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वर्ष 2019 का बजट बदलाव का प्रतिमान

राजीव कुमार /  July 23, 2019

इस बजट ने सभी आशंकाओं को निर्मूल करते हुए यह माना है कि अर्थव्यवस्था में परिसंपत्ति निर्माण करने में निजी क्षेत्र अत्यधिक महत्त्वपूर्ण कारक है। विस्तार से बता रहे हैं राजीव कुमार 

 
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के पहले बजट को आने वाले दिनों में आर्थिक गतिविधियों की गति और उनकी प्रकृति में जबरदस्त बदलाव लाने वाले बजट के रूप में देखा जाएगा। उनके बजट भाषण में निजी निवेश को लेकर अत्यधिक सकारात्मक रुख देखने को मिला और देश की अर्थव्यवस्था को 5 लाख करोड़ रुपये के लक्ष्य तक पहुंचाने की दिशा में इस क्षेत्र की भूमिका को मुखर ढंग से स्वीकार किया गया। बजट में निजी निवेश को बढ़ावा देने वाले कई उपाय शामिल किए गए हैं। यहां सरकार की भूमिका सहायक की रहेगी और वह निजी निवेश को ज्यादा आकर्षक और व्यवहार्य बनाने के क्रम में आने वाले जोखिम साझा करने की इच्छाशक्ति भी दिखाएगी।
 
इनमें से कुछ उपायों का विस्तार से ब्योरा देने के पहले मैं दो ऐसी बातों का जिक्र करना चाहूंगा जो निजी निवेश आधारित वृद्धि नीति की पूर्व शर्त की तरह हैं। पहली बात, यह जरूरी है कि अफसरशाही खुले दिल से इस रुख को स्वीकार करे और बजट में शामिल पहलों को लागू करने में सक्रिय भूमिका निभाए। उदाहरण के लिए यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि विनिवेश के ऊंचे लक्ष्य हासिल किए जा सकें। रेलवे में निजी-सार्वजनिक भागीदारी अमल में आए और एमएसएमई को ऋण की बेहतर सुविधा मिले और बजट में की गई घोषणा के अनुरूप उन्हें ब्याज में दो फीसदी की छूट मिले। इसके लिए शासन व्यवस्था में और सुधार लाना होगा और प्रदर्शन के आकलन के लिए उत्पादन-निष्कर्ष आधारित व्यवस्था लागू करनी होगी। बजट दस्तावेजों में पहली बार उन सभी शासकीय योजनाओं के लिए उत्पादन-निष्कर्ष प्रदर्शन आकलन ढांचे की बात शामिल की गई है, जिनका आवंटन 500 करोड़ रुपये से अधिक है।
 
दूसरी पूर्व शर्त है सरकार और उन अंशधारकों के बीच भरोसे का रिश्ता कायम करना, जिनकी देश की आर्थिक गतिविधियां बढ़ाने में अहम भूमिका होनी है। आजादी के तत्काल बाद के दौर में ऐसा भरोसा देखने को मिलता था लेकिन सन 1970 और 1980 के दशक में यह भरोसा टूट गया क्योंकि सरकार ने सार्वजनिक उपक्रमों को खूब बढ़ावा दिया। इस दौरान देश में लाइसेंस और इंसपेक्टर राज कायम हो गया जिसने सरकार और कारोबारी जगत के बीच की संबंधों को सहयोगात्मक रिश्तों से संरक्षक और ग्राहक के रिश्ते में तब्दील कर दिया। रिश्ते में भरोसा वैश्विक बाजार में हिस्सेदारी बढ़ाने और मेक इन इंडिया को सफल बनाने के लिए अनिवार्य है। बजट में यह चिह्नित किया गया है कि निजी निवेश आधारित वृद्धि के लिए सरकार को लंबी अवधि की बुनियादी परियोजनाओं का कुछ जोखिम साझा करना होगा। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए निजी निवेशकों को हवाई अड्डों, राजमार्ग, गैस पाइपलाइन तथा दूरसंचार क्षेत्र की बुनियादी परियोजनाओं का काम सौंपा जा सकता है। इससे बुनियादी क्षेत्र में निजी निवेश जुटाने में मदद मिलेगी। इस क्षेत्र में अगले पांच वर्ष तक सालाना करीब 20 लाख करोड़ रुपये के निवेश की आवश्यकता है। तभी हम बुनियादी ढांचा क्षेत्र की कमियों को पूरा कर पाएंगे।
 
बजट में यह घोषणा भी की गई कि उन क्षेत्रों में निजी निवेश जुटाया जाएगा जिनमें अब तक सार्वजनिक क्षेत्र का एकाधिकार माना जाता था। उदाहरण के लिए भारतीय रेल और रक्षा उत्पादन। बजट अनुमान के मुताबिक रेलवे को बुनियादी सुविधाओं और आधुनिकीकरण के लिए अगले 10 वर्ष में करीब 50 लाख करोड़ रुपये की आवश्यकता है। अगर यह बुनियादी उन्नयन हो सका तो भारतीय रेल माल भाड़े और यात्री परिवहन में अपनी हिस्सेदारी वापस जुटा लेगी। बीते दशकों में इन क्षेत्रों में उसकी हिस्सेदारी कम हुई है। बजट में यह भी कहा गया कि ऐसा भारी निवेश ट्रैक की अधोसंरचना, रेलवे रॉलिंग स्टॉक और माल और यात्री परिवहन के क्षेत्र में निजी सार्वजनिक भागीदारी को बढ़ावा देकर ही किया जा सकता है। इसी तरह घरेलू स्तर पर उत्पादित महत्त्वपूर्ण उपकरणों की हिस्सेदारी बढ़ाने में भी निजी निवेश की आवश्यकता होगी। 
 
निजी उपक्रमों को बढ़ावा देने के क्रम में बजट यह घोषणा भी की गई कि 400 करोड़ रुपये से कम के कारोबार वाली कंपनियों को केवल 25 फीसदी कॉर्पोरेट कर देना होगा। यह प्रावधान अब देश के 99.3 फीसदी उपक्रमों पर लागू होगा। केवल 0.7 फीसदी कंपनियों को 34 फीसदी की उच्च ब्याज दर चुकानी होगी। पहले यह रियायत केवल 250 करोड़ रुपये तक के कारोबार वाली कंपनियों को थी। इसी प्रकार जो एमएसएमई वस्तु एवं सेवा कर के अधीन पंजीकृत हैं उन्हें तमाम नए और वृद्धिकारी ऋण के लिए ब्याज में दो फीसदी की रियायत मिलेगी। स्टार्टअप द्वारा पहली और दूसरी श्रेणी के वैकल्पिक निवेश फंडों को जारी शेयरों को भी आयकर निगरानी के दायरे से बाहर किया जा सकता है। ऐंजल टैक्स से संबंधित मसलों को भी हल किया गया है।
 
निजी उपक्रमों को बढ़ावा देने का सरकार का लक्ष्य चालू वित्त वर्ष के लिए 1.05 लाख करोड़ रुपये की विनिवेश योजना में भी परिलक्षित होता है। इसके साथ ही सरकार ने यह घोषणा भी की कि वह रणनीतिक विनिवेश के लक्ष्य को हासिल करने के लिए सार्वजनिक उपक्रमों में अपनी हिस्सेदारी 51 फीसदी से कम करने के लिए तैयार है। बजट ने इस बात को दोहराया कि सरकार न केवल एयर इंडिया बल्कि उन सभी अन्य सार्वजनिक उपक्रमों के रणनीतिक निजीकरण के लिए प्रतिबद्ध है जिनके रणनीतिक निजीकरण से लाभ हो सकता है।
 
अनिवासी भारतीयों की बात करें तो बजट में केवाईसी मानकों को शिथिल करने की बात कही गई है। उनको विदेशी पोर्टफोलियो निवेश की मदद से भारत में निवेश सुविधा देने की बात भी कही गई है। इससे अनुपालन की दिक्कत कम होगी। प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की आवक की बात करें तो एकल ब्रांड खुदरा, नागरिक उड्डयन, मीडिया और बीमा क्षेत्र में इन्हें उदार बनाने की बात बजट में शामिल है। बीमा क्षेत्र की मध्यस्थ कंपनियों में 100 फीसदी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की बात कही गई है। बजट सरकार के निजी निवेश और उद्यमों के माध्यम से आर्थिक वृद्धि को गति देने के इरादे को साफ जाहिर करता है। ऐसे में अब यह संदेह दूर हो जाना चाहिए कि सरकार निजी उद्यमों को अर्थव्यवस्था में मूल्य और परिसंपत्ति वर्धन का माध्यम नहीं मानती। सरकार सामाजिक और भौतिक बुनियादी ढांचा निभाने की अपनी भूमिका निभाती रहेगी और समावेशन और सुदृढ़ीकरण से जुड़े कदम उठाती रहेगी। दुनिया भर में हमने ऐसे दृश्य देखे हैं जहां निजी क्षेत्र के नेतृत्व में वृद्धि को गति मिली है और हाशिये के लोगों का बेहतर समावेशन संभव हुआ है। इसके साथ ही वृद्धि और पर्यावरण संरक्षण भी सुनिश्चित हुआ है। 
 
(लेखक नीति आयोग के उपाध्यक्ष हैं।)
Keyword: nirmala sitaraman, economy, budget,,
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