बिजनेस स्टैंडर्ड - दरों में कटौती की जगी आस
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Thursday, November 21, 2019 07:01 PM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम मुद्रा खबर

दरों में कटौती की जगी आस

अनूप रॉय / मुंबई July 19, 2019

बाजार में पर्याप्त नकदी, बॉन्ड प्रतिफल के कई साल के निचले स्तर पर पहुंचने और पिछले छह महीने में नीतिगत दरों में 75 आधार अंक की कटौती के बावजूद बैंकों द्वारा कर्ज की दरें नहीं घटाए जाने पर भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर शक्तिकांत दास ने आज सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों पर सख्त नाराजगी जताई। कई सूत्रों ने इसकी पुष्टि की कि आरबीआई गवर्नर ने बैंकरों से कहा, 'बॉन्ड प्रतिफल नीचे आ गया और नीतिगत दरें भी घटी हैं, बैंकों की कर्ज जुटाने की लागत भी कम हुई और तरलता की स्थिति भी बेहतर है। ऐसे में आपको और क्या चाहिए? मैं हैरान हूं कि बैंकों ने अभी तक उधारी दरों में कमी नहीं की है।' हालांकि गवर्नर नहीं चाहते कि बैंक अंधाधुंध कर्ज बांटे क्योंकि इससे परिसंपत्ति की गुणवत्ता प्रभावित होती है। सूत्रों के मुताबिक बैंकरों से कहा गया है कि अब सभी बैंक खुदरा उधारी पर अपनी विकास की रणनीति बना रहे हैं, ऐसे में बैंकों को सतर्क रहना चाहिए और जोखिम मूल्यांकन का उच्चतम मानदंड का पालन करना चाहिए।  आरबीआई किसी बैंक को दरों में कटौती करने के लिए दबाव नहीं बना सकता, क्योंकि यह बैंकों का अपना व्यावसायिक निर्णय होता है। हालांकि केंद्रीय बैंक ऐसी व्यवस्था कर सकता है जिससे बैंकों को दरें घटाने में मदद मिल सके।
 
आरबीआई ने निश्चित तौर पर ऐसी स्थिति बनाई है लेकिन बैंक अपने फंसे कर्ज के लिए प्रावधान की जरूरतों के लिए लागत वसूली के प्रयास में कर्ज की दरें घटाने से परहेज कर रहे हैं। बैंकरों ने गवर्नर से वादा किया कि बोर्ड स्तर पर उनकी राय परचर्चा की जाएगा। उन्होंने कहा कि उधारी दर कम करने से पहले जमा दरें कम करनी होगी। उनका तर्क हैै कि लघु बचत पर ब्याज दर 8 फीसदी से अधिक रहने से जमा दरें कम करने के लिए प्रोत्साहन नहीं मिल पा रहा है। सूत्रों ने कहा कि गवर्नर इन पुराने तर्कों को सुनने के इच्छुक नहीं थे। बैठक में शामिल एक सूत्र ने कहा, 'गवर्नर का कहना था कि सभी चीजें दुरुस्त हैं और स्थितियां भी अनुकूल हैं, ऐसे में बैंकों नैतिक बाध्यता है कि वह दरों में कटौती का लाभ ग्राहकों को दें।'
 
गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) को कर्ज नहीं दिए जाने को लेकर भी दास ने बैंकों की खिंचाई की। आरबीआई के अधिकारियों ने कहा कि केंद्रीय बैंक ने एनबीएफसी क्षेत्र को तरलता प्रदान करने में मदद के लिए पर्याप्त उपाय किए हैं, लेकिन बैंक उन्हेें कर्ज देने में अनिच्छा दिखा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार गवर्नर ने इस पर भी नाखुशी जताई कि बैंक अपनी वसूली तंत्र में सुधार नहीं ला रहे हैं। इसके साथ ही बैंक धोखाधड़ी से बचाव के उपाय करने में विफल हो रहे हैं। भूषण पावर के मामले का पता पहले ही पता लगा लिया जाना चाहिए था। इससे संकेत मिलता है कि बैंक को अपनी चेतावनी प्रणाली में सुधार लाने की जरूरत है। एक बैंकर ने नाम जाहिर नहीं करने की शर्त पर कहा, 'गवर्नर का रुख थोड़ा गंभीर था और संदेश साफ था कि नए और पुराने दोनों तरह के कर्ज की दरें शीघ्रता से कम की जाए।'
 
फरवरी से अब तक केंद्रीय बैंक ने लगातार तीन बार 25-25 आधार अंक की कटौती की है। लेकिन बैंकों ने केवल नए कर्ज पर उधारी दर 30 आधार अंक कम की है। पुराने कर्ज पर बैंक आम तौर पर दर में कटौती का लाभ देने का तत्पर नहीं रहते हैं। अधिकतर अर्थशास्त्रियों को उम्मीद है कि केंद्रीय बैंक एक बार और रीपो दर में 25 से 50 आधार अंक की कटौती कर सकता है। हालांकि बैंकों द्वारा कर्ज सस्ता नहीं किए जाने से नीतिगत दर में कटौती का कोई फायदा नहीं है।बैंकों का अब तक तर्क था कि बैंकिंग प्रणाली में नकदी की किल्लत है, जिससे प्रतिफल ज्यादा बना हुआ है। उधारी दर बॉन्ड प्रतिफल से जुड़ा होता है, ऐसे में वे दरें नहीं घटा सकते। हालांकि अब 10 वर्षीय बॉन्ड का प्रतिफल इस की शुरुआत से 110 आधार अंक नीचे आ गया है और केंद्रीय बैंक ने करीब 3 लाख करोड़ रुपये के बॉन्डों की पुनर्खरीद की है। ऐसे में बैंकिंग तंत्र में 1.5 लाख करोड़ रुपये की अतिरिक्त नकदी है जहां दो महीने पहले दो लाख करोड़ रुपये की किल्लत थी।आरबीआई अधिकारियों का कहना था कि बैंकों के पास दरों में कटौती के लिए आनाकानी करने की कोई वजह नहीं है।
Keyword: RBI, shaktikant das, bank, loan, NPA,,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या सेबी के नए नियम से निवेशकों के हितों की होगी रक्षा?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.