बिजनेस स्टैंडर्ड - मशीन लर्निंग, कृत्रिम मेधा से आसान होगा बीमारियों पर शोध
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Wednesday, October 16, 2019 08:37 AM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम विशेष खबर

मशीन लर्निंग, कृत्रिम मेधा से आसान होगा बीमारियों पर शोध

तकनीकी तंत्र
देवांग्शु दत्ता /  July 28, 2019

जीवन प्रोटीन और जटिल अणुओं पर निर्भर करता है और ये बहुत से कार्य करते हैं। भिन्न-भिन्न अमीनो अम्ल के आपस में  मिलने से प्रोटीन का निर्माण होता है। त्रिआयामी संरचना में आपस में जुड़े अणु मिलकर अमीनो अम्ल बनाते हैं। इनके गलत मेल से अल्जाइमर, पार्किंसन रोग और मस्तिष्क के गंभीर विकार जैसी कई जटिल बीमारियां हो सकती हैं। यदि हम प्रोटीन निर्माण की प्रक्रिया को समझ लें तो नई दवाइयां बनाने और इस तरह की गंभीर स्थितियों से निपटने में तेजी आएगी। यह शोध क्षेत्र की सबसे बड़ी चुनौतियों में शामिल है। हालांकि प्रोटीन निर्माण के नियम काफी आसान हैं और हम किसी भी दिए गए प्रोटीन में अमीनो अम्ल के क्रम को सूचीबद्ध कर सकते हैं लेकिन त्रिआयामी संरचना में अलग-अलग तरह से इनके जुडऩे की संभावनाएं इतनी अधिक हैं कि सुपर कंप्यूटर की मदद से भी इन्हें सूचीबद्ध करना लगभग नामुमकिन है। करीब 20,000 जीन विभिन्न क्रम में गलत तरीके से क्रमबद्ध हो सकते हैं जिसके चलते अंतिम तौर पर बनने वाला प्रोटीन पूरी तरह अलग हो सकता है। 

 
बहुत से शोधार्थी प्रोटीन की त्रिआयामी संरचना और अमीनो अम्ल के क्रमबद्ध आंकड़े सूचीबद्ध करने के लिए विभिन्न एल्गोरिद्म का उपयोग कर रहे हैं। वे प्रोटीन की संरचना को मापने के लिए एक्स-रे क्रिस्टलोग्राफी और नाभिकीय चुबकत्व अनुनाद जैसी पद्धतियों का भी उपयोग कर रहे हैं। लेकिन यह काफी खर्चीली और मात्र अनुमानों पर आधारित प्रक्रिया है जहां हम वास्तव में यह नहीं जानते कि संबंधित क्रमबद्ध संरचना में अगला क्रम क्या होगा।  कई मामलों में प्र्रोटीन का निर्माण शतरंज, शोगी (शतरंज का जापानी प्रारूप) और गो खेल की तरह होता है। इन खेलों के नियम काफी आसान होते हैं, जिसे एक बालक कुछ ही मिनट में सीख सकता है। अणुओं के मुकाबले शतरंज के खेल में अधिक संभावनाएं होती हैं लेकिन शोगी में शतरंज से भी ज्यादा और गो में शोगी से अधिक संभावनाएं होती हैं। किसी कंप्यूटर प्रोग्राम के जरिये इन खेलों को खेलने के लिए कारगर तरीके की पहचान करना जरूरी होता है। 
 
इस तरह के खेलों के लिए बनाए गए प्रोग्राम का उपयोग प्रोटीन निर्माण की प्रक्रिया के लिए भी किया जा सकता है। डीप माइंड का अल्फा-फोल्ड इसका प्रमाण है। कृत्रिम मेधा (एआई) क्षेत्र की ब्रिटिश कंपनी डीप माइंड ने उस समय काफी हलचल पैदा कर दी जब उसके 'अल्फा' एल्गोरिद्म ने शतरंज, गो और शोगी खेल सीख लिए। वर्ष 2016 में इसे पहली बार प्रतिस्पर्धा में उतारा गया और अल्फा-गो ने विश्व विजेता ली सिडोल को हरा दिया। ज्यादा विकसित करने के उद्देश्य से इसके दूसरे संस्करण अल्फा-जीरो को सामान्य दिशानिर्देश दिए गए और स्वयं को बेहतर बनाने के उद्देश्य से उसने खुद के साथ ही लाखों बार यह खेल खेला। आखिरकार अल्फा-जीरो ने शतरंज तथा शोगी के माहिर खिलाडिय़ों और अल्फा-गो को पराजित कर दिया।
 
डीप माइंड स्वयं सीखने वाले एल्गोरिद्म को दूसरी प्रणालियों के लिए भी विकसित कर रही है। दिसंबर 2018 में इसके प्रोग्राम अल्फा-फोल्ड ने 13वीं क्रिटिकल असेसमेंट ऑफ स्ट्रक्चर प्रडिक्शन (सीएएसपी) नामक प्रतिष्ठित प्रतिस्पर्धा में शीर्ष स्थान हासिल किया था। यह त्रिआयामी प्रोटीन संरचनाओं के अनुमान पर आधारित एक द्विवार्षिक प्रतियोगिता है। इसमें हिस्सा लेने वाले दलों को 90 प्रोटीन के लिए अमीनो अम्ल की रैखिक संरचना दी जाती है और इनकी त्रिआयामी संरचना ज्ञात होने के बावजूद सार्वजनिक नहीं की जाती। किसी भी प्रोटीन के अणुओं की भौतिक विशेषताओं में अमीनो अम्ल के जोड़ों का मिलान, इनके बीच की दूरी और बनने वाले रासायनिक बंध का कोण या झुकाव शामिल होता है। अगर आप इन विशेषताओं की पहचान कर लेते हैं तो संबंधित प्रोटीन की त्रिआयामी संरचना बनाई जा सकती है। 
 
प्रतिभागियों को दी गई जानकारी के आधार पर आए परिणामों का ज्ञात संरचनाओं से मिलान किया जाता है। प्रतियोगिता में पहली बार शामिल होने वाले अल्फा-फोल्ड ने दूसरे 97 नए प्रतियोगियों को बहुत पीछे छोड़ दिया। 90 में से 43 अनुक्रमों के बारे में रैखिक संरचना के अतिरिक्त कोई भी जानकारी उपलब्ध नहीं थी और इनके लिए अल्फा-फोल्ड ने 25 बार सर्वाधिक सटीक अनुमान लगाए।  मैरीलैंड विश्वविद्यालय में कंप्यूटेशनल जीवविज्ञानी और सीएएसपी के मुख्य आयोजनकर्ता डॉ. जॉन मॉल्ट का कहना था कि अल्फा-फोल्ड का प्रदर्शन औसत रहा और वह दूसरे प्रतिभागियों से 15 प्रतिशत अधिक सटीक था। डीप माइंड की टीम ने दो एल्गोरिद्म को और परिष्कृत किया है। अल्फा-फोल्ड जीनोम के आंकड़े और दूसरे प्रोटीन की तुलना करता है जिससे संबंधित अनुक्रम की सबसे निकटतम संरचना का पता लगाया जा सके। यह सभी संरचनाओं की बीच दूरी और उनके बीच बनने वाले रासायनिक बंध के कोण की संभावनाएं भी बताता है। इस पद्धति में कंप्यूटर संसाधनों और अभियांत्रिकी का उपयोग करके विज्ञान के मौलिक सिद्धांतों में योगदान किया जा रहा है। 
 
डीप माइंड के मुख्य कार्याधिकारी डेमिस हैसाबी का कहना है कि यह एक केवल एक शुरुआत है और इसके जरिये शोध के क्षेत्र में महत्त्वपूर्ण परिवर्तन होगा। जैव-रासायनिक क्षेत्र में शिक्षा ग्रहण करने वाले या पारंपरिक फार्मा कंपनियों के बजाए अधिकांश आईटी कंपनियां इस क्षेत्र में आ रही हैं और कृत्रिम मेधा तकनीक की मदद से प्रोटीन के निर्माण का अध्ययन कर रही है। फेसबुक ने भी इस क्षेत्र में शोध कार्य प्रारंभ किया है। शिक्षाविद अल्फा-फोल्ड के प्रदर्शन से काफी चकित हैं और ऐसा लगता है कि अब प्रोटीन निर्माण पर शोध का कार्य एआई तकनीक के हवाले किया जा सकता है। दवाई निर्माण के तरीकों में तेजी लाने और विभिन्न बीमारियों पर अनुसंधान के लिए मशीन लर्निंग और एआई का बड़ा योगदान हो सकता है। 
Keyword: technology, asid, health,,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या बिजली वितरण में फ्रेंचाइजी मॉडल होगा कारगर?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.