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एलटीसीजी का आकलन पेचीदा, सेवा प्रदाता मददगार

तिनेश भसीन /  July 22, 2019

इक्विटी निवेशकों को पहली बार अपने आयकर रिटर्न में बेचे जाने वाले शेयरों और म्युचुअल फंडों के ब्योरों की घोषणा करनी होगी। इनके लाभ या नुकसान का आकलन करना एक पेचीदा काम है। यह अन्य योजनाओं से काफी अलग है। अगर आपको बोनस शेयर मिले हैं या आपने किसी म्युचुअल फंड में सिस्टमैटिक विदड्रॉल प्लान (एसडब्ल्यूपी) लिया हुआ है तो यह गणना और मुश्किल हो जाती है। सरकार ने एक साल बाद पिछले वित्त वर्ष (वित्त वर्ष 2018-19) से सू्चीबद्ध शेयरों और इक्विटी म्युचुअल फंडों पर 10 फीसदी दीर्घावधि पूंजीगत लाभ कर (एलटीसीजी) लगाना शुरू किया। हालांकि एक लाख रुपये तक का पूंजीगत लाभ कर मुक्त है, लेकिन उससे अधिक राशि होने पर पूरी राशि पर कर लगेगा। क्लीयरटैक्स के संस्थापक और सीईओ अर्चित गुप्ता ने कहा, 'इसका मकसद यह सुनिश्चित करना था कि लंबी अवधि के निवेशक नई व्यवस्था के कारण प्रभावित न हों।' निवेशकों के पास खुद लाभ की गणना करने का विकल्प है। हालांकि ऐसे कई सेवा प्रदाता हैं, जो इसमें मदद करते हैं। लेकिन आपको उनकी सेवाएं लेने के लिए कीमत चुकानी होगी। बहुत से स्टॉक ब्रोकर और कर भरने वाले प्लेटफॉर्म भी यह सेवा मुहैया कराते हैं। 
 
नए नियम में क्या प्रावधान हैं? आकलन में तीन अहम आंकड़े शामिल हैं- खरीद की असल लागत, 31 जनवरी, 2018 को शेयर का उचित बाजार मूल्य (एफएमवी) और बिक्री कीमत। इस फॉर्मूले के मुताबिक किसी निवेशक को सबसे पहले एफएमवी और बिक्री कीमत की तुलना करनी चाहिए और दोनों में से कम को चुनना चाहिए। उसके बाद इस आंकड़े की खरीद की मूल लागत से तुलना करें और दोनों में से अधिक कीमत को लें। माना कि किसी व्यक्ति ने एक कंपनी का शेयर 1 जनवरी, 2017 को 500 रुपये में खरीदा। इस शेयर की कीमत 31 जनवरी, 2018 को 1,000 रुपये हो गई। वह शेयर 1,500 रुपये में बेचता है। अगर खरीद की मूल लागत और बिक्री कीमत के आधार पर लाभ का आकलन किया गया तो निवेशक को अधिक एलटीसीजी कर चुकाना होगा। कम कर देनदारी के लिए केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने एफएमवी शुरू किया। 31 जनवरी, 2018 को शेयरों या किसी म्युचुअल फंड की इकाइयों के एफएमवी से खरीद लागत तर्कसंगत बन जाती है, जिससे पूंजीगत लाभ कर कम हो जाता है। इस उदाहरण में एफएमवी 1,000 रुपये बिक्री कीमत से कम है। दूसरे चरण में आप इसकी मूल खरीद कीमत 500 रुपये से तुलना करते हैं। लेकिन तब भी एफएमवी अधिक होता है। इसलिए शेयर की खरीद लागत एफएमवी होगी। इसे बिक्री कीमत में से घटाएं। आपको लाभ (1,500-1,000 रुपये = 500 रुपये) प्राप्त हो जाएगा और 10 फीसदी की दर से कर 50 रुपये प्रति शेयर होगा। 
 
अगर करदाता को इक्विटी निवेश बेचने पर घाटा होता है तो वह इसे आगे के वर्षों में ले जा सकता है या घाटे को लाभ से समायोजित कर सकता है। अगर आपने लंबी अवधि का इक्विटी निवेश 31 जनवरी, 2018 और 31 मार्च, 2018 के बीच बेचा है तो कर देनदारी शून्य होगी क्योंकि ये प्रावधान 1 अप्रैल, 2018 से लागू हुए हैं। इसी तरह अगर आपको वित्त वर्ष 2018-19 शुरू होने से पहले घाटा हुआ है तो उन्हें आगे नहीं ले जाया जा सकता है या समायोजित किया जा सकता है। एक अप्रैल, 2018 के बाद खरीदे गए शेयरों पर 'छूट' का प्रावधान लागू नहीं होता है। इस लाभ का आकलन खरीद और बिक्री कीमत के आधार पर करना होगा। 
 
बोनस शेयर और स्टॉक स्पिलिट 
 
ईवाई इंडिया में टैक्स पार्टनर समीर खपबंदा ने कहा, 'बोनस और स्टॉक स्पिलिट के लिए गणना अलग होगी। यह उनकी तारीख पर आधारित होगी। अगर बोनस या स्टॉक स्पिलिट 31 जनवरी, 2018 से पहले हुआ है तो उस दिन की कीमत को खरीद की लागत माना जाएगा।' एक फरवरी, 2018 के बाद स्पिलिट और बोनस के लिए आकलन का यह तरीका अपनाना होगा। निवेशक बोनस शेयर हासिल करने के लिए कोई धन नहीं चुकाता है। इसलिए खरीद की लागत शून्य है। लेकिन सीबीडीटी ने साफ किया कि बोनस शेयरों पर कर लगाया जाएगा। बोनस शेयरों की खरीद की लागत के आकलन के लिए समान फॉर्मूला अपनाना होगा। हालांकि खरीद की मूल कीमत शून्य होगी। निवेशक को खरीद की लागत हासिल करने के लिए उचित बाजार कीमत और बिक्री कीमत में से कम पर विचार करना होगा। 
 
स्टॉक स्पिलिट के मामले में खरीद की मूल लागत आवंटित शेयरों की संख्या के आधार पर बदल जाएगी। माना कि किसी व्यक्ति ने किसी कंपनी के 100 शेयर कुल 10,000 रुपये में खरीदे तो प्रत्येक शेयर की लागत 100 रुपये होगी। माना कि स्टॉक स्पिलिट के बाद उसके शेयरों की कुल संख्या 500 हो जाती है। ऐसे में खरीद की लागत को शेयरों की कुल संख्या से विभाजित किया जाएगा (10,000/500 = 20 रुपये)।  प्रत्येक शेयर की मूल खरीद कीमत 20 रुपये होगी और इसी के मुताबिक शेयरों की बिक्री के लाभ की गणना की जाएगी। 
 
सिस्टमैटिक विदड्रॉअल जटिल 
 
आम तौर पर लोग म्युचुअल फंडों में सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) के जरिये निवेेश करते हैं। वह एक समयावधि में नियमित रूप से थोड़ा-थोड़ा पैसा निवेश करता है। अब अगर वह एसडब्ल्यूपी को अपनाता है तो लाभ की गणना जटिल और लंबी हो सकती है। माना कि निवेशक ने 100 यूनिट खरीदीं और प्रत्येक यूनिट के लिए पहले महीने में 10 रुपये और दूसरे महीने में 12 रुपये का भुगतान किया। बाद में वह हर महीने एसडब्ल्यूपी के जरिये केवल 30 यूनिटों की निकासी कर रहा है। टैक्समैन डॉट कॉम में चार्टर्ड अकाउंटेंट नवीन वाधवा ने कहा, 'उसे खरीद की मूल कीमत के आकलन के लिए  फस्र्ट-इन-फस्र्ट आउट पद्धति अपनाने की जरूरत होगी। एलटीसीजी फॉर्मूले में निवेशक को पहली 100 यूनिट की निकासी तक खरीद कीमत 10 रुपये प्र्रति यूनिट लेनी होगी। अगली 200 इकाइयों की खरीद कीमत 12 रुपये होगी।' 
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