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खरीदारों को बिल्डरों से फिर करनी होगी सौदेबाजी

तिनेश भसीन /  July 28, 2019

राष्ट्रीय आवास बैंक (एनएचबी) ने आवास वित्त कंपनियों (एचएफसी) को ब्याज छूट योजनाओं की पेशकश से दूर रहने का निर्देश दिया है, जिससे बहुत से खरीदारों को घर खरीदने का अपना फैसला टालना पड़ सकता है। इससे उन घर खरीदारों को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा, जिनके ऋणों की आवास वित्त कंपनियों में कागजी कार्रवाई चल रही है, लेकिन अभी कर्ज नहीं मिला है। दरअसल अब आवास वित्त कंपनियां ऐसे ऋणों के वितरण को ठंडे बस्ते में डाल सकती हैं। उद्योग के सूत्रों का कहना है कि राष्ट्रीय आवास बैंक के निर्देश का तात्कालिक और दीर्घकालिक असर होगा। एक डिजिटल आवास ऋण ब्रोकर स्विचमी के सह-संस्थापक और मुख्य कार्याधिकारी आदित्य मिश्रा ने कहा, 'इसका तात्कालिक असर यह होगा कि अगर आप छूट योजना के तहत कोई घर खरीद रहे हैं और आपका ऋण पहले ही मंजूर हो चुका है तो आवास वित्त कंपनी ऋण वितरण को ठंडे बस्ते में डाल देगी। ऐसे खरीदारों को अपनी खरीद योजना में फेरबदल करना होगा।' 

 
बहुत से लोग ऐसी छूट योजनाओं के जरिये घर खरीदने को काफी आसान पाते हैं। ये छूट योजनाएं ग्राहकों के लिए इसलिए मददगार होती हैं क्योंकि इनकी मदद से वे अपनी वित्त व्यवस्था बेहतर तरीके से कर पाते हैं। यह संभव है कि बहुत से ग्राहक किराये के घर में रह रहे हों और उनके लिए आवास ऋण की मासिक किस्त (ईएमआई) और किराये दोनों का भुगतान करना बड़ा मुश्किल हो। एक प्रॉपर्टी सलाहकार कंपनी लीजेज फोराज के संस्थापक और प्र्रबंध निदेशक पंकज कपूर ने कहा, 'बाजार में बिक्री में जो सुधार आया है, उस पर असर पड़ेगा। अब भी कीमतों और लोगों के वित्तीय बोझ उठाने की क्षमता में अंतर है। ये छूट योजनाएं कुछ हद तक उस अंतर को पाट रही थीं।' कपूर का कहना है कि छूट योजनाओं की पेशकश मुख्य रूप से नई परियोजनाओं और मझोले से लेकर लक्जरी खंड में दी जा रही थीं। किफायती आवास खंड में इन छूटों की पेशकश करने वाले डेवलपरों की तादाद बहुत अधिक नहीं है। 
 
हालांकि राष्ट्रीय आवास बैंक ने आवास वित्त कंपनियों के लिए छूट योजना बंद कर दी है, लेकिन भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की तरफ से यह परिपत्र जारी नहीं किया गया है। इसका मतलब है कि अगर किसी व्यक्ति ने किसी बैंक से ऋण लिया हुआ है तो यह योजना चलती रहेगी। अगर आपकी घर खरीदने की मुहिम अभी चल ही रही है तो आप अपने ऋणदाता को बदलने का फैसला भी ले सकते हैं। रियल एस्टेट क्षेत्र के सूत्रों का कहना है कि उद्योग में मंदी है। वर्तमान खरीदार अपने डेवलपर से अन्य विकल्पों पर भी चर्चा कर सकता है। इस बात की संभावना है कि छूट योजना न होने के कारण डेवलपर और छूट की पेशकश कर दे। अच्छी बैलेंस शीट वाले बहुत से डेवलपरों ने ग्राहकों को लुभाने के लिए छूट योजना का इस्तेमाल मार्केटिंग के हथकंडे के रूप में किया है। ऐसे बेहतर वित्तीय स्थिति वाले डेवलपर ग्राहकों को अन्य विकल्प देने को तैयार होंगे। 
 
बहुत से डेवलपरों ने आवासों को ज्यादा किफायती बनाने के लिए आवास वित्त कंपनियों के साथ ऋण के लिए करार किए हुए थे। ऐसे सौदों में खरीदार संपत्ति की कीमत का 20 फीसदी अग्रिम भुगतान कर देते थे और शेष राशि के लिए ऋण लेते थे। माना जाता है कि एनबीएफसी निर्माण की प्रगति के आधार पर डेवलपरों को कई टुकड़ों में भुगतान करती थीं। जब परियोजना निर्माणाधीन होती थी, तब एनबीएफसी मासिक किस्त के रूप में केवल ब्याज वसूल करती थीं। इसका भुगतान डेवलपर करता था। यह व्यवस्था खरीदारों के लिए मददगार थी क्योंकि निर्माण की अवधि के दौरान उनकी ईएमआई ज्यादा किफायती बन जाती थी। 
 
लेकिन राष्ट्रीय आवास बैंक ने कहा है कि उसे छूट योजनाओं के बारे में बहुत सी शिकायतें मिली हैं। इस नियामक ने कुछ बिल्डरों के कथित धोखाधड़ी करने का भी आरोप लगाया है। बहुत से मामलों में आवास वित्त कंपनियों ने निर्माण की प्रगति के आधार पर भुगतान जारी करने के बजाय डेवलपर को 50 फीसदी निर्माण कार्य पूरा होने पर ही पूरी राशि का भुगतान कर दिया। इस उद्योग के बहुत से सूत्र बताते हैं कि बहुत सी आवास वित्त कंपनियों ने राष्ट्रीय आवास बैंक के इस निर्देश का पालन नहीं किया कि निर्माण की प्रगति के आधार पर बिल्डर को भुगतान किया जाना चाहिए। 
 
अगर कोई डेवलपर डिफॉल्ट कर देता था तो पूरा बोझ कर्ज लेने वाले व्यक्ति पर आ जाता था क्योंकि यह ऋण उसके नाम पर मंजूर होता था। अगर ग्राहक ईएमआई का भुगतान करना बंद कर देता था तो उसका क्रेडिट ब्यूरो स्कोर खराब हो जाता था क्योंकि ऋणदाता उसे एक डिफॉल्टर मानता था। 
Keyword: real estate, property, NHB, HFC,,
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