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उपभोग से जुड़े शेयरों पर विश्लेषक सतर्क

पुनीत वाधवा / नई दिल्ली July 24, 2019

अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने में उपभोक्ता क्षेत्र की अहमियत रही है और इससे संबंधित शेयर एक्सचेंजों को आगे बढ़ाते् रहे हैं, लेकिन साल 2019 में भारत में उपभोग की कहानी मुश्किल में फंसी नजर आ रही है। नरेंद्र मोदी की अगुआई में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन को आम चुनाव में मजबूत जनादेश मिलने के बाद काफी उम्मीद थी कि इस साल का बजट अर्थव्यवस्था को बहाल करने में मदद करेगा। हालांकि बजट में घोषित प्रस्ताव को काफी सुस्त प्रतिक्रिया मिली। 5 जुलाई को बजट पेश होने के बाद से निफ्टी कंज्मप्शन इंडेक्स करीब 5.7 फीसदी फिसला है जबकि निफ्टी-50 में 5 फीसदी की गिरावट आई है। इस साल अब तक निफ्टी कंज्मप्शन इंडेक्स 9.4 फीसदी टूटा है जबकि निफ्टी-50 इंडेक्स में करीब 3.8 फीसदी की फिसलन हुई है। 
 
विश्लेषकों ने कहा, गैर-बैंक वित्तीय कंपनियों ने अर्थव्यवस्था के उन क्षेत्रों को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है, जहां बैकों से मदद नहीं मिलती। उन्होंने कहा कि परिचालन स्तर पर इनमें आई गिरावट ने अर्थव्यवस्था की रफ्तार को नुकसान पहुंचाया है और विश्लेषकों को लग रहा है कि उपभोग में मंदी कुछ और समय तक बनी रह सकती है। आईएमएफ ने भी कमजोर मांग का हवाला देते हुए भारत की आर्थिक रफ्तार के अनुमान में 0.3 फीसदी की कटौती कर साल 2019-20 के लिए 7 फीसदी कर दिया है।
 
फिलिप कैपिटल की अंजलि वर्मा और नीरज चडवार ने हालिया रिपोर्ट में कहा है, उच्च आधार, रोजगार के अभाव, नकदी के अभाव (कर अनुपालन पर सरकार का जोर) के साथ-साथ भविष्य में बेहतर आय का भरोसा तेजी से धुंधला हो रहा है, ऐसे में मांग/उपभोग सुस्त बना रह सकता है। यह मांग व उपभोक्ता के भरोसे को और सीमित करेगा। ग्रामीण भारत में सरकारी खर्च वहां की सामाजिक सेहत में सुधार के लिहाज से सकारात्मक है। हालांकि यह उपभोग की बढ़त मेंं परिणत नहीं होगा क्योंकि तुलनात्मक आधार पहले ही काफी ज्यादा है और सरकारी खर्च में बढ़ोतरी बहुत ज्यादा नहीं हो रही।
 
कंपनी के स्तर पर नजर डालें तो देश की सबसे बड़ी एफएमसीजी कंपनी हिंदुस्तान यूनिलीवर ने अप्रैल-जून तिमाही 2019 में पिछली सात तिमाहियों में बिक्री (वॉल्यूम) में सबसे कम बढ़ोतरी दर्ज की है। दूसरी ओर, उपभोग व आर्थिक समृद्धि को मापने वाला एक अन्य पैमाना वाहन क्षेत्र भी मुश्किल मेंं है और इसकी बिक्री पिछले कई महीने से लगातार घट रही है। एक्विरस सिक्योरिटीज के विश्लेषकोंं ने हालिया रिपोर्ट में कहा है, अभी उपभोक्ता क्षेत्र ऐसे चरण से नहीं गुजर रहा है जहां वॉल्यूम में बढ़ोतरी आगामी तिमाहियों में संभावित चुनौतियों के दौर में हो सकती है। कंज्यूमर स्टेपल्स, वाहन, क्विक सर्विस रेस्टोरेंट्स और आभूषण पहले ही कई तरह की चुनौतियोंं से जूझ रहे हैं। हमारा मानना है कि मौजूदा मंदी टिकाऊ उपभोक्ता क्षेत्र पर शायद अपनी पकड़ मजबूत बना सकती है।
 
शेयरों की बात करें तो महिंद्रा ऐंड महिंद्रा, टीवीएस मोटर कंपनी, मारुति सुजूकी इंडिया और हीरो मोटोकॉर्प, गोदरेज कंज्यूमर प्रॉडक्ट्स, कोलगेट पामोलीव, ब्रिटानिया इंडस्ट्रीज, एवेन्यू सुपरमाट्र्स, यूनाइटेड स्पिरिट्स और एचयूएल इस साल अब तक के आधार पर निफ्टी कंज्मप्शन इंडेक्स में गंवाने वालों में सबसे आगे है। अल्पावधि की चुनौतियों और आय में सुस्त बढ़ोतरी के बीच शेयर कीमतों में आगे और गिरावट की संभावना के बावजूद विश्लेषक उपभोक्ता क्षेत्र को लेकर सतर्क हैं और निवेशकों को सिर्फ लंबी अवधि के नजरिये से खरीदारी की सलाह दे रहे हैं।
 
मोतीलाल ओसवाल फाइनैंंशियल सर्विसेज के शोध प्रमुख गौतम दुग्गड़ ने कहा, अल्पावधि से मध्यम अवधि में मंदी के संकेत हैं। रणनीति के तौर पर निवेशक तीन साल के नजरिये से इन शेयरों की खरीदारी करें और अगर वे सिर्फ तीन से छह महीने निवेशित रहना चाहते हैं तो इनसे दूर रहें। हमें एचयूएल, पिडिलाइट, टाइटन और मैरिको पसंद हैं। 
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