनसे संकटग्रस्त इकाइयों के मूल्य ह्रास से चिंतित कंपनी मामलों के मंत्रालय ने कानूनी विवाद सहित 330 दिनों की नई समय सीमा तय की है। इससे राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) पर मामले तेजी से निपटाने का दबाव बढ़ गया है। इस पूरी कवायद पर शार्दूल अमरचद मंगलदास में सीनियर रिसर्च फेलो प्रतीक दत्ता ने कहा, 'सरकार ने जता दिया है कि वह ऐसे मामले निपटाने में चुस्ती लाना चाहती है। एनसीएलटी के सदस्यों की कार्य क्षमता में भी सुधार किए जाने की जरूरत है।'

आईबीसी (संशोधन) विधेयक संसद में 24 जुलाई को पेश हुआ था। इसमें कहा गया है कि दिवालिया मामले 330 दिनों की समय सीमा (अतिरिक्त अवधि देने की हालत में भी) में निपटाए जाएंगे। इस समय देश में आईबीसी के 1,100 से अधिक मामले चल रहे हैं, जिनमें 362 मामलों का निपटारा 270 दिन बीतने के बाद भी नहीं हो पाया है। इन मामलों के मद्देनजर आईबीसी विधेयक, 2019 में समाधान प्रक्रिया ऋण शोधन अक्षमता एवं दिवालिया संहिता (संशोधन) अधिनियम, 2019 की शुरुआत के 90 दिनों में पूरी किए जाने का प्रस्ताव है।

कॉर्पोरेट प्रोफशनल में पार्टनर मनोज कुमार कहते हैं, 'इनमें कई मामलों में कर्जदाताओं की समिति ने समाधान योजना मंजूर करने या इनकी बिक्री का निर्णय जरूर लिया होगा। जिम्मेदारी अब एनसीएलटी एवं एनसीएलएटी जैसी संस्थाओं की हैं, जहां मामले अटके पड़े हैं।' 

ऋण शोधन अक्षमता बोर्ड ऑफ इंडिया करीब 186 मामले 180 से 270 दिनों के दायरे में हैं, जिन्हें 330 दिनों में निपटाने होंगे। विशेषज्ञों के अनुसार एनसीएलएटी को 330 दिन से अधिक अवधि देने की अनुमति नहीं होगी।   विधेयक के अनुसार एनसीएलटी को 14 दिन के भीतर दिवालिया आवेदन स्वीकार या अस्वीकार करने के लिए कहा गया है और ऐसा नहीं होने पर इसका लिखित कारण बताना होगा। 
Keyword: NCLT, IBC, defaulter,,
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