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जियो : आगाज से लेकर अव्वल बनने की कहानी

रोमिता मजूमदार और सोहिनी दास / मुंबई July 28, 2019

रिलायंस जियो ने सितंबर 2016 में जब वाणिज्यिक सेवा शुरू की तब सस्ते टैरिफ प्लान के साथ बाजार में वह अवरोध खड़ा करने वाली थी। करीब तीन साल बाद कंपनी पहले पायदान पर पहुंच गई। पिछले साल विलय के बाद ग्राहक संख्या के लिहाज से देश की सबसे बड़ी कंपनी बनने वाली वोडाफोन आइडिया ने जियो इन्फोकॉम के हाथों अपना ताज गंवा दिया। दोनों कंपनियों के जून तिमाही के आंकड़ों के आधार पर देखें तो जियो इस महीने भारती एयरटेल को पीछे छोड़कर दूसरे स्थान पर पहुंच गई। ग्राहक संख्या के लिहाज से अग्रणी कंपनी बनने में जियो को तीन साल लगे।
 
अहम यह है कि जियो ने भारतीय दूरसंचार का परिदृश्य हमेशा के लिए बदल दिया है। ग्राहक हासिल पर ध्यान केंद्रित करने वाली दूरसंचार कंपनियों को जियो की आक्रामक कीमत नीति के कारण राजस्व बाजार हिस्सेदारी पाने के लिए अपनी रणनीति बदलने पर बाध्य होना पड़ा था।  कीमत की यह लड़ाई काफी परेशानी लेकर आई। कई कंपनियां बंद हो गईं और अन्य नुकसान में दब गईं। कुछ साल पहले भारत में करीब एक दर्जन दूरसंचार कंपनियां थीं। पिछले कुछ महीने से वोडाफोन आइडिया लगातार ग्राहक गंवा रही है। कंपनी ने कम कीमत वाले ग्राहकों से दूर होने की खातिर रणनीति में संशोधन किया है, जो उनके नेटवर्क को उलझाए रखते हैं। अप्रैल-जून तिमाही में दूरसंचार कंपनियों ने 1.41 करोड़ ग्राहक गंवाए। जून के आखिर में इनके पास 32 करोड़ ग्राहक थे जबकि जियो के पास 33.13 करोड़ ग्राहक।
 
बाजार का हाल
 
अभी तीन कंपनियां जियो, वोडा-आइडिया और एयरटेल ग्राहक बाजार हिस्सेदारी के लिहाज से करीब-करीब समान रुप से संतुलित हैं। ट्राई के आंकड़ों के मुताबिक, मई में जियो की ग्राहक बाजार हिस्सेदारी 27.8 फीसदी थी, जबकि जियो की 27.6 फीसदी और वोडाफोन आइडिया की 33 फीसदी हिस्सेदारी थी। लेकिन जून के आंकड़ों में वोडा-आइडिया की ग्राहक बाजार हिस्सेदारी में बदलाव दिखेगा, जिसके आंकड़े ट्राई ने अभी जारी नहीं किए हैं। तीनों कंपनियों का ग्राहक आधार इस समय 32 करोड़ से लेकर 33 करोड़ के दायरे में है। ये चीजें दूरसंचार कंपनियों के बीच गहन संघर्ष का एक और दौर शुरू करेगा।
 
ग्रामीण इलाके में संघर्ष
 
जियो यह लड़ाई ग्रामीण इलाकों में ले गई है, जहां इसने काफी हिस्सेदारी पाई है। इस साल जनवरी-मार्च के बीच जियो ने इस इलाके में 1.6 करोड़ ग्राहक जोड़े, जबकि भारती एयरटेल और वोडाफोन-आइडिया ने क्रमश: 2 करोड़ व 1.3 करोड़ ग्राहक गंवाए। चूंकि जियो का इस इलाके में आगे बढऩा जारी है, लिहाजा जनवरी-मार्च 2019 की तिमाही में इंटरनेट का प्रसार भी बढ़ा। ऐसे में ग्रामीण इंटरनेट ग्राहक आधार भी 1.37 करोड़ उछला। पुरानी कंपनियां ग्रामीण बाजार में लगातार ग्राहक गंवा रही हैं क्योंकि वे कम कीमत वाले ग्राहकों से दूर हो रही हैं। इससे ग्रामीण इलाके में शुद्ध रूप से इन कंपनियों के ग्राहकों का नुकसान हुआ है। जनवरी-मार्च के बीच करीब 1.7 करोड़ ग्राहक इनके हाथ से निकल गए। सितंबर 2016 में सेवा शुरू होने के बाद से जियो के ग्राहकों की संख्या बढ़ रही है। फरवरी 2017 में जियो के 10 करोड़ ग्राहक थे।
 
अवरोध खड़ा करने वाली रणनीति
 
कंपनी ने तीन महीने तक डेटा व वॉयस मुफ्त देकर परिचालन शुरू किया था और बाद में इसे तीन महीने और बढ़ा दिया। शुरुआती दौर में जियो के साथ दीवानगी इस तरह की थी कि लोग लाइन में खड़े होकर सिम कार्ड खरीद रहे थे और यहां तक कि जियो नेटवर्क तक पहुंचने के लिए लाइफ ब्रांडेड डिवाइस भी खरीदे। अगस्त 2017 में कंपनी ने ज्यादा लोगों तक पहुंचने के लिए फीचर फोन जियो फोन पेश किया ताकि स्मार्टफोन नहींं खरीदने वाले ग्राहक जियो के एलटीई नेटवर्क से जुड़ सकें। इससे टियरर-2 व टियर-3 सर्किल में कंपनी को बढ़त हासिल हुई। 2016 में उपभोक्ता अपने डेटा व वॉयस कॉल के इस्तेमाल को लेकर मितव्ययी थे। लेकिन साल 2018 में लोग ट्रेन, बस, सड़क किनारे और घरोंं में अपने मोबाइल नेटवर्क पर वीडियो देख रहे हैं। ब्रॉडबैंड ग्राहकों के प्रसार के साथ कुल ग्राहकों में डेटा ग्राहकों की संख्या भारती एयरटेल व वोडाफोन आइडिया की भी बढ़ी है और यह वित्त वर्ष 2019 की पहली तिमाही के 28-33 फीसदी के मुकाबले वित्त वर्ष 2019 की चौथी तिमाही में 41-44 फीसदी पर पहुंच गई। अब जियो का दावा है कि गूगल और फेसबुक के लिए भारत सबसे ज्यादा सक्रिय बाजार बन गया है और परिचालन के पहले वर्ष अनुमानित तौर पर 7 करोड़ लोग जुड़े। सितंबर 2016 में प्रति ग्राहक औसत राजस्व 131 रुपये था, जो मार्च 2019 में 71 रुपये रह गया। इस अवधि में दूरसंचार कंपनियों ने राजस्व में लगातार कमी दर्ज की।
 
आगे की राह
 
विश्लेषकों का लगता है कि जियो वित्त वर्ष 2020 की दूसरी छमाही में टैरिफ बढ़ा सकती है। पिछली छह तिमाहियों से जियो का एआरपीयू लगातार घट रहा है। मार्च तिमाही में यह 122 रुपये था। हाल में कंपनी ने कहा है कि वह ग्राहक जोडऩे पर ध्यान बनाए रखेगी। विश्लेषकों का हालांकि मानना है कि कीमत में सुधार होगा। दूसरी छमाही में जियो कीमतें बढ़ा सकती है। वित्त वर्ष 2018 की दूसरी तिमाही में जियो का एआरपीयू 154 रुपये था। लेकिन वित्त वर्ष 2018 के आखिर में यह घटकर 137.1 रुपये रह गया। एक साल बाद मार्च 2019 में यह 126.2 रुपये रहा। कंपनी का कर्ज हालांकि काफी बढ़ा है क्योंकि उसने नेटवर्क में काफी निवेश किया है। रिलायंस जियो का कर्ज अभी 75,000 करोड़ रुपये है। मार्च तिमाही में कंपनी ने टावर व फाइबर परिसंपत्ति इन्फ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट फंड्स में हस्तांतरित कर अपना कर्ज 91,000 करोड़ रुपये से घटाकर 67,000 करोड़ रुपये पर ला दिया था। भारत में 5जी की नीलामी होनी है, लिहाजा देश की सबसे बड़ी ऑपरेटर होने के नाते जियो को सावधानीपूर्वक योजना बनानी होगी, जब वह टैरिफ बढ़ाकर अपने बड़े ग्राहक आधार का मुद्रीकरण करना चाहती है।
Keyword: reliance jio, telecom,,
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