बिजनेस स्टैंडर्ड - बिल्डरों की लुभावनी योजनाओं से बचने की सलाह
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बिल्डरों की लुभावनी योजनाओं से बचने की सलाह

सोहिनी दास और करण चौधरी / मुंबई/बेंगलूरु 07 22, 2019

राष्ट्रीय आवास बैंक की सलाह

एनएचबी ने कहा, बिल्डरों की ब्याज रियायत योजना के तहत कर्ज देने से परहेज करें आवास वित्त कंपनियां
ऐसी योजना में कुछ समय तक खरीदार 20 फीसदी कर्ज पर ब्याज का भुगतान करते हैं जबकि शेष कर्ज पर ब्याज बिल्डर चुकाते हैं
धोखाधड़ी की शिकायतें मिलने पर नियामक ने उठाया यह कदम

बिजनेस स्टैंडर्ड बिल्डरों की लुभावनी योजनाओं से बचने की सलाहराष्ट्रीय आवास बैंक (एनएचबी) ने आवास वित्त कंपनियों को परामर्श जारी कर ऐसे कर्ज देने से परहेज करने को कहा है जिसमें कर्जदाताओं की ओर से लिए गए कर्ज का बिल्डरों द्वारा इस्तेमाल किया जाता है। एनएचबी के इस कदम से संकट में फंसे रियल एस्टेट क्षेत्र की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। उद्योग के जानकारों का कहना है कि वित्तपोषण की लागत बढऩे से नई परियोजनाओं तथा मुंबई महानगरीय बाजार में रियल एस्टेट पर असर पड़ेगा। हीरानंदानी कम्युनिटीज के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक निरंजन हीरानंदानी ने कहा कि बाजार में पहले से ही नकदी की किल्लत है और इस कदम से परियोजनाओं का वित्तपोषण और प्रभावित होगा।

एनएचबी का कहना है कि आवास ऋण से संबंधित बिल्डर/डेवलपर द्वारा दी जा रही ब्याज रियायत योजना के संबंध में कई शिकायतें मिल रही हैं। परिपत्र में कहा गया है, 'कुछ बिल्डरों द्वारा ब्याज रियायत योजना का इस्तेमाल कर कथित तौर पर धोखाधड़ी करने के मामले भी एनएचबी के संज्ञान में आए हैं।'

हीरानंदानी ने कहा, 'जहां तक धोखाधड़ी पर रोक की बात है तो निश्चित तौर पर यह स्वागत योग्य कदम है। लेकिन इससे परियोजना के लिए पैसे जुटाना कठिन हो जाएगा।' उन्होंने कहा कि नकदी की किल्लत की वजह से ऐसे डेवलपर दिवालिया होने के कगार पर पहुंच गए हैं जिनकी परियोजनाएं अटकी हैं या फिर उनमें देरी हो रही है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि ऐसी योजनाओं में धोखाधड़ी पर निश्चित तौर पर रोक लगनी चािहए।

पिछले पांच वर्षों से खरीदारों को आकर्षित करने के लिए रियायत योजना का चलन तेजी से बढ़ा है। बिल्डरों की ओर से बड़े पैमाने पर ऐसी योजनाएं लाई गई हैं। उदाहरण के तौर पर कुछ साल के लिए मकान खरीदारों को अपने कर्ज के 20 फीसदी पर ब्याज देना होता है जबकि शेष 80 फीसदी कर्ज पर बिल्डर ब्याज चुकाते हैं। विश्लेषकों का कहना है कि अभी मांग में सुधार लाने की जरूरत है लेकिन इस कदम से बाजार की धारणा पर प्रतिकूल असर पड़ेगा। उनका मानना है कि नई परियोजनाएं, खास तौर पर महानगरों में आने वाली परियोजनाएं इससे प्रभावित होंगी। नाइट फ्रैंक इंडिया के कार्यकारी निदेशक गुलाम जिया ने कहा कि रियायत योजना प्रतिष्ठित बिल्डरों द्वारा लाई जा रही हैं और इन पर ऋणदाताओं को भी पूरा भरोसा होता है।

जिया का अनुमान है कि शीर्ष 8 शहरों में करीब 10 से 12 फीसदी आवास ऋण बाजार ब्याज रियायत योजना के जरिये संचालित होता है। उन्होंने कहा, 'निर्माणाधीन परियोजनाओं में खरीदारों को आकर्षित करने के लिए डेवलपरों द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली यह सबसे अहम योजना है। ऐेसे में इस तरह की योजना के अभाव से महागनरों में बिक्री घट सकती है।' उन्होंने कहा कि हाल के समय में तैयार परियोजनाओं के लिए भी ब्याज रियायत योजना लाई गई है। एनएचबी के नए निर्देश से बाजार में बिक्री प्रभावित हो सकती है। आवास नियामक ने आवास ऋण को सख्ती से निर्माण के चरणों के साथ जोडऩे और निर्माणाधीन परियोजनाओं के लिए अग्रिम कर्ज आवंटन नहीं करने की सिफारिश की है। नियामक ने आवास वित्त कंपनियों से परियोजनाओं के निर्माण की प्रगति पर नजर रखने के लिए तंत्र विकसित करने और डेवलपर को भुगतान जारी करने से पहले कर्जदार की सहमति लेने को कहा है।

Keyword: real estate, property, NHB, builder,,
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