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सीआरए के अधिकारियों के खिलाफ सेबी करेगा कार्रवाई

श्रीमी चौधरी / नई दिल्ली 07 23, 2019

क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों के जिन वरिष्ठï अधिकारियों पर इन्फ्रास्ट्रक्चर लीजिंग ऐंड फाइनैंशियल सर्विसेज (आईएलऐंडएफएस) के पूर्व शीर्ष अधिकारियों से मिलीभगत का संदेह है उनपर नियामक का शिंकजा कस सकता है। फोरेंसिक ऑडिट में यह बात सामने आई है कि कंपनी को अच्छी रेटिंग देने के लिए इन्होंने कंपनी के अधिकारियों के साथ सांठगाठ की थी। सूत्रों के मुताबिक नियामक सभी पांच क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों से स्पष्टïीकरण मांग रहा है और उन्हें कथित त्रुटियों और आईएलऐंडएफएस के शीर्ष अधिकारियों के साथ संभावित सांठगाठ करने को लेकर जवाब दाखिल करने के लिए कहा है। 

इस मामले के जानकार नियामक के एक अधिकारी ने कहा, 'ये आरोप संगीन हैं और ऑडिटरों द्वारा उठाए गए प्रत्येक पहलू की गहन जांच किए जाने की जरूरत है। इस दौरान यह अहम है कि जिन लोगों की भूमिका संदेह के घेरे में हैं उन्हें किनारे किया जाएगा या जांच पूरी होने तक उन्हें अनिश्चितकालीन छुट्टी पर भेजा जा सकता है।'  आईएलऐंडएफएस के नए बोर्ड ने संदेह के घेरे में आए आईएलऐंडएफएस समूह का फॉरेंसिक ऑडिट करने के लिए ग्रांट थ्रांटन को नियुक्त किया था। उसने बोर्ड को अपनी रिपोर्ट सौंप दी है जिसमें इंडिया रेटिंग्स, ब्रिकवर्क रेटिंग्स, इक्रा और केयर के उन प्रमुख अधिकारियों का नाम दिया है जिन पर कमजोर वित्तीय स्थिति के बावजूद लगातार अच्छी रेटिंग्स देने के लिए कथित तौर पर मिलीभगत करने और उपहार ग्रहण करने का आरोप है।

सेबी के निर्देश के मुताबिक दो रेटिंग एजेंसियों इक्रा और केयर के मुख्य कार्याधिकारियों को पहले ही जांच पूरी होने तक छुट्ïटी पर भेजा जा चुका है। सूत्र ने कहा, 'रेटिंग प्रक्रियाओं में बिना छेड़छाड़ किए लगातार पांच वर्ष तक अच्छी रेटिंग नहीं दी जा सकती है। इसके अलावा ये केवल त्रुटि भर नहीं है क्योंकि ऐसा प्रतीत होता है कि इस काम को सुनियोजित तरीके से अंजाम दिया गया है।' सूत्र ने आगे कहा कि ऑडिट रिपोर्ट में यह रेखांकित किया गया है कि आईएलऐंडएफएस समूह के वरिष्ठï प्रबंधन और रेटिंग एजेंसियों के वरिष्ठï अधिकारियों के बीच हुए ईमेल संवाद से स्पष्टï रूप से पता चलता है कि उन्हें समूह की नकदी संकट के बारे में पता था। 

रिपोर्ट में कई उदाहरण दिए गए हैं जहां सीआरए ने प्रारंभ में रेटिंग घटाने का निर्णय लिया था लेकिन आईएलऐंडएफएस के तत्कालीन प्रमुख अधिकारियों ने तिकड़म कर और सीआरए के अधिकारियों को लालच व उपहार देकर या तो लगतार अच्छी रेटिंग्स प्राप्त की या रेटिंग में गिरावट नहीं करने दिया। ग्रांट थ्रांटन ने कहा कि ऐसा लगता है कि सीआरए ने जुलाई/अगस्त 2018 में जब वाणिज्यिक पत्रों के पुनर्भुगतान में चूक करने के कारण आईटीएनएल की रेटिंग पहली बार घटाई थी उससे पहले सालों तक अच्छी रेटिंग देती रही या फिर उसे बनाए रखी।

समीक्षा अवधि के दौरान आईएलऐंडएफएस समूह ने क्रिसिल, केयर रेटिंग्स, इक्रा, इंडिया रेटिंग्स (फिच समूह की कंपनी) और ब्रिकवर्क की सेवाएं ली थी। ग्रांट थ्रांटन ने कहा कि उसने 2008 से 2018 के बीच कई ईमेल की पहचान की है जिससे पता चलता है कि आईएलऐंडएफएस समूह दबाव में था या 2015 से नकदी समस्या से जूझ रहा था। विशेष ऑडिट में यह पता चला है कि आईएलऐंडएफएस और केयर के बीच एक संभावित हितों का टकराव हुआ था क्योंकि 2007 से 2013 के बीच आईएलऐंडएफएस लिमिटेड और आईएफआईएन ने रेटिंग एजेंसी में करीब 5-9 फीसदी इक्विटी हिस्सेदारी खरीदी थी।

उसी अवधि के दौरान केयर ने आईएफआईएन के उपकरण समूह, आईटीएनएल और आईएलऐंडएफएस लिमिटेड को रेटिंग्स भी दी थी जिससे हितों के संभावित टकराव के संकेत मिलते हैं क्योंकि केयर अपने इक्विटी शेयरधारकों की रेटिंग कर रही थी। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) भी इस मामले की जांच कर रही है और उसने भी अपनी जांच में पाया था कि रेटिंग एजेंसियों द्वारा दी गई रेटिंग में सुधार करने के लिए आईएलऐंडएफएस के वरिष्ठï प्रबंधन की ओर से हस्तक्षेप किए जाने के बाद कई मौकों पर समूह की कंपनियों की रेटिंग में बदलाव किया गया था।

रेटिंग एजेंसियों के अधिकारियों ने अपने स्तर पर किसी भी त्रुटि से इनकार किया है और कुछ ने यहां तक कहा है कि अंतरिम रिपोर्ट से पता चलता है कि उन्हें रेटिंग प्रक्रिया की सीमित जानकारी है और यह एकतरफा सूचना पर आधारित है। आईएलऐंडएफएस समूह की कंपनियों द्वारा गंभीर चूक किए जाने और उसका कर्ज 90,000 करोड़ रुपये पर पहुंच जाने के बाद पिछले वर्ष अक्टूबर में एक नए बोर्ड की नियुक्ति की गई थी। नियामकों और प्रवर्तन एजेंसियां द्वारा प्रारंभिक जांच के बाद पूर्व शीर्ष प्रबंधन जांच के घेरे में आ गया था। 
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