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ओयो सौदे की प्रक्रिया को लेकर असमंजस

नेहा अलावधी / नई दिल्ली July 22, 2019

रितेश अग्रवाल द्वारा होटल एग्रीगेटर ओयो में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाकर 30 प्रतिशत किए जाने के बाद उद्योग के जानकार और विश्लेषक मौजूद कुछ जानकारियों के साथ इस सौदे की विशेषताओं का विश्लेषण करने की कोशिश कर रहे हैं। इस नए निवेश को 2-3 साल में अमेरिका में कंपनी को सूचीबद्घ कराने की बड़ी योजना के हिस्से के तौर पर देखा जा रहा है। इस सौदे के तहत संस्थापक ने ओयो में अपने पिछले निवेशकों से हिस्सेदारी खरीदी है। शुक्रवार को अग्रवाल ने आरए हॉस्पिटैलिटी होल्डिंग्स (केमैन) के जरिये 2 अरब डॉलर का प्राथमिक एवं माध्यमिक प्रबंधन निवेश सौदा किया। इस सौदे को वैश्विक संस्थागत बैंकों और उनके वित्तीय भागीदारों का समर्थन हासिल है। उन्होंने शुरुआती निवेशकों लाइटस्पीड वेंचर पार्टनर्स और सिकोइया इंडिया से शेयर खरीदे हैं। कंपनी ने कहा है कि ये निवेशक स्टार्टअप के समर्थक बने रहेंगे। सौदे का आकार लगभग 10 अरब डॉलर का है।
 
गुरुग्राम स्थित कंपनी में ओयो के सबसे बड़े निवेशक सॉफ्टबैंक की 46 प्रतिशत हिस्सेदारी पहले से ही है। हालांकि कई ऐसे सवाल हैं जिन्हें लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। एक शेयर ब्रोकर विश्लेषक ने नाम नहीं छापने के अनुरोध के साथ कहा, 'आपको यह समझना चाहिए कि किस तरह से रितेश ने इतनी बड़ी रकम कैसे जुटाई, या क्या उन्होंने इसके लिए उधार लिया, यह निवेश करने के लिए उन्होंने केमैन स्थित इकाई को क्यों चुना, जबकि उनकी ज्यादातर आय भारत से आती है।' कई विश्लेषकों का मानना है कि सौदे की संरचना संस्थापकों द्वारा सामान्य तौर पर अपनाए जाने वाले तौर-तरीकों से अलग है। टेक्नोपैक के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक अरविंद सिंघल ने कहा, 'यह निश्चित तौर पर एक आसान रास्ता है, इसमें ऐसा कोई उदाहरण नहीं है, जिसके बारे में मैं सोच सकता हूं। कॉलेटरल के बजाय अपनी स्वयं की इक्विटी के लिए आपको रकम उधार देना किसी के लिए असामान्य है। मुझे यह कोई आदर्श नहीं लगता।'
 
अन्य विश्लेषकों का कहना है कि सौदा यह सुनिश्चित करेगा कि अग्रवाल अपनी हिस्सेदारी सस्ते में वापस खरीदने से पीछे नहीं हटते। ओयो अमेरिका में अभी शुरुआती अवस्था में है और वहां उसने इस साल के शुरू में अपना परिचालन शुरू किया है और सूचीबद्घ होने की योजना बनाई है। इसे देखते हुए अग्रवाल शुरुआती निवेशकों से हिस्सेदारी की पुनर्खरीद कर सही कदम उठा रहे हैं। पिछले साल ओयो ने खुलासा किया था कि उसने सॉफ्टबैंक के विजन फंड के साथ साथ मौजूदा निवेशकों सिकोइया, लाइटस्पीड और ग्रीनोक्स कैपिटल से 80 करोड़ डॉलर की पूंजी जुटाई। मीडिया की खबरों के अनुसार, सॉफ्टबैंक इस  होटल एग्रीगेटर में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की संभावना तलाश रही है। कंपनी के नियम सॉफ्टबैंक को अग्रवाल और सबसे बड़े अल्पांश निवेशकों लाइटस्पीड तथा सिकोइया की सहमति के बिना हिस्सेदारी 50 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ाने की अनुमति नहीं देते हैं। 
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