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'उभरती अर्थव्यवस्थाओं में सुरक्षा तंत्र की कमी'

अनूप रॉय / मुंबई July 26, 2019

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर शक्तिकांत दास ने आज कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था 'नए और अस्थिर चरण' की ओर बढ़ रही है जहां 'इसका समाधान बहुत ज्यादा कठिन' होने जा रहा है। उन्होंने कहा कि कारोबारी बातचीत में दबाव के माहौल, भूराजनैतिक टकराव बढऩे और कुछ अर्थव्यवस्थाओं में कर्ज ज्यादा होने और सीमित नीतिगत अवसर होने के कारण कठिनाई ज्यादा है।  उभरते बाजार वाली अर्थव्यवस्थाओं (ईएमई) के लिए यह नकारात्मक है, क्योंकि विकसित अर्थव्यवस्थाओं (एई) में कम ब्याज दर के कारण इन्हें बहुत ज्यादा ढील देनी पड़ रही है। विकसित व उभरते बाजारों की मुद्रा के लेन देन में मजबूत वैश्विक सुरक्षा संजाल न होने के कारण ऐसी स्थिति है। 
 
विकसित अर्थव्यवस्थाओं में समूह के रूप में सामान्य सरकारी कर्ज सकल घरेलू उत्पाद के 100 प्रतिशत से ऊपर चला गया है, जहां राजकोषीय संभावनाएं भी इन तमाम देशोंं में बहुत कम है। नई दिल्ली में 'इंडियाज रिलेशंस विद द इंटरनैशनल मॉनेट्री फंड' नामक पुस्तक के विमोचन के मौके पर गवर्नर ने यह कहा। गवर्नर ने कहा, 'इस समय दुनिया कुछ चुनौतियों से गुजर रही है, जिसका असर अंतराष्ट्रीय संगठनोंं के साथ राष्ट्रीय मौद्रिक और राजकोषीय प्राधिकारियों पर भी पड़ेगा।' उन्होंने कहा, 'हाल के वर्षों में अंतरराष्ट्रीय तालमेल कमजोर हुआ है। तमाम अगड़ी अर्थव्यस्थाएं कम ब्याज दर वाली नीतियों पर जोर दे रही हैं और संभवत: उनके विपरीत प्रभाव पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है।' 
 
रिजर्व बैंक के गवर्नर ने कहा कि हकीकत यह है कि वैश्विक स्तर पर 13 लाख करोड़ डॉलर या अगड़ी अर्थव्यवस्थाओंं की ओर से जारी एक तिहाई बॉन्ड नकारात्मक मुनाफे में चल रहे हैं। इक्विटी प्रीमियम 4 प्रतिशत पार कर गया है, जबकि इसके  दीर्घावधि औसत की तुलना में मानक विचलन ज्यादा है।  गवर्नर ने कहा, 'विकसित अर्थव्यवस्थाओं में कम ब्याज दर पर मुनाफे को लेकर चुनौतियां नजर आ रही हैं।'  वैश्विक ब्याज दरें कम होने के बीच ईएमई में गैर वित्तीय क्षेत्र में कुल कर्ज 2008 में जीडीपी का 107.2 प्रतिशत था, जो मार्च 2018 तक जीडीपी के 194.4 प्रतिशत पर पहुंच गया है, जबकि इसके पहले 2018 के अंत मेंं यह कम होकर 183.2 प्रतिशत था। दास ने कहा कि प्रत्यक्ष एवं पोर्टफोलियो निवेशों के माध्यम से ईएमई में शुद्ध निजी पूंजी प्रवाह संकट की अवधि के बाद करीब दोगुना हो गया है। 
 
उन्होंने भाषण के दौरान कहा, 'इससे कुछ ईएमई के लिए जोखिम की स्थिति हो गई है। इनमें से कुछ को कमजोर बैंक/गैर बैैंक बैलेंस सीट से जूझना पड़ रहा है जबकि कुछ की ऐसी स्थिति बनी है, जो जल्द ही सामने आ सकती है, खासकर जब वैश्विक ब्याज दरोंं का चक्र निर्णायक रूप से बदलेगा।' उन्होंने कहा, 'दुनिया आईएमएफ की ओर देखेगी कि वह कुछ विश्वसनीय समाधान पेश करे। ईएमई को ऐसी नीतियां लानी होंगी, जो व्यापक अर्थव्यवस्था और वित्तीय स्थिरता को समर्थन दें, जबकि वृद्धि पर मुख्य रूप से ध्यान रहे।' 
 
ईएमई को न सिर्फ भुगतान संकट के संतुलन से जूझना होगा बल्कि पूर्ण संकट के झटकों से भी सामना होगा। 2008-09 के वित्तीय संकट के बाद ईएमई और उनके बाजारों को बड़ी मात्रा में फंड मिला, लेकिन इसमें अचानक तेजी और अचानक रोक या पूंजी प्रवाह उलटा होने जैसी स्थिति आई। गवर्नर ने जोर देकर कहा कि ऐसी स्थिति में तेज वैश्विक सुरक्षा संजाल की जरूरत है। दास के मुताबिक ईएमई ने वैश्विक उथल पुथल का असर कम करने के लिए अपना कोष बढ़ाया है, इसके बावजूद इस बात के संकेत हैं कि वित्तीय संकट का जोखिम कोष की तुलना में ज्यादा है। 
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