बिजनेस स्टैंडर्ड - व्हाट्सऐप इस साल शुरू करेगी भुगतान सेवा
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व्हाट्सऐप इस साल शुरू करेगी भुगतान सेवा

नेहा अलावधी /  07 25, 2019

चल रही तैयारी

व्हाट्सऐप पे को यूपीआई पर बनाया गया है
यूपीआई से सभी बैंकों के खाताधारक अपनी नेटबैंकिंग यूजर आईडी या पासवर्ड प्रविष्ट किए बिना स्मार्टफोन से पैसा भेज और प्राप्त कर सकते हैं।
अगर व्हाट्सऐप भारत में स्थानीय डेटा सेंटर बनाती है तो इससे गूगल और एमेजॉन पर भी इसके लिए बनेगा दबाव
गूगल ने पहले कहा था कि वह स्थानीय स्तर पर डेटा संग्रह करने का नहीं करती है समर्थन

बिजनेस स्टैंडर्ड व्हाट्सऐप इस साल शुरू करेगी भुगतान सेवाव्हाट्सऐप इस साल के आखिर तक देश में अपनी भुगतान सेवा शुरू कर देगी। कंपनी के वैश्विक प्रमुख विल कैथकार्ट ने कहा कि व्हाट्सऐप का कारोबारी उपयोग, विशेष रूप से छोटे उद्यमियों के बीच बढ़ाने के बाद अगला कदम सभी उपयोगकर्ताओं को भुगतान सेवा मुहैया कराना होगा। व्हाट्सऐप के जरिये भुगतान सेवा पिछले साल फरवरी में 10 लाख यूजर के लिए परीक्षण के तौर पर शुरू की गई थी। यह सेवा यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) पर आधारित है, जिसे भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम ने बनाया है।

कैथकार्ट ने कहा, 'इस सेवा का मकसद लोगों के लिए व्हाट्सऐप के जरिये पैसा भेजना उतना आसान बनाना है, जितना उनके लिए मैसेज भेजना आसान है। हमारा मानना है कि अगर हमें यह अधिकार मिलता है तो इससे वित्तीय समावेशन को बढ़ावा मिलेगा और भारत की तेजी से बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था में लोगों के जीवन में बड़ा बदलाव आएगा। हम इस साल के अंत तक पूरे देश के अपने उपयोगकर्ताओं को यह सेवा मुहैया कराना चाहते हैं।' 

वह व्हाट्सऐप की नीति आयोग के साथ साझेदारी की घोषणा के मौके पर बोल रहे थे। व्हाट्सऐप ने नीति आयोग की एक पहल वुुमन ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया (डब्ल्यूटीआई) पुरस्कार, 2019 के लिए 1 लाख डॉलर मुहैया कराने का वादा किया है। नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत ने व्हाट्सऐप को भारत में जनहित के कार्यों में मदद देने के लिए प्रोत्साहित किया। कंपनी के देश में 40 करोड़ से अधिक यूजर हैं। फेसबुक के स्वामित्व वाली व्हाट्सऐप भारत में डिजिटल भुगतानों को बढ़ाने पर बड़ा दांव लगा रही है।

सीईओ मार्क जकरबर्ग ने कहा कि कंपनी इस साल अप्रैल में व्हाट्सऐप पे को पूरी तरह लागू करने पर काम कर रही है। इस कदम से कैलिफोर्निया की यह दिग्गज सोशल मीडिया कंपनी एल्फाबेट के गूगल पे, वॉलमार्ट के स्वामित्व वाले फोन पे, एमेजॉन पे और अलीबाबा समर्थित पेटीएम के साथ सीधे मुकाबले में आ जाएगी। इन कंपनियों के बीच पहले ही भारत में डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में दबदबा कायम करने के लिए कड़ा मुकाबला चल रहा है। 

कंपनी के लिए व्हाट्सऐप पे शुरू करना आसान नहीं रहा है। भारतीय सरकार ने व्हाट्सऐप पे सेवा में इस्तेमाल की जाने वाली सत्यापन प्रणाली और भारतीय रिजर्व बैंक के स्थानीय स्तर पर डेटा संग्रह के नियमों की अनुपालना को लेकर चिंताएं जताई हैं। व्हाट्सऐप ने पिछले साल अक्टूबर में कहा था कि उसने भुगतान से संबंधित डेटा को संग्रहित करने के लिए एक स्थानीय सिस्टम बनाया है ताकि आरबीआई के स्थानीय स्तर परे डेटा को संग्रह करने के नियमों की अनुपालना की जा सके।

हालांकि आरबीआई ने इस साल मार्च में उच्चतम न्यायालय में सौंपे हलफनामे में कहा कि व्हाट्सऐप ने अभी उसके स्थानीय स्तर पर डेटा भंडारण के नियमों की अनुपालना नहीं की है। व्हाट्सऐप ने मई में उच्चतम न्यायालय को बताया था कि उसका परीक्षण जुलाई तक पूरा होने की संभावना है और वह आरबीआई के नियमों का पूरी तरह से पालन किए बिना भुगतान सेवाएं शुरू नहीं करेगी।  व्हाट्सऐप इन मसलों को सुलझाने के लिए आरबीआई और अन्य सरकारी मंत्रालयों के साथ बातचीत कर रही है। 

इस बीच कंपनी ने अन्य बाजारों में भी भुगतानों का परीक्षण शुरू कर दिया है।  जकरबर्ग ने इस साल अप्रैल में वित्तीय नतीजों के मौके पर कहा था, 'हम अपनी भुगतान सेवाएं शुरू करने जा रहे हैं। हम यह एक के बाद दूसरे में करेंगे। हम अभी व्हाट्सऐप के लिए भारत में परीक्षण कर रहे हैं। हम अन्य देशों में भी इसे शुरू करने की उम्मीद कर रहे हैं, लेकिन अभी मैं इसकी समयसीमा तय नहीं कर सकता। लेकिन हम इस पर पूरी सक्रियता से काम कर रहे हैं।'

प्रेषक का पता लगाना संभव

सोशल मीडिया कंपनियों के रुख को गलत ठहराते हुए आईआईटी मद्रास के एक प्रोफेसर ने बुधवार को मद्रास उच्च न्यायालय को बताया कि फेसबुक और व्हाट्सऐप जैसे प्लेटफॉर्मों पर साझा किए जाने वाले संदेशों के मूल प्रेषक का पता लगाना तकनीकी रूप से संभव है। प्रोफेसर वी कामकोटी ने न्यायमूर्ति मणिकुमार और न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद के पीठ के समक्ष प्रस्तुति दी। यह पीठ एक जनहित याचिका की सुनवाई कर रहा है।

इसमें कहा गया है कि साइबर अपराधों के मामलों में दोषियों की आसानी से पहचान के लिए प्राधिकरणों को यूजर्स के सोशल मीडिया अकाउंटों के साथ आधार संख्या को लिंक करने का निर्देश दिया जाए। कामकोटी ने व्हाट्सऐप समेत सोशल मीडिया कंपनियों की यह बात खारिज की कि किसी पोस्ट के मूल प्रेषक का पता नहीं लगाया जा सकता है क्योंकि ऐप्लीकेशन के जरिये भेजे जाने वाले सभी मेसेज एनक्रिप्टेड होते हैं। कामकोटी ने कहा कि किसी मेसेज के साथ पहचान टैग को जोडऩा तकनीकी रूप से संभव है। इसके बाद पीठ ने प्रोफेसर और उनकी टीम को अपने विचार एक रिपोर्ट के रूप में 31 जुलाई तक पेश करने को कहा ताकि सोशल मीडिया कंपनियां उस पर अपनी प्रतिक्रिया दे सकें। पीठ ने मामले की सुनवाई 31 जुलाई तक टाल दी है।

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