बिजनेस स्टैंडर्ड - कर समिति चाहती थी कि 6 लाख रुपये तक न लगे कर
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कर समिति चाहती थी कि 6 लाख रुपये तक न लगे कर

अभिषेक वाघमारे / नई दिल्ली July 26, 2019

नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बनी पहली सरकार द्वारा भारत का आयकर कानून फिर से तैयार करने के लिए गठित मूल समिति ने मध्य वर्ग को आंशिक रूप से राहत देते हुए 6 लाख रुपये तक की आमदनी पर कर न लगाए जाने का प्रस्ताव किया था। बहरहाल हर तरह की कर छूट योजनाएं, जैसे धारा 80सी के तहत मिलने वाले लाभ को खत्म करने के बाद यह छूट दिए जाने का प्रस्ताव था। समिति ने 6 से 20 लाख की आमदनी पर 15 प्रतिशत कर और सालाना आमदनी 30 लाख रुपये से ऊपर रहने पर 30 प्रतिशत कर लगाने का प्रस्ताव किया था। 
 
बचत को लेकर समितिन ने ईईटी (छूट-छूट-कर) सिद्धांत की वकालत की थी। इसके तहत पेंशन योजना के संचित कोष और भविष्य निधि को निकालने पर कर का प्रस्ताव किया था, जो कर मुक्त है। रिपोर्ट में संपत्ति कर फिर से पेश किए जाने का प्रस्ताव किया गया था, जो प्रगतिशील कराधान के एक कदम के रूप में लाया गया था। संपत्ति कर के लिए शुद्ध संपत्ति (सकल में से देनदारियां व कर्ज निकालकर) 10 लाख रुपये रखी गई थी, जिसके तहत संपत्ति का मूल्यांकन वित्त वर्ष के अंत मेंं होना था। 
 
सूत्रों ने कहा कि केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड के पूर्व सदस्य अरविंद मोदी द्वारा पेश की गई रिपोर्ट को अंतिम रिपोर्ट के रूप में स्वीकार नहीं किया गया, क्योंकि समिति के कुछ सदस्यों ने आपत्तियां उठाई थीं। बिजनेस स्टैंडर्ड ने उस रिपोर्ट को पढ़ा है। रिपोर्ट के मुताबिक कर के ढांचे को उदार बनाने से व्यक्गित आयकर से आने वाले राजस्व में गिरावट आएगी। लेकिन इसकी भरपाई कॉर्पोरेट कर बढऩे से हो जाएगी और कुल मिलाकर प्रत्यक्ष कर सुधार राजस्व के हिसाब से तटस्थ रहेगा।  यह रिपोर्ट 4 खंडों में है और इसमें 800 से ज्यादा पृष्ठ हैं। इसमें कहा गया है कि पिछले कुछ वर्षों में केंद्रीय बजट मेंं जो आयकर सुधार किए गए हैं, उस अधूरे एजेंडे को पूरा करने की कवायद है। 
 
इसमेंं कहा गया है कि भारत की आर्थिक 'ताकत' प्रत्यक्ष कर में ढांचागत सुधार के अवसर मुहैया कराती है और पूरक के रूप में अप्रत्यक्ष कर सुधार पहले ही किया जा चुका है।  रिपोर्ट में कहा गया है कि वेतन में मिलने वाले प्रोत्साहनों जैसे आवाय का किराया भत्ता (एचआरए) और मेडीक्लेम, बचत के विभिन्न साधनों में निवेश जैसे भविष्य निधि आदि पर एक सीमा तक कर नहीं लगता है (जैसा कि अभी है) को खत्म करके आयकर छूट की सीमा 6 लाख रुपये तक बढ़ाई जा सकती है। 
 
इसके अलावा एक वैकल्पिक पैकेज के रूप में रिपोर्ट में कर ढांचे में कमोवेश कोई बदलाव नहीं किया गया था, जिसमें प्रोत्साहन और विशेष कटौती मौजूदा व्यवस्था की तरह ही थी। इसमें नैशनल पेंशन स्कीम (एनपीएस), सार्वजनिक भविष्य निधि (पीपीएफ) जैसे माध्यमों से हुई बचत की निकासी पर कर का प्रावधान ईईई (छूट-छूट-छूट) के दर्जे की तरह किया गया था, जैसा अभी है। इत्तेफाक से सरकार ने 60 प्रतिशत के आसपास एनपीएस कोष से निकासी पर छूट देकर कर घटा दिया है।  ईईटी व्यवस्था से व्यक्तिगत स्तर पर विशेष खपत से बचा जाएगा, जो पूंजी वर्षों में तैयार की गई है और उसकी खपत व्यक्ति के पूरे जीवनकाल में होगी। रिपोर्ट में कहा गया है कि इसस राष्ट्रीय स्तर पर वृद्धावस्था में नागरिकोंं की सामाजिक सुरक्षा में मदद मिलेगी। 
 
इस मॉडल के प्रस्ताव के मुताबिक व्यक्तियों को इक्विटी होल्डिंग और पूंजीगत लाभ पर कर भुगतान करना होगा। रिपोर्ट में सिफारिश की गई है कि कर प्रशासन के लिए सबसे लिए रिटर्न दाखिल करना अनिवार्य बनाया जाना चाहिए, भले ही आमदनी 6 लाख रुपये से नीचे हो, जो कुछ विशिष्ट शर्तों जैसे संपत्ति के मालिकाने पर निर्भर होगा। तमाम तरह की छूट व प्रोत्साहनों को खत्म किए जाने से अनुपालन सरल होगा और इससे मुकदमे कम होंगे।  इसमें कागज रहित व चेहरा रहित कर आकलन का प्रस्ताव किया गया है, जिस पर पहले से काम हो रहा है। साथ ही गलत आकलन की कार्रवाई होने पर उसके लागत का भुगतान करदाता से लेने का प्रावधान किया गया है। इसे संतुलित करने के लिे इसमें ग्रेडेड ब्याज दरों की सिफारिश की गई है। 
Keyword: income tax, CBDT, आयकर विभाग कराधान,
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