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रिलायंस इंडस्ट्रीज का घटा निर्यात

अमृता पिल्लई / मुंबई 07 22, 2019

अमेरिका और चीन के बीच कारोबारी तनाव के चलते रिलायंस इंडस्ट्रीज के पेट्रोकेमिकल कारोबार को झटका लगा है। व्यापार युद्ध से कच्चे तेल की कीमतों पर असर के अलावा कुछ पेट्रोकेमिकल उत्पादों की मांग व मार्जिन भी दबाव में आ गए हैं। नतीजे के बाद कंपनी ने निवेशकों को बताया, अमेरिका-चीन व्यापार युद्ध क्षेत्रीय पॉलिमर मार्जिन पर असर डाल रहा है और अमेरिकी कार्गो को दक्षिण पूर्वी एशिया व पश्चिमी यूरोप की ओर मोडऩा पड़ रहा है। कंपनी ने कहा कि यह असर विशेष रूप से एचडीपीई और एलएलडीपीई पर पड़ा है। क्रमिक आधार पर एचडीपीई और एलएलडीपीई के मार्जिन पर क्रमश: 10 व 9 फीसदी का झटका लगा है। व्यापार तनाव ने इन उत्पादों की मांग को भी प्रभावित किया है। जून 2019 की तिमाही में आरआईएल के पेट्रोकेमिकल कारोबार का एबिटा 8,810 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले साल की समान अवधि के 9,211 करोड़ रुपये से कम है।

चीन का निर्यात गैर-अमेरिकी बाजारों में रास्ता तलाश रहा है क्योंकि अमेरिकी बाजार मुश्किल भरे हो गए हैं। यह मुश्किल तीसरी दुनिया के देशों की कंपनियों के लिए है। शुक्रवार को विश्लेषकों के साथ बैठक के दौरान प्रबंधन ने कहा, हमें लगता है कि व्यापार से जुड़ाव तनाव खत्म होगा। हालांकि कंपनी ने चेतावनी दी कि विवाद का असर पूरी पॉलिमर शृंखला पर पड़ सकता है। विश्लेषकों ने कहा कि आरआईएल को फायदा होगा और लंबी अïधि में यह गंवा भी सकती है, लिहाजा कुल मिलाकर स्थिति तटस्थ जैसी रहेगी। देसी ब्रोकरेज फर्म के विश्लेषक ने कहा, कंपनी के निर्यात आदि के देखते हुए अमेरिका तीसरी दुनिया के देशों के लिए खुलेगा और आरआईएल को फायदा होगा।

आरआईएल के प्रबंधन को भी ऐसा ही मौका दिख रहा है। कंपनी ने अपना पक्ष रखते हुए कहा, अमेरिका में चीन के कपड़ों पर टैरिफ लगाने से अन्य क्षेत्रीय उत्पादकों को मौका मिल सकता है। विश्लेषक ने हालांकि कहा कि अगर चीन को अमेरिकी बाजार घुसने से रोका जाता है तो यह माल भारत जैसे बाजारों में पट सकता है, जिससे आरआईएल के देसी परिदृश्श्य पर असर पड़ेगा। पेट्रोकेमिकल के अलावा आरआईएल वाहनों के ईंधन का निर्यात करती है। अप्रैल-जून 2019 की तिमाही में आरआईएल के निर्यात को साल दर साल के हिसाब से 4.5 फीसदी का झटका लगा। कंपनी ने एक बयान में कहा, निर्यात 50,158 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले साल की समान अवधि में 52,501 करोड़ रुपये रहा था। पेट्रोकेमिकल व रिफाइनिंग उत्पादों की बिक्री से कम कीमत मिलने, ब्रेंट ऑयल की कीमतों में साल दर साल के हिसाब से 7.4 फीसदी की नरमी और फाइबर इंटरमीडियरीज के कम वॉल्यूम का निर्यात घटाने में योगदान रहा।
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