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लंबा हो कर्ज तभी मिलेगा 3.5 लाख रु. का फायदा

तिनेश भसीन /  July 28, 2019

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस बार के बजट में किफायती मकानों पर अतिरिक्त कर कटौती का फायदा दिया है, लेकिन इसका असली फायदा उन्हीं लोगों को मिल पाएगा, जिन्होंने लंबे समय के लिए कर्ज लिया है। अगर 15 साल से कम अवधि के लिए कर्ज लिया गया है तो कटौती के नए प्रावधानों से कर्ज पर ज्यादा बचत नहीं हो पाएगी। इसकी वजह यह है कि जैसे-जैसे कर्ज घटता जाता है, ब्याज के मद में जा रही राशि भी कम होती जाती है और आयकर कटौती के रूप में बचत भी घटती जाती है। चूंकि नई कर कटौती में संपत्ति की कीमत की अधिकतम सीमा तय कर दी गई है, इसलिए यदि पति-पत्नी ने मिलकर आवास ऋण लिया है तो उन्हें फायदा नहीं होगा।

 
किफायती मकान खरीदने वाला करदाता आवास ऋण पर चुकाए गए ब्याज के एवज में कर कटौती का जो दावा करता था, इस बार के बजट में उसे बढ़ा दिया गया है। इसके लिए सरकार धारा 80ईईए नाम का नया प्रावधान लाई है। यह आवास ऋण के ब्याज पर 2 लाख रुपये तक की कर कटौती का दावा करने का अधिकार देने वाली आयकर अधिनियम की धारा 24 के अलावा है। नए प्रावधान के अनुसार किफायती मकानों के लिए ब्याज पर 1.5 लाख रुपये की अतिरिक्त कटौती मिल सकती है। इस तरह 45 लाख रुपये तक का मकान खरीदने वालों को अब आवास ऋण के ब्याज पर कुल 3.5 लाख रुपये तक की कटौती का लाभ मिल सकता है। मगर नए प्रावधानों में संपत्ति की कीमत की सीमा तो तय की ही गई है, दो नई शर्तें भी लगाई गई हैं। यह लाभ पहला मकान खरीदने वालों को ही मिलेगा और उन्हीं लोगों को मिलेगा, जो 1 अप्रैल, 2019 से 31 मार्च, 2020 के बीच कर्ज लेंगे।
 
झटपट बनाइए इरादा
 
रियल एस्टेट और बैंकिंग उद्योग के अधिकतर विशेषज्ञ मानते हैं कि इस रियायत का फायदा उन लोगों को ज्यादा मिलेगा, जो पहले ही घर खरीदने के बारे में सोच चुके हैं। पैसाबाजार डॉट कॉम में आवास ऋण प्रमुख रतिन चौधरी कहते हैं, 'यदि कोई खरीदार मकान खरीदने का इरादा बना चुका है तो इस फायदे को देखकर वह चालू वित्त वर्ष में ही मकान खरीदने की कोशिश करेगा।' आम तौर पर आवास ऋण लेने पर पहले साल जो भी रकम बैंक को लौटाई जाती है, उसमें 80 फीसदी से ज्यादा हिस्सा ब्याज का होता है और साल-दर-साल ब्याज घटता जाता है। मगर जो शर्तें रखी गई हैं, उन्हें देखते हुए कर्ज लेने वाला किसी भी सूरत में एक वित्त वर्ष के भीतर पूरे 3.5 लाख रुपये की कटौती का फायदा नहीं उठा सकता। बैंक बाजार के मुख्य कार्य अधिकारी आदिल शेट्टïी कहते हैं, 'अतिरिक्त बचत कहीं से भी हो, करदाता के हाथ में रकम बढ़ ही जाती है। लेकिन अगर अधिक कीमत वाले मकानों पर भी यह फायदा दिया जाता तो बेहतर होता। उस सूरत में कर्ज लेने वाले अतिरिक्त कटौती का पूरा फायदा उठा सकते थे।'
 
बजट के आंकड़े समझिए
 
वित्त मंत्री ने अपने बजट भाषण में कहा कि ब्याज पर आयकर में अतिरिक्त कटौती का जो प्रावधान किया गया है, उससे 15 साल तक के कर्ज पर करीब 7 लाख रुपये का फायदा होगा। यह आंकड़ा तब आएगा, जब 45 लाख रुपये के मकान पर 15 साल के लिए कर्ज लिया जाएगा। यदि पूरे 15 साल तक कर्ज चुकाया गया तो धारा 80ईईए के तहत कटौती के जरिये कुल 7 लाख रुपये का आयकर लाभ मिलेगा। जैसे-जैसे मकान की कीमत घटेगी यानी कम कीमत वाला मकान खरीदा जाएगा वैसे-वैसे ही आयकर कटौती वाला लाभ भी कम होता जाएगा। कोई व्यक्ति कितना कर बचाएगा, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि वह किस आयकर स्लैब में आता है और धारा 80सी, 80डी, 80सीसीडी (1) आदि के जरिये वह कितनी कर कटौती का लाभ पहले ही उठा चुका है।
 
संयुक्त स्वामित्व है तो होगा घाटा
 
जो लंबे अरसे के लिए कर्ज लेते हैं, उन्हें इस कटौती का सबसे अधिक फायदा मिलेगा (देखें तालिका)। 20 साल का कर्ज लिया गया तो पहले 12 साल तक इस कटौती का फायदा मिलेगा। मगर 15 साल के कर्ज पर 8 साल, 10 साल के कर्ज पर 5 साल और 5 साल के कर्ज पर केवल 2 साल तक लाभ मिल पाएगा। यदि मकान संयुक्त रूप से यानी दो लोगों के नाम से खरीदा गया है तो नए प्रावधान का फायदा उठा पाना बहुत मुश्किल होगा। अगर दोनों ने बराबर अनुपात में कर्ज लिया है तब तो और भी परेशानी होगी। आयकर अधिनियम के मुताबिक संयुक्त मालिकाना हक होने की सूरत में दोनों मालिकों से हरेक एक वित्त वर्ष में 2 लाख रुपये तक की कटौती का फायदा ले सकता है यानी अधिकतम 4 लाख रुपये तक की आयकर कटौती हो सकती है। भारतीय रिजर्व बैंक के नियमों के मुताबिक बैंक मकान की कीमत की अधिकतम 80 फीसदी तक राशि ही बतौर कर्ज दे सकते हैं। इस तरह 45 लाख रुपये की संपत्ति पर किसी व्यक्ति को अधिकतम 36 लाख रुपये तक का आवास ऋण ही मिल सकता है। अगर ब्याज दर 8.9 फीसदी रही और कुल 20 साल के लिए कर्ज लिया गया तो किसी भी साल में 4 लाख रुपये से अधिक ब्याज नहीं जा सकता। इस तरह संयुक्त मालिकाना हक की सूरत में कोई भी व्यक्ति अधिकतम 2 लाख रुपये की कटौती ले सकता है, 3.5 लाख रुपये की नहीं।
 
निर्माणाधीन संपत्ति में सबसे ज्यादा फायदा
 
धारा 24 के मौजूदा प्रावधानों के मुताबिक मकान खरीदने वाला व्यक्ति तब तक ब्याज कटौती का दावा नहीं कर सकता, जब तक संपत्ति पूरी तरह तैयार नहीं हो जाती यानी उसे ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट नहीं मिल जाता। कर्ज लेने वाले को मकान पर कब्जा लेने के बाद पांच बराबर किस्तों में ब्याज कटौती का दावा करने का मौका मिलता है। लेकिन इस वजह से अक्सर लोग उस समय अधिकतम फायदा नहीं ले पाते, जब मकान बन रहा होता है। मगर सेबी में पंजीकृत निवेश सलाहकार दीपेश राघव कहते हैं, 'धारा 80ईईए के तहत लाए गए नए प्रावधान में इस तरह की कोई बंदिश नहीं है। इसका मतलब है कि कर्ज लेने वाला निर्माणाधीन संपत्ति पर कर्ज में भी ब्याज कटौती का दावा कर सकता है।'
 
मगर हकीकत कुछ और
 
हालांकि सरकार किफायती मकानों के लिए खरीदारों के साथ-साथ डेवलपरों को भी कई तरह की रियायतें दे रही है, लेकिन ज्यादातर परियोजनाएं सरकार द्वारा रखी गई शर्तों पर खरी उतर ही नहीं पातीं। बमुश्किल मु_ïी भर डेवलपरों ने इस तरह के मकान तैयार किए हैं, जो किफायती आवास के लिए 2019 में सरकार द्वारा तय किए गए पैमानों पर खरे उतरते हैं। संपत्ति सलाहकार फर्म एनारॉक से मिले आंकड़ों के मुताबिक 2019 की पहली छमाही में शीर्ष 7 शहरों में कुल 1,39,490 मकान बनकर तैयार हुए। लेकिन इनमें से केवल 39,840 मकान ऐसे थे, जो सरकार के 'किफायती आवास' के मानदंडों को पूरा कर रहे हैं। एनारॉक प्रॉपर्टी कंसल्टेंट्स के चेयरमैन अनुज पुरी का कहना है, 'ब्याज चुकाने पर अतिरिक्त कर कटौती के बजट में मिले तोहफे का लाभ शहरों में बहुत कम लोग उठा पाएंगे।'
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